सावधान! सिर पर लगी चोट सालों बाद भी दे सकती है गंभीर बीमारी

मिस्टर कुमार एक दिन अचानक ऑफिस से लौटते हुए बेहोश हो गये. जाँच के बाद पता चला कि उनके सिर में वर्षों पहली लगी चोट ने फिर असर दिखाया है. इसके बाद उन्हें भूलने की बीमारी हो गई जिसका अब इलाज चल रहा है. ये एक केस नहीं है ऐसे हजारों केस हैं जो दिमाग […]
मिस्टर कुमार एक दिन अचानक ऑफिस से लौटते हुए बेहोश हो गये. जाँच के बाद पता चला कि उनके सिर में वर्षों पहली लगी चोट ने फिर असर दिखाया है. इसके बाद उन्हें भूलने की बीमारी हो गई जिसका अब इलाज चल रहा है.
ये एक केस नहीं है ऐसे हजारों केस हैं जो दिमाग पर लगी कई सालों पहले की चोट के कारण व्यक्ति को मानसिक रोगी बना रहे हैं. इसी से जुड़े हालिया हुए एक शोध में ब्रिटिश विज्ञानिकों ने इस का खुलासा किया है. उनके अनुसार, सालों पहले सिर में लगी चोट, दिमाग में अल्जाइमर से संबंधित प्रोटीन मस्तिष्क में स्थायी रूप से जगह बना लेता है. जो बाद में कई सालों बाद भी व्यक्ति को मानसिक रोगी बना देता है.
लंदन के इंपीरियल कॉलेज के अनुसंधानकर्ताओं का कहना है कि ऐसे व्यक्ति को डिमेंशिया रोग (स्मृति लोप, एकाग्रता समाप्त होना, असामान्य व्यवहार) होने की आशंका सदैव रहती है. अब तक विज्ञानी यह नहीं समझ पा रहे थे कि चोट ठीक होने के वर्षो बाद भी मानसिक असामान्यता कैसे आ जाती है. इसका सबसे बड़ा कारण बीटा एमिलोइड प्रोटीन के वे गुच्छे हैं या परतें हैं जो दिमाग में जगह बना लेते हैं और जिनका सीधा संबंध मस्तिष्क की एक अन्य बीमारी से होता है.
विशेषज्ञों का कहना है कि दुर्घटना में सिर में चोट लगने पर फाइबर के ऐसे गुच्छे या परत दिमाग में बन जाती हैं जो सामान्य तकनीक से पकड़ में नहीं आ पाते. चोट का शिकार व्यक्ति यह सोच कर निश्चिंत हो जाता है कि वह ठीक हो चुका और सामान्य तौर पर चिकित्सक भी निश्चित अवधि की दवा देकर आत्म संतोष कर लेते हैं.
मुख्य अनुसंधानकर्ता डॉ ग्रेगरी स्कॉट ने कहा, बीमारी या चोट से पूरी तरह आराम मिलना ही काफी नहीं, यह व्यवस्था भी होनी चाहिए कि भविष्य में कोई अन्य दुष्प्रभाव दिखाई न दे. इससे डिमेंशिया की रोकथाम में बड़ी सफलता मिल सकती है.
यह अनुसंधान जर्नल ऑफ क्लीनिक न्यूरोसाइंस में प्रकाशित हुआ है.
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