अज्ञानता नहीं ये 3 दोष हैं असली विनाश के कारण, विदुर की चेतावनी

Vidur Niti
Vidur Niti: विदुर की वाणी में जो नैतिक साहस था, वही आज भी विदुर नीति के रूप में अमूल्य धरोहर बना हुआ है. यह नीति हमें सिखाती है कि अंधकार कितना भी घना क्यों न हो विवेक और धर्म के दीपक से रास्ता हमेशा निकाला जा सकता है. आज की उलझन भरी दुनिया में विदुर की बातों में वह स्थिरता है, जो आत्मा को सही दिशा दिखा सकती है.
Vidur Niti: महाभारत में विदुर का चरित्र इस सच्चाई का प्रतीक है कि किसी की महानता उसके जन्म से नहीं, बल्कि उसके विचारों और कर्मों से तय होती है. राजघराने से बाहर जन्म लेने के बावजूद उन्होंने अपने ज्ञान और नीति के बल पर हस्तिनापुर के सबसे बुद्धिमान और विश्वसनीय सलाहकार का पद हासिल किया था. विदुर केवल एक मंत्री नहीं थे, बल्कि धर्म के सजग प्रहरी थे, जिन्होंने सच्चाई को कभी भी सत्ता या संबंधों के नीचे दबने नहीं दिया. उनकी वाणी में जो नैतिक साहस था, वही आज भी विदुर नीति के रूप में अमूल्य धरोहर बना हुआ है. यह नीति हमें सिखाती है कि अंधकार कितना भी घना क्यों न हो विवेक और धर्म के दीपक से रास्ता हमेशा निकाला जा सकता है. आज की उलझन भरी दुनिया में विदुर की बातों में वह स्थिरता है, जो आत्मा को सही दिशा दिखा सकती है. विदुर नीति में मनुष्य के गुणों और अवगुणों का विस्तार से वर्णन किया गया है. इस आर्टिकल में तीन ऐसे दोषों के बारे में बात करने वाले हैं, जो कि व्यक्ति के जीवन को नष्ट करके ही छोड़ता है.
- महात्मा विदुर के अनुसार, जो व्यक्ति दूसरों की मेहनत से कमाया हुआ धन छल, चोरी या बलपूर्वक छीनकर प्राप्त करता है, उसका विनाश निश्चित होता है. ऐसा धन न तो स्थायी होता है और न ही सुख देता है. आखिर में ऐसे कर्म मनुष्य को पतन की ओर ले जाते हैं और उसका जीवन संकटों से घिर जाता है.
यह भी पढ़ें- Vidur Niti: ना धन, ना ताकत… सिर्फ ये दो गुण और मिल जाता है स्वर्ग से ऊंचा स्थान
यह भी पढ़ें- विदुर नीति से सीखें कैसे बनें सम्माननीय और गुणी व्यक्ति
- विदुर नीति के अनुसार, जो व्यक्ति किसी अन्य की पत्नी या स्त्री से अनैतिक संबंध बनाता है, उसका पतन होना निश्चित होता है. ऐसा आचरण न केवल धर्म के विरुद्ध है, बल्कि समाज और आत्मा के संतुलन को भी नष्ट करता है. अंत में ऐसा व्यक्ति सम्मान, सुख और जीवन की स्थिरता सब कुछ खो देता है.
- विदुर नीति के अनुसार, जो व्यक्ति सच्चे और शुभचिंतक मित्र का त्याग करता है, वह स्वयं अपने विनाश का मार्ग चुनता है. ऐसे मित्र जीवन के संकट में आधार होते हैं और उनका साथ छोड़ने वाला व्यक्ति अकेला पड़ जाता है. अंततः उसका जीवन दुःख, असफलता और पश्चाताप से भर जाता है.
यह भी पढ़ें- महात्मा विदुर के चार अमूल्य सूत्र जो बदल सकते हैं आपका जीवन
Disclaimer: यह आर्टिकल सामान्य जानकारियों और मान्यताओं पर आधारित है. प्रभात खबर इसकी पुष्टि नहीं करता है.
प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी
लेखक के बारे में
By Shashank Baranwal
जीवन का ज्ञान इलाहाबाद विश्वविद्यालय से, पेशे का ज्ञान MCU, भोपाल से. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल के नेशनल डेस्क पर कार्य कर रहा हूँ. राजनीति पढ़ने, देखने और समझने का सिलसिला जारी है. खेल और लाइफस्टाइल की खबरें लिखने में भी दिलचस्पी है.
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए




