Vidur Niti: मनुष्य संसार से परलोक साथ ले जाता है सिर्फ दो चीजें - क्या है वो 2 चीजें

Vidur Niti: विदुर बताते हैं महादरिद्र होते हैं ऐसे लोग जिनके मन में आते हैं दूसरों के लिए गलत विचार
Vidur Niti: क्या आप जानते हैं? मरने के बाद इंसान के साथ सिर्फ 2 चीजें ही जाती हैं, बाकी सब यहीं रह जाता है - जानें विदुर नीति का गहरा सत्य.
Vidur Niti: महाभारत में विदुर नीति को नीति, धर्म और जीवन के सत्य का गहरा ज्ञान बताया गया है. विदुर द्वारा कही गई बातें आज भी जीवन को सही दिशा देने वाली और मृत्यु के बाद के सत्य को उजागर करने वाली मानी जाती हैं. विदुर नीति स्पष्ट करती है कि इस संसार से मनुष्य खाली हाथ जाता है, केवल दो चीजें हैं जो उसकी गाठरी में बंधकर उसके साथ परलोक तक जाती हैं.
Vidur Niti in Hindi: विदुर नीति इन हिन्दी
“मरने पर मनुष्य का धन दूसरे लोग ले लेते हैं, शरीर के मांस को जीव-जंतु खा जाते हैं या अग्नि उसे जला देती है, परलोक को तो जीव केवल पाप और पुण्य ही ले जाता है.”
– विदुर नीति
अर्थ
इस विचार का भाव यह है कि मनुष्य चाहे इस जीवन में कितना भी धन, वैभव, कुटुंब या शारीरिक सुख क्यों न संचित कर ले, मृत्यु के बाद इनमें से कुछ भी साथ नहीं जाता. शरीर तक को यह संसार छोड़ देता है, परंतु मनुष्य के अच्छे और बुरे कर्म ही उसके परलोक की यात्रा में साथ चलते हैं.
महाभारत के अनमोल वचन: मनुष्य अपने साथ कौन-सी दो चीजें ले जाता है परलोक?

विदुर नीति के अनुसार मनुष्य अपने साथ सिर्फ पाप और पुण्य ही लेकर जाता है.
- पाप (Paap)
- यदि मनुष्य जीवन में बुरे कर्म करता है, दूसरों को दुःख देता है, अन्याय करता है, तो यह सब उसके पाप की गाठरी में बंध जाता है.
- मृत्यु के बाद यही पाप उसके परलोक में दुःख और पीड़ा का कारण बनते हैं.
- पुण्य (Punya)
- अच्छे कर्म, दान, सेवा, सत्य और धर्म के मार्ग पर चलना पुण्य कहलाते हैं.
- पुण्य ही परलोक में सुख, शांति और मोक्ष का साधन बनता है.
विदुर नीति के अनमोल वचन – विदुर नीति क्या कहती है?
विदुर नीति का यह संदेश हर व्यक्ति को चेताता है कि धन, शरीर और संसारिक सुख नश्वर हैं. मनुष्य को अपने जीवन में ऐसे कर्म करने चाहिए, जिससे उसकी पुण्य की थैली भरती जाए. क्योंकि मृत्यु के पश्चात् यही पुण्य उसे स्वर्ग और मोक्ष दिलाने का मार्ग प्रशस्त करेंगे. वहीं पाप उसके लिए दुख और कष्ट का कारण बनते हैं.
इसलिए विदुर नीति हमें यह प्रेरणा देती है कि जीवन का सच्चा उद्देश्य केवल भौतिक सुख नहीं, बल्कि अच्छे कर्म करके पुण्य अर्जित करना है. यही हमारा सच्चा साथी है, जो हमें जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति दिला सकता है.
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Disclaimer: यह आर्टिकल सामान्य जानकारियों और मान्यताओं पर आधारित है. प्रभात खबर इसकी पुष्टि नहीं करता है.
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लेखक के बारे में
By Pratishtha Pawar
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