गांवों से कहीं ज्यादा शहरों में लड़कियों के बाल विवाह
Updated at : 05 Jun 2017 12:24 PM (IST)
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रिपोर्ट: एनसीपीसीआर की अध्ययन रिपोर्ट में खुलासा कम उम्र में लड़कियों की शादी के मामले में शहरी क्षेत्र ग्रामीण इलाकों से आगे हैं. एनसीपीसीआर की एक ताजा रिपोर्ट में यह तथ्य उजागर हुआ है. नयी दिल्ली : ग्रामीण इलाकों में बाल विवाह के मामलों के अधिक होने की आम धारणा से विपरीत एक ताजा रिपोर्ट […]
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रिपोर्ट: एनसीपीसीआर की अध्ययन रिपोर्ट में खुलासा
कम उम्र में लड़कियों की शादी के मामले में शहरी क्षेत्र ग्रामीण इलाकों से आगे हैं. एनसीपीसीआर की एक ताजा रिपोर्ट में यह तथ्य उजागर हुआ है.
नयी दिल्ली : ग्रामीण इलाकों में बाल विवाह के मामलों के अधिक होने की आम धारणा से विपरीत एक ताजा रिपोर्ट में शहरी क्षेत्रों में लड़कियों के 18 साल से कम उम्र में शादी किये जाने के ज्यादा मामले सामने आये हैं. कम उम्र में होने वाली लड़कियों की शादी के बढ़े आंकड़ों को लेकर राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) चिंतित है़ गैर सरकारी संस्था यंग लाइव्ज ने एनसीपीसीआर के साथ मिलकर एक अध्ययन किया और बीते सप्ताह उसके अध्ययन पर आधारित एक रिपोर्ट जारी की गयी़ रिपोर्ट में स्पष्ट है कि देश में तमाम सरकारी, गैर सरकारी और सामाजिक प्रयासों के बावजूद बाल विवाह की समस्या बरकरार है. हालांकि बाल विवाह में गिरावट आयी है. एनसीपीसीआर ने बाल विवाह को लेकर खास कर शहरी इलाकों में जागरूकता अभियान चलाने का फैसला किया है. जिन जिलों और क्षेत्रों में बाल विवाह के मामलों में इजाफा हुआ है, वहां के प्रशासन और सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर संरक्षण आयोग जागरूकता अभियान चलायेगा.
एक दशक में हुए 1.2 करोड़ बाल विवाह
एनसीपीसीआर और यंग लाइव्ज की रिपोर्ट के अनुसार इस रिपोर्ट में कहा गया है कि साल 2011 की जनगणना में पाया गया कि देश में एक दशक के भीतर कुल 1.2 करोड़ बाल विवाह हुए़ इनमें 69.5 लाख लड़के थे़ इनकी 21 साल से कम उम्र में शादी हो गयी और 51.6 लाख लड़कियां थीं जिनकी उम्र शादी के वक्त 18 साल से कम है.
देश के 13 राज्यों के 70 जिलों के आंकडों के आधार पर बनी रिपोर्ट में कहा गया है कि बाल विवाह के मामले में राजस्थान की स्थिति सबसे खराब है. राजस्थान में 4.69 फीसदी लड़कों की शादी 21 साल से कम उम्र में हुई़ इसी तरह राज्य की 2.5 फीसदी लड़कियों की शादी 18 साल से कम उम्र में हो गयी. राजस्थान में इस समस्या की सबसे बड़ी वजह पुराने समय से चली आ रही परंपरा है.
शहरी इलाकों में लड़कियों के बाल विवाह में हो रही बढ़ोतरी
साल 2011 की जनगणना के आंकड़ों पर आधारित इस रिपोर्ट में सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि 2001 से 2011 के दौरान देश भर में राष्ट्रीय स्तर पर लड़कियों के बाल विवाह में 0.1 फीसदी की काफी कमी आयी, लेकिन शहरी क्षेत्रों में इसके पहले के दशक के मुकाबले खासा बढ़ोतरी हुई. रिपोर्ट के अनुसार साल 2001 में शहरी क्षेत्रों में लड़कियों के बाल विवाह के मामले 1.78 फीसदी थे, जो साल 2011 में बढ़कर 2.45 फीसदी हो गये. एनसीसीपीआर के सदस्य यशवंत जैन ने कहा कि, शहरी क्षेत्रों में बाल विवाह की यह स्थिति चिंता का विषय है. शहरों में बाल विवाह के मामले बढ़ने की कई वजहें हैं. एक वजह ग्रामीण क्षेत्रों से लोगों का शहरी क्षेत्रों में पलायन भी है. दूसरी वजहें परंपरा, अशिक्षा तथा सामाजिक जागरूकता का अभाव हैं.
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