बेटा हो या बेटी अच्छी परवरिश को दें अहमियत

Updated at : 10 Dec 2014 12:56 PM (IST)
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बेटा हो या बेटी अच्छी परवरिश को दें अहमियत

वीना श्रीवास्तव लेखिका व कवयित्री इ-मेल: यह हम दोनों का ही फैसला है कि हमारा एक ही बच्चा होगा, दूसरा नहीं. इस महंगाई में हम ठीक से एक बच्चे को ही पाल सकते हैं. उसकी पढ़ाई में हम कोई कसर नहीं रखना चाहते. दो बच्चों के लिए कपड़े, किताब, खाना-पीना और पढ़ाई का खर्च हम […]

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वीना श्रीवास्तव
लेखिका व कवयित्री
इ-मेल:
यह हम दोनों का ही फैसला है कि हमारा एक ही बच्चा होगा, दूसरा नहीं. इस महंगाई में हम ठीक से एक बच्चे को ही पाल सकते हैं. उसकी पढ़ाई में हम कोई कसर नहीं रखना चाहते. दो बच्चों के लिए कपड़े, किताब, खाना-पीना और पढ़ाई का खर्च हम कैसे उठा पायेंगे? यह हमारे बजट के बाहर है. हम नहीं चाहते कि एक बच्चे को अच्छे स्कूल में पढ़ाने के बजाय दो बच्चों को हम किसी मीडियम स्कूल में पढ़ाएं.
नीला से मिलने उसके भाई-भाभी सागर-पारु ल और उनका पांच वर्ष का बेटा शिखर आया हुआ था. घर में जब भी कोई बच्चा आता, तो घर के छोटे बच्चों की मस्तियां बढ़ जातीं. प्रांशु वहां आकर खूब खुश था. उसे आये हुए तीन दिन हो गये थे. अगले दिन उसे जाना था. रात में वह रोने लगा. सब परेशान हो गये.
सभी प्रांशु से पूछ रहे थे कि बेटा आखिर हुआ क्या, क्यों रो रहे हो? काफी देर बाद उसने कहा कि मैं यहां से तब जाऊंगा जब आप मेरे लिए एक बहन या भाई लाओगे. मैं वहां किसके साथ खेलूंगा? मुङो यहीं रहना है. पराग और झरना के साथ खेलना है. यह सुन कर सब भौंचक्के रह गये. किसी ने नहीं सोचा था कि प्रांशु इस तरह रिएक्ट करेगा. सबकी नजरें सागर और पारु ल की तरफ थीं.
पारुल ने सबको अपनी तरफ इस तरह देखते हुए कहा- आप सब मुङो ऐसे क्यूं देख रहे हैं. मैं जानती हूं कि आप क्या पूछना चाह रहे हैं. यह हम दोनों का ही फैसला है कि हमारा एक ही बच्चा होगा, दूसरा नहीं. इस महंगाई में हम ठीक से एक बच्चे को ही पाल सकते हैं. उसकी पढ़ाई में हम कोई कसर नहीं रखना चाहते. उसका खान-पान हमें ही देखना है. वह चार गिलास दूध भी पीना चाहेगा, तो हम उसे चार बार दूध पिलायेंगे. हम नहीं चाहते कि उस चार गिलास दूध में से हम दो गिलास दूसरे बच्चे को दें. अगर दूसरा भी हमसे चार गिलास दूध की फरमाइश कर बैठा तो कहां से लायेंगे हम आठ गिलास दूध? दूध का उदाहरण तो एक बानगी भर है. दो बच्चों के लिए कपड़े, किताब, खाना-पीना और पढ़ाई का खर्च हम कैसे उठा पायेंगे? यह हमारे बजट के बाहर है.
हम नहीं चाहते कि एक बच्चे को अच्छे स्कूल में पढ़ाने के बजाय दो बच्चों को हम मीडियम स्कूल में पढ़ाएं. इस तरह का समझौता हम नहीं करेंगे. हमारे लिए एक बेटा ही काफी है. पारु ल की बात सुन कर नीला ने कहा- भाभी क्या आपको नहीं लगता कि आपकी एक बेटी भी होनी चाहिए? नहीं नीला दी, मुङो बेटा-बेटी से फर्क नहीं पड़ता. प्रांशु की जगह अगर हमारी बेटी भी होती तो भी हम खुश होते. अब प्रांशु है और हम प्रांशु के साथ खुश हैं. उसे मैं समझाने की कोशिश करूंगी.
वह समझ जायेगा. उसकी बात सुन कर शारदा देवी ने कहा- पारु ल ठीक कह रही है. एवरेज स्कूल में दो बच्चों को पढ़ाने से बेहतर है कि एक को ही अच्छे स्कूल में पढ़ाया जाये. हमारे पास साधन सीमित होते हैं. यह हम पर निर्भर करता है कि हम उन साधनों को कई भागों में बांटे या किसी एक के ऊपर सारे साधन खर्च करें. जैसा सागर-पारु ल सोच रहे हैं, वैसा ही सब सोचने लगें, तो हमारे देश की बढ़ती आबादी पर नियंत्रण हो सकता है.
फिर हम सभी अपने बच्चों को बेहतर जीवन और शिक्षा दे पायेंगे. हम पढ़-लिखकर भी बेटा-बेटी के बीच फर्क नहीं मिटा पा रहे हैं. बेटे की चाहत में आज भी तीन-चार बच्चे हो जाते हैं. फिर वहीं हालात. जिनके पास बहुत धन है, वह तो मैनेज कर लेते हैं, लेकिन बाकी चार रोटी एक बच्चे को खिलाने की जगह चारों को एक-एक रोटी खिलाते हैं. शारदा देवी ने प्रांशु को अपने पास बुलाया और पूछा- तुम अपने छोटे भाई या बहन के लिए क्या कर सकते हो? प्रांशु ने कहा- सब कुछ दादी मां. शारदा देवी ने पूछा, अगर तुम्हारी मां तुम्हारी किताबें और खिलौने दूसरे बच्चे को दे दे, जब तुम टीवी पर फेवरेट कार्टून देखो उस समय तुम्हारा भाई कुछ और देखना चाहे, उसके कपड़े-खिलौने ज्यादा और महंगे खरीदे जाएं, तुम्हारे गेम उसे दे दिये जाएं, उसके रोने पर तुमको डांटा जाएं, तुम्हारी सारी चीजें उसे दे दी जाएं, तो क्या तुम्हें खराब नहीं लगेगा?
प्रांशु ने कहा- बिल्कुल नहीं, मैं अपने भाई-बहन को खूब प्यार करूंगा. शारदा देवी ने फिर कहा- उसकी देखभाल में मम्मा तुमको प्यार करना छोड़ दे, तुम पर ध्यान और समय कम दे, तुम मम्मा के हाथ से खाने के लिए बैठे रहो और मम्मा दूसरे बच्चे को खाना खिलाए. तुम्हारी जगह दूसरे बच्चे को अपने पास सुलाए तो तुम्हें कैसा लगेगा? अभी तक तो सारा प्यार मम्मा तुम्हें दे रही है, लेकिन छोटा बेबी आयेगा तो मम्मा-पापा का प्यार बंट जायेगा. मम्मा-पापा को उसे भी तो प्यार देना होगा और वह तुमसे छोटा होगा, तो उसे ज्यादा देखभाल की जरूरत होगी. हर समय वही गोदी में रहेगा. प्रांशु ने कहा- मम्मा मुङो क्यों नहीं गोदी लेगी?
खाना तो मैं मम्मा के हाथ से ही खाऊंगा और मम्मा के पास भी मैं ही सोऊंगा. शारदा देवी ने कहा- बेटा वह दो बच्चों को एक साथ कैसे खाना खिलायेगी और कैसे अपने पास सुलायेगी? वह छोटा होगा, तो उसे ही मम्मा प्यार करेगी और उसे ही अपने पास सुलायेगी. ये बातें तो तुम्हें माननी पड़ेंगी, तभी मम्मा दूसरा बेबी लायेगी. शारदा देवी के ये बातें कहते ही वह बोल- नहीं, यह कभी नहीं होगा. मम्मा के पास मैं ही सोऊंगा और मम्मा पहले मुङो खिलाएगी. मुङो तो खेलने के लिए भाई चाहिए था. अपना सामान दे सकता हूं पर मम्मा नहीं. फिर शारदा देवी ने सबसे कह- बच्चों को ठीक से समझाया जाये, तो वे सब समझ जाते हैं. तभी नीला ने कहा- मां, क्या हमारा बच्चा हमारे बाद दुनिया में अकेला नहीं रह जायेगा? कौन उसका सुख-दुख बांटेगा? किससे वह अपनी बातें शेयर करेगा? कौन उसका साथ देगा?
( क्रमश:)
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