योग से बनाएं सेहत के साथ सफलता का संयोग

Updated at : 22 Jun 2017 12:12 PM (IST)
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योग से बनाएं सेहत के साथ सफलता का संयोग

तनावों से भरी आज की जीवनशैली में स्वस्थ रहने के लिए योग का महत्व पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गया है. योग की बढ़ती लोकप्रियता ने इस क्षेत्र में कैरियर बनाने की चाह रखनेवाले युवाओं के लिए संभावनाओं के कई रास्ते खोले हैं. आज स्कूलों से लेकर कॉलेजों, अस्पतालों एवं कॉरपोरेट तक योग प्रशिक्षकों की […]

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तनावों से भरी आज की जीवनशैली में स्वस्थ रहने के लिए योग का महत्व पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गया है. योग की बढ़ती लोकप्रियता ने इस क्षेत्र में कैरियर बनाने की चाह रखनेवाले युवाओं के लिए संभावनाओं के कई रास्ते खोले हैं. आज स्कूलों से लेकर कॉलेजों, अस्पतालों एवं कॉरपोरेट तक योग प्रशिक्षकों की मांग काफी तेजी से बढ़ रही है. ऐसे में यदि आप लीक से हट कर किसी क्षेत्र में कैरियर बनाना चाहते हैं, तो योग आपके लिए सफलता की राह बना सकता है…

आज स्वास्थ्य के प्रति लोग जितना जागरूक हैं, पहले कभी नहीं थे. नौकरी, मंदी, प्रतिस्पर्धा से जूझती जिंदगी काफी तनावपूर्ण हो चुकी है. तनाव से दूर रहने और खुद को सकारात्मक बनाये रखने के लिए लोग योग की शरण में जा रहे हैं. योग स्वस्थ जीवन जीने की एक कला है. यह 5000 वर्ष पुराना भारतीय दर्शन है, जो व्यायाम, श्वसन, आहार, आराम और ध्यान का संयोजन है. दिसंबर 2014 में 21 जून को संयुक्त राष्ट्र द्वारा योग दिवस घोषित करने के बाद विश्व भर में व्यापक स्तर पर योग सीखने और अभ्यास करने के प्रति लोगों की रुचि बढ़ी है. साथ ही योग प्रशिक्षकों के लिए नये-नये मौके बने हैं. यदि आप भी ऐसे क्षेत्र में कैरियर बनाना चाहते हैं, जहां तनाव की बजाय शांति और स्वास्थ्य के साथ अागे बढ़ने का मौका मिले, तो योग आपके बेहतर कैरियर है.

सैद्धांतिक समझ है जरूरी

इस क्षेत्र में सफलता प्राप्त करने के लिए आपको सबसे पहले योग के मूल सिद्धांतों में निपुण होना होगा. देश में कई संस्थान योग साइंस में स्नातक, स्नातकोत्तर, डिप्लोमा और सर्टिफिकेट के स्तर पर कोर्स उपलब्ध करा रहे हैं, जहां आप सैद्धांतिक और व्यावहारिक स्तर पर ज्ञानार्जन कर सकते हैं. योग साइंस में बीएससी के लिए 12वीं में फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी का होना जरूरी है. योग में पीजी डिप्लोमा कोर्स भी किया जा सकता है. इस कोर्स में किसी भी संकाय में न्यूनतम 50 फीसदी अंकों के साथ स्नातक पास करनेवाले छात्र दाखिला ले सकते हैं. इसके अलावा 2-3 महीने के शॉर्ट टर्म सर्टिफिकेट कोर्स के जरिये भी इस विधा का ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं.

आगे बढ़ने के लिए आवश्यक गुण

योग की विधा को बारीकी से समझने के अलावा आगे बढ़ने के लिए अच्छा कम्युनिकेशन और इंटरपर्सनल स्किल्स, लोगों को योग के प्रति प्रेरित करने और मजबूत दृढ़ संकल्प रखने जैसे गुणों का होना आवश्यक होता है. इसके अतिरिक्त आप के अंदर कठिन-से-कठिन योग आसन एवं मुद्राओं का अभ्यास करने की इच्छा शक्ति होनी चाहिए. वहीं व्यावसायिक स्तर पर आप आध्यात्मिक योग, योग थेरेपी, विशेष रूप से बच्चों के लिए किये जानेवाले आसन, जोड़ों के लिए योग, काॅरपोरेट योग, प्रसव पूर्व एवं प्रसव उपरांत योग अादि में स्पेशलाइजेशन के साथ अलग पहचान बना सकते हैं.

संभावनाओं से भरा है कैरियर

श्रेष्ठ नौकरियों की सूची में योग इंस्ट्रक्टर सबसे ऊपर है. केंद्र सरकार ने फिजिकल एजुकेशन प्रोग्राम के तहत छठी से दसवीं तक के बच्चों के लिए केंद्रीय और नवोदय विद्यालयों में योग को एक वैकल्पिक विषय घोषित किया है. वहीं मध्य प्रदेश, दिल्ली समेत कई राज्य सरकारों ने सरकारी स्कूलों के पाठ्यक्रम में योग को एक पूर्ण विषय का दर्जा दिया है. इससे देश में प्रशिक्षित योग शिक्षकों की मांग बढ़ी है. कई बड़े प्राइवेट स्कूल भी अब योग को एडिशनल विषय के रूप में शामिल कर रहे हैं. योग प्रशिक्षक के लिए देश ही नहीं, विदेशों में विशेष कर अमेरिका में नौकरी के मौके बढ़ रहे हैं. अमेरिका में एक अनुभवी योग प्रशिक्षक की सालाना कमाई करीब 42 लाख रुपये तक होती है. इसके अतिरिक्त योग प्रशिक्षकों के लिए योग एकेडमी, हेल्थ रिसॉर्ट, अस्पतालों, जिम, स्कूलों, स्वास्थ्य केंद्रों, हाउसिंग सोसाइटीज और कॉरपोरेट सेक्टर में भी कैरियर की अच्छी संभावनाएं हैं.

योग टूरिज्म में तेजी से उभर रहा है भारत

पिछले कुछ वर्षों में भारत चिकित्सा पर्यटन के रूप में उभरा है. यह क्षेत्र काफी तेजी से विकसित हो रहा है, जिसकी अनुमानित वार्षिक वृद्धि दर 22 प्रतिशत है. 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाने के सरकार के फैसले से विश्वभर में योग का प्रचार करने में महत्वपूर्ण मदद मिली है. योग बड़ी तेजी से स्वास्थ्य देखभाल उपचार पद्धति के रूप में विकसित हो रहा है, जिसे लोग स्वस्थ रहने के एक माध्यम के रूप में अपनाने लगे हैं. योग पर्यटन आज पर्यटन उद्योग के अभिन्न हिस्से के रूप में उभर रहा है, जिसमें भारी मात्रा में विदेशी मुद्रा अर्जित करने और रोजगार के अवसर पैदा करने की क्षमता है. बड़ी संख्या में पर्यटक शांति और आध्यात्मिकता का अनुभव एवं लाभ उठाने के लिए हमारे देश की यात्रा पर आते हैं. वे यहां योग अभ्यास करने और स्वस्थ जीवन से संबंधित अन्य परंपरागत पद्धतियों को सीखने के लिए आते हैं. हिमालय में स्थित निर्मल और शांत मठों से लेकर सुदूर दक्षिण में हिंद महासागर के किनारों तक स्थित योग और परंपरागत चिकित्सा केंद्र दुनियाभर से आनेवाली पर्यटकों को शांति प्रदान करते हैं और इन आरोग्यकर पद्धतियों के चमत्कारिक प्रभाव को महसूस कराते हैं. उत्तराखंड से लेकर तमिलनाडु तक देशभर में बड़ी संख्या में स्वास्थ्य केंद्र और आश्रम हैं, जो समग्र स्वास्थ्य आधारित यात्रा की बढ़ती मांग को पूरा करते हैं.

कैसे बना सकते हैं पहचान

योग के क्षेत्र में आप अपनी योग्यता के अनुसार एरोबिक्स इंस्ट्रक्टर, योग थेरेपिस्ट, योग इंस्ट्रक्टर, योग शिक्षक, थेरेपिस्ट और नेचुरोपैथ्स, ट्रेनर/ इंस्ट्रक्टर हेल्थ क्लब, रिसर्च ऑफिसर-योग और नेचुरोपैथी आदि के रूप में काम कर सकते हैं.

योग की शिक्षा प्रदान करनेवाले

प्रमुख संस्थान

मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान, नयी दिल्ली : यह एक स्वायत्त संस्थान हैं, जो देशभर में योग संस्कृति के विकास और संवर्धन के लिए एक नोडल एजेंसी के रूप में काम करता है. यह संस्थान योग अध्ययन में शॉर्ट टर्म कोर्सेज से लेकर पीएचडी तक कई पाठ्यक्रमों का संचालन करता है. अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थियों के लिए यहां स्कॉलरशिप भी उपलब्ध है.

वेबसाइट : www.yogamdniy.nic.in

बिहार योग विद्यालय, मुंगेर, बिहार : मुंगेर स्थित योग विद्यालय की स्थापना 1964 में श्री स्वामी सत्यानंद सरस्वती ने की थी. यहां साल में दो बार चार महीने के योग अध्ययन पाठ्यक्रमों का संचालन किया जाता है. विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम पूरा होने तक आश्रम में ही रहना होता है.

वेबसाइट : www.biharyoga.net

राममणि अयंगर मेमोरियल योग इंस्टीट्यूट, पुणे, महाराष्ट्र : इस संस्थान की स्थापना 1975 में योगाचार्य बीकेएस अयंगर ने की थी. विश्वभर से विद्यार्थी योग का सार और जीवन मूल्यों का अध्ययन करने के लिए यहां आते हैं. इस संस्थान में अयंगर योग कक्षाओं का नियमित रूप से आयोजन किया जाता है, जो नव-प्रशिक्षुओं से लेकर वरिष्ठ अभ्यासकर्ताओं से संबद्ध होती हैं.

वेबसाइट : http://bksiyengar.com/

श्री के पट्टाभि जोइस अष्टांग योग इंस्टीट्यूट, मैसूर, कर्नाटक : यह संस्थान तीन महीने के सीमित पाठ्यक्रम का संचालन करता है. संस्थान विद्यार्थियों को कोई छात्रावास प्रदान नहीं करता है और दाखिला लेनेवाले विद्यार्थियों को पास पड़ोस में ठहरने की व्यवस्था करनी होती है.

वेबसाइट : www.kpjayi.org

अंतरराष्ट्रीय शिवानंद योग वेदांत सेंटर (पैन इंडिया) : इस संगठन की स्थापना स्वामी विष्णुदेवानंद ने अपने गुरु स्वामी शिवानंद के नाम पर की थी. प्रथम शिवानंद योग केंद्र की स्थापना 1959 में मोंट्रियल, कनाडा में की गयी थी. उसके बाद से विश्वभर में ऐसे अनेक केंद्रों, संबद्ध केंद्रों और आश्रमों की स्थापना की जा चुकी है.

वेबसाइट : www.sivananda.org

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