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148 साल पुरानी रजिस्ट्री सेवा बंद, अब सिर्फ स्पीड पोस्ट रहेगा विकल्प

Updated at : 31 Aug 2025 10:15 PM (IST)
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148 साल पुरानी रजिस्ट्री सेवा बंद, अब सिर्फ स्पीड पोस्ट रहेगा विकल्प

148 साल पुरानी रजिस्ट्री सेवा बंद, अब सिर्फ स्पीड पोस्ट रहेगा विकल्प

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लोहरदगा़ एक सितंबर 2025 से डाक विभाग ने बड़ा बदलाव लागू कर दिया है. पिछले 148 सालों से भी अधिक समय तक भरोसेमंद मानी जाने वाली रजिस्टर्ड पोस्ट सेवा अब पूरी तरह बंद हो गयी है. डाक विभाग के नये आदेश के तहत रजिस्ट्री अब इतिहास बन गयी है और इसके स्थान पर केवल स्पीड पोस्ट सेवा ही उपलब्ध होगी. विभाग का कहना है कि यह कदम आधुनिकता और तेज सेवाओं की दिशा में उठाया गया है. आम लोगों की जेब पर भी सीधा असर : इस बदलाव से न सिर्फ एक परंपरा का अंत हुआ है बल्कि आम लोगों की जेब पर भी सीधा असर पड़ेगा. लोकल स्तर पर रजिस्टर्ड पोस्ट 22 रुपये में उपलब्ध थी, जबकि अब स्पीड पोस्ट के लिए 41 रुपये खर्च करने होंगे. दूरी बढ़ने पर यह सेवा और महंगी हो जायेगी. ग्रामीण और निम्न आय वर्ग के लोगों के लिए यह बोझ साबित होगा. कई वरिष्ठ नागरिकों ने इस बदलाव पर निराशा जतायी है. उनका कहना है कि रजिस्टर्ड पोस्ट सेवा से उनकी यादें और भावनाएं जुड़ी रही हैं. पहले शादी के कार्ड, सरकारी पत्र, नौकरी से जुड़े दस्तावेज, यहां तक कि कोर्ट के सम्मन भी रजिस्ट्री से ही भेजे जाते थे. वह लिफाफा जो हल्की सी थाप के साथ दरवाजे पर दस्तक देता था, पोस्टमैन की साइकिल की घंटी सुनकर दिल धड़क उठता था कि शायद कोई चिट्ठी, कोई पोस्टकार्ड या मनी ऑर्डर आया हो. आज यह एक युग का अंत है. विभाग की प्राथमिकता तेज और आधुनिक सेवाएं देना है : चिट्ठियों का वह दौर जब लोग स्याही से भावनाएं लिखते थे, उन्हें संजोकर रखते थे, अब बीते दिनों की बात हो गयी है. आज भी कई बुजुर्गों के पास पुरानी चिट्ठियों का संग्रह है, जिन्हें वे अब भी संजोकर रखते हैं. डाक विभाग का कहना है कि अब उसकी प्राथमिकता तेज और आधुनिक सेवाएं देना है. डीजीपीन, होम पिकअप और फास्ट डिलीवरी जैसे विकल्पों से लोग तेजी से जुड़ रहे हैं. ऐसे में धीमी और पुरानी सेवाओं को चरणबद्ध तरीके से बंद किया जा रहा है. विभाग का दावा है कि नयी व्यवस्था से पार्सल और पत्राचार अधिक सुरक्षित और तेजी से लोगों तक पहुंचेगा. भारत में डाक सेवा की शुरुआत अंग्रेजों ने 1766 में की थी : भारत में डाक सेवा की शुरुआत अंग्रेजों ने 1766 में की थी. वर्ष 1877 में डाक विभाग ने रजिस्ट्री, बीपीपी और पार्सल सेवा की शुरुआत एक साथ की थी. लगभग 148 साल पुरानी रजिस्ट्री सेवा की खासियत यह थी कि डाकिया पत्र केवल उसी व्यक्ति को सौंपता था, जिसके नाम से वह भेजा गया है. जबकि स्पीड पोस्ट में यह बाध्यता नहीं है. परिवार का कोई भी सदस्य पत्र या पार्सल प्राप्त कर सकता है. डाक विभाग अब आइटी 2.0 सॉफ्टवेयर के माध्यम से सभी कार्य निपटा रहा है और इसे पूरी तरह डिजिटल व आधुनिक बनाया जा रहा है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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SHAILESH AMBASHTHA

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SHAILESH AMBASHTHA is a contributor at Prabhat Khabar.

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