पीएम की छह दिनों की अफ्रीका यात्रा

Updated at : 06 Jul 2015 10:04 AM (IST)
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पीएम की छह दिनों की अफ्रीका यात्रा

-आदिस अबाबा (इथियोपिया) से हरिवंश- सोमवार को प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह अपने विशेष विमान ‘आगरा’ (747-400) से आदिस अबाबा (राजधानी इथियोपिया) पहुंचे. यहां 24-25 मई को दूसरे ‘इंडिया-अफ्रीकन फोरम’ की शिखर वार्ता है. पहली शिखर वार्ता वर्ष 2008 अप्रैल में हुई थी. भारत में. इसके बाद प्रधानमंत्री तंजानिया जायेंगे. प्रधानमंत्री की छह दिनों की यह […]

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-आदिस अबाबा (इथियोपिया) से हरिवंश-
सोमवार को प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह अपने विशेष विमान ‘आगरा’ (747-400) से आदिस अबाबा (राजधानी इथियोपिया) पहुंचे. यहां 24-25 मई को दूसरे ‘इंडिया-अफ्रीकन फोरम’ की शिखर वार्ता है. पहली शिखर वार्ता वर्ष 2008 अप्रैल में हुई थी. भारत में. इसके बाद प्रधानमंत्री तंजानिया जायेंगे. प्रधानमंत्री की छह दिनों की यह अफ्रीका यात्रा है. वह 28 मई शनिवार रात को भारत लौटेंगे.
अफ्रीकन यूनियन के चेयरमैन तेओडोरो ओबियांग न्गुएमा म्बासोगो हैं. वह इक्विटोरिएल गुयाना के राष्ट्रपति हैं. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह इसके सह अध्यक्ष हैं. इसमें 15 अफ्रीकी देश भाग लेंगे. अगले कुछेक वर्षों के लिए भारत-अफ्रीकन समूह के देशों के बीच व्यापार समझौतों-संभावनाओं पर इस शिखर वार्ता में चर्चा होगी.
दिल्ली शिखर वार्ता में तंजानिया सह-अध्यक्ष की भूमिका में था. तब भारत ने गरीब अफ्रीकी देशों को 24283.8 करोड़ रुपये के ॠण की घोषणा की थी और 2248.5 करोड़ रुपये का ग्रांट भी. भारत-अफ्रीका व्यापार इन दिनों 175,383 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है. इस शिखर वार्ता में मुक्त व्यापार समझौता की बात भी है.
19 देशों के साथ. 19 देशों का साझा बाजार है ‘कॉमन मार्केट फॉर इस्टर्न एंड सदर्न अफ्रीका’ (सीओएमइएसए). इसके बाद 16 अन्य देशों के समूह ‘इकोनॉमिक कम्युनिटी ऑफ बेस्ट अफ्रीकन स्टेट्स’ (इसीओबीएएस) से समान प्रक्रिया शुरू होगी. इससे भारत का आर्थिक संबंध अफ्रीका के अधिकाधिक देशों से संभव होगा. अंतत: अफ्रीका के कुल 53 देशों में से अधिकाधिक से भारत के व्यापारिक संबंध बनें, यह कोशिश है.
भारत लगातार एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के देशों के साथ व्यापार और तिजारत के संबंध बनाने-बढ़ाने में लगा है.
अर्थशास्त्र में 2001 में नोबेल पुरस्कार पाये (जॉर्ज अकरलोफ और जोसेफ स्टिग्लिट्ज के साथ) माइकेल स्पेंस के अध्ययन का विषय है, ‘इकोनॉमिक्स ऑफ डेवलपमेंट एंड ग्रोथ’ (विकास का अर्थशास्त्र). इस विधा में उनकी खास रुचि है. वह और ऐसे अनेक मानते हैं कि ज्ञात मानव इतिहास में इससे पहले कभी इतने अधिक लोग एक साथ संपन्न-समृद्ध नहीं हुए.
एशिया में जापान पहला देश था, जिसने तेज गति से विकास, समान रफ्तार से हासिल किया. इसके बाद कुछ थोड़े एशियन देशों ने तेज विकास गति प्राप्त की. वे एशियन टाइगर्स कहलाये. माइकेल स्पेंस विस्मृत हैं कि क्या इस फार्मूले के तहत भारत-चीन की रहनुमाई में दुनिया की 60 फीसदी आबादी विकास की वह तेज रफ्तार साकार कर सकेगी. नोबेल पुरस्कार प्राप्त अर्थशास्त्री स्पेंस मानते हैं कि प्रगति और विकास अर्थशास्त्र का ज्ञान, विदेशी मदद, व्यापार, उदारीकरण, प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग और सहयोग से जुड़े हैं. मध्य आय से उच्च आय की स्थिति में पहुंचने के क्रम में देश जो कठिनाई महसूस करते हैं. विशेषज्ञों की नजर में वह संक्रमण दौर देखना रोचक होनेवाला है.
दुनिया में व्यापार बढ़ाने और आपसी संबंधों के सेतु मजबूत करने के तेज प्रयास चल रहे हैं और भारत भी इस बदलते दौर की बदलती दुनिया में विकास-प्रगति का इतिहास बनाने में लगा है. इसी क्रम में आर्थिक और व्यापार समझौतों को मजबूत करने-बढ़ाने के क्रम में प्रधानमंत्री की यह अफ्रीका यात्रा है.
अफ्रीका, जहां चीन और अन्य देश भी अवसर की तलाश में बड़े पैमाने पर अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुके हैं, भारत मानता है कि अफ्रीका ‘अवसर’ (अपारचुनिटी) है. वह तेजी से बढ़ रहा है. जहां विकास होगा या अवसर होंगे, वहां अन्य मुल्क भी आयेंगे. स्पर्द्धां होगी. पर कंपटीशन (स्पर्द्धा) में जिसमें योग्यता -कौशल होगा, वह अपनी जगह बना लेगा. इस तरह भारत को आत्मविश्वास है कि बढ़ते-विकसित होते अफ्रीका में जो अवसर होंगे, उसमें भारत अपनी जगह बनायेगा.
इसी क्रम में इंडिया-अफ्रीका फोरम की दूसरी शिखर वार्ता यहां हो रही है. अफ्रीका बदलती दुनिया में अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुका है. एशिया के बाद दुनिया का दूसरे नंबर का सबसे बड़ा कांटिनेंट (महाद्वीप). ऊर्जा संसाधनों का भंडार. आनेवाले समय में ऊर्जा की किल्लत निर्णायक स्थिति में पहुंचनेवाली है. उस स्थिति में अफ्रीका रिजरवायर ऑफ इनर्जी रिसोर्सेज (ऊर्जा संसाधनों के भंडार) दुनिया के लिए सबसे अनमोल होनेवाला है. या हो गया है.
दक्षिण अफ्रीका, मॉरिशस, नाइजीरिया, मिस्र (इजिप्ट), तंजानिया आदि भारत से निर्यात (एक्सपोर्ट) करनेवाले मुल्क हैं. भारत के आयात (इंपोर्ट) पार्टनर हैं, नाइजीरिया, दक्षिण अफ्रीका, कांगो और तंजानिया. अफ्रीका से जो चीजें भारत जाती हैं, उनमें खनिज तेल, ईंधन, कॉपर खनिज, कॉफी वगैरह हैं.
भारत अनगढ़ हीरों का सबसे बड़ा क्रेता है. दक्षिण अफ्रीका से. भारत कॉटन, इस्पात, लोहा, स्टील, न्यूक्लीयर रियेक्टर, मशीनरी वगैरह अफ्रीका में देता है. 2015 तक भारत का व्यापारिक संबंध दक्षिण अफ्रीका से 70 बिलियन डॉलर का होगा. यह लक्ष्य बताया है वाणिज्य और उद्योग मंत्री आनंद शर्मा ने.
भारत अफ्रीका में बड़े पैमाने पर निवेश भी कर रहा है. 25 बिलियन डॉलर से अधिक अफ्रीका में ऊर्जा क्षेत्र में भारत ने निवेश किया है. मैनुफैक्चरिंग और सेवा क्षेत्रों में अलग निवेश है. भारत के बड़े निवेशक हैं, ओएनजीसी, एस्सार, टाटा, भारती एयरटेल, रैनबैक्सी, टीसीएस इनफोसिस वगैरह.
इस तरह प्रधानमंत्री की अफ्रीका यात्रा भारत के लिए महत्वपूर्ण है. प्रधानमंत्री के विशेष विमान के उतरते समय जो दृश्य इथियोपिया का दिखा, उससे झारखंड की स्मृति उभरी. वैसी ही जमीन, पहाड़. पर इनके लिए उपलब्ध प्राकृतिक संसाधन विकास की सीढ़ी बन रहे हैं. प्रधानमंत्री के स्वागत में परंपरागत रंग-बिरंगे परिधान नृत्य वगैरह देख कर झारखंडी जीवनशैली की झलक भी मिली, इथियोपिया की धरती पर.
दिनांक 24.05.2011
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