तनाव में जीती है विवाहित महिलाएं, दोगुनी हो गयी है सुसाइड रेट : सर्वे

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भारतीय महिलाएं कितने तनाव में रहती हैं इसका एक ताजा उदाहरण उस सर्वे में दिखता है जिसमें यह बताया गया है कि वर्ष 2016 में विश्व में सुसाइड करने वाली महिलाओं में से 37 प्रतिशत भारतीय थीं. लैंसट पब्लिक हेल्थ जरनल में प्रकाशित सर्वे के अनुसार 2016 में विश्व में आत्महत्या करनेवाली महिलाओं में 37% […]

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भारतीय महिलाएं कितने तनाव में रहती हैं इसका एक ताजा उदाहरण उस सर्वे में दिखता है जिसमें यह बताया गया है कि वर्ष 2016 में विश्व में सुसाइड करने वाली महिलाओं में से 37 प्रतिशत भारतीय थीं. लैंसट पब्लिक हेल्थ जरनल में प्रकाशित सर्वे के अनुसार 2016 में विश्व में आत्महत्या करनेवाली महिलाओं में 37% भारतीय थीं, जबकि पुरुष 24.3 प्रतिशत थे.

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इस सर्वे से जुड़ी रिसर्चर राखाी डांडोना ने टाइम्स अॅाफ इंडिया से इस सर्वे के बारे में विशेष बातचीत की. उन्होंने बताया कि सुसाइड करने वाली महिेलाओं में विवाहित महिलाओं की संख्या ज्यादा है. जबकि भारतीय समाज में विवाहित महिलाओं को ज्यादा सुरक्षित माना जता है.

विवाहित महिलाओं द्वारा अधिक सुसाइड करने के बारे में उन्होंने कहा कि संभवत: मानसिक तनाव इसका प्रमुख कारण है. कम उम्र में शादी, इच्छा के विरुद्ध शादी, कम उम्र में मां बनना और घरेलू हिंसा जैसी समस्याएं सुसाइड का कारण बन रही हैं.

सर्वे में जो बात सबसे चौंकाने वाली है वह यह है कि 1990 से 2016 के बीच आत्महत्या के आंकड़े में 40 प्रतिशत तक की वृद्धि देखी गयी. 2016 में भारत में अनुमानित तौर पर 2,30,314 लोगों ने आत्महत्या की. कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा जैसे राज्यों में आत्महत्या करने वालों की संख्या ज्यादा है. सर्वे के अनुसार भारत में एक लाख महिलाओं में से 15 सुसाइड कर लेती है और 1990 की तुलना में 2016 में यह आंकड़ा दोगुना हो गया है. 1990 में यह आंकड़ा प्रति 1 लाख महिलाओं पर 7 था.

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