शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय इन 5 बातों का रखें ध्यान, छोटी सी गलती से अधूरा रह सकता है पूजा का फल
शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय किन बातों का ख्याल रखना चाहिए? Ai image
Sawan Somwar Puja Rules: सावन सोमवार के दिन अगर आप भी भोलेनाथ को जल चढ़ाने मंदिर जाते हैं, तो पूजा से जुड़ी कुछ छोटी-छोटी बातों का खास ख्याल जरूर रखें। सही तरीके से जल चढ़ाने से लेकर परिक्रमा करने तक, इन नियमों को जानना आपके लिए बेहद जरूरी है.
Sawan Somwar Puja Rules: सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति के लिए सबसे खास और पवित्र माना जाता है. इस पूरे महीने लाखों श्रद्धालु मंदिर जाते हैं और भगवान शिव यानी भोलेनाथ को जल चढ़ाते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हमारे भगवान शिव इतने भोले हैं कि वे सिर्फ एक लोटा साफ जल चढ़ाने से ही बहुत खुश हो जाते हैं. हालांकि, जब हम अपने धर्म-ग्रंथों पर नजर डालते हैं तो उनमें हमें शिवलिंग पर जल चढ़ाने के कुछ नियम भी मिल जाते हैं.
मान्यता है कि अगर हम सावन के महीने में पूजा करते समय अनजाने में भी कोई गलती कर देते हैं, तो हमें उस पूजा का पूरा फल नहीं मिल पाता है. ऐसे में यह भी जरूरी हो जाता है कि सावन के सोमवार को जब आप शिवलिंग पर जल चढ़ाने जाएं, तो आपको उसका सही तरीका जरूर मालूम हो. जब आप सारे नियमों का पालन सही तरीके से करते हैं, तो आपकी पूजा सफल होती है और आपको उसका पूरा फल भी मिलता है. तो चलिए जानते हैं कि आखिर आपको शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय किन खास बातों का ख्याल जरूर रखना चाहिए.

सही दिशा में खड़े होना है जरूरी
शिवलिंग पर जब आप जल चढ़ा रहे होते हैं, उस समय आप किस दिशा में मुंह करके खड़े हैं, यह बात भी काफी मायने रखती है. मान्यताओं के अनुसार शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय आपका चेहरा हमेशा उत्तर दिशा की तरफ ही होना चाहिए. शास्त्रों में उत्तर दिशा को भगवान शिव और माता पार्वती का निवास स्थान माना गया है. इसके अलावा कभी भी शिवलिंग पर पूर्व दिशा की तरफ मुंह करके जल न चढ़ाएं, क्योंकि पूर्व दिशा को भगवान शिव का मुख्य प्रवेश द्वार माना जाता है. इसी तरह दक्षिण दिशा की तरफ मुंह करके जल चढ़ाना भी बिल्कुल सही नहीं माना जाता है, इसलिए हमेशा उत्तर दिशा की तरफ ही अपना मुख रखें.
ये भी पढ़ें: भगवान शिव की पूजा से पहले सोमवार को घर में जरूर कर लें ये 5 काम, तभी मिलेगा पूजा का पूरा फल
जल चढ़ाने के बर्तन का सही चुनाव
जानकारों के अनुसार आप शिवलिंग पर जल चढ़ाने के लिए जिस बर्तन या फिर लोटे का इस्तेमाल कर रहे हैं, उसका सही होना भी उतना ही जरूरी है. जल चढ़ाने के लिए हमेशा तांबे, पीतल या चांदी के लोटे का ही इस्तेमाल करें क्योंकि इन्हें ही सबसे शुभ और अच्छा माना जाता है. आपको भूलकर भी प्लास्टिक या स्टील के बर्तन से शिवलिंग पर जल नहीं चढ़ाना चाहिए. इसके अलावा एक सबसे जरूरी बात यह है कि शिवलिंग पर कभी भी शंख से जल नहीं चढ़ाना चाहिए. पौराणिक कथाओं के अनुसार शंखचूड़ नाम के एक राक्षस का अंत भगवान शिव ने किया था, इसी कारण से शिवजी की पूजा में शंख का इस्तेमाल पूरी तरह से मना होता है.
जल हमेशा धीरे-धीरे और पतली धार में चढ़ाएं
मान्यताओं के अनुसार शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय आपको कभी भी जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए. आपको शिवलिंग पर जल हमेशा एक समान, धीमी और पतली धार बनाकर ही अर्पित करना चाहिए. आपको कभी भी न तो एक झटके में पूरा पानी डालना चाहिए और न ही रुक-रुक कर जल चढ़ाना चाहिए. जब आप बिल्कुल शांत मन से धीरे-धीरे जल चढ़ा रहे हों, तो उस समय अपने मन में 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप करते रहें. इस तरह प्यार और श्रद्धा से पतली धार में जल चढ़ाने से महादेव अपने भक्तों से अत्यंत प्रसन्न होते हैं.
ये भी पढ़ें: मंदिर में दीपक जलाते समय भूलकर भी न करें ये 5 गलतियां, बढ़ सकता है वास्तु दोष और नहीं मिलेगा पूजा का पूरा फल
खड़े होकर नहीं, हमेशा बैठकर जल अर्पित करें
शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय आप किस स्थिति में खड़े हैं या फिर बैठे हुए हैं, इस बात का महत्व भी बहुत ज्यादा होता है. नियमों के अनुसार शिवलिंग पर जल हमेशा बैठकर ही चढ़ाना चाहिए. अगर आप खड़े होकर जल चढ़ाते हैं तो आपको पूजा का पूरा फल या फिर पूरा पुण्य नहीं मिल पाता है. जब आप शांति से बैठकर आराम से जल चढ़ाते हैं तो आपका मन भी पूरी तरह से शांत हो जाता है और आपका शरीर भी स्थिर रहता है. ऐसा होने की वजह से आपकी पूजा भी बिना किसी भटकाव और फोकस के साथ पूरी होती है.
परिक्रमा हमेशा आधी ही करें
मान्यताओं के अनुसार, शिवलिंग पर जल चढ़ाने के बाद आपको कभी भी उसकी पूरी परिक्रमा नहीं करनी चाहिए. शिवलिंग से अभिषेक का जल जिस रास्ते से बाहर निकलता है, उसे सोमसूत्र कहा जाता है. धार्मिक परंपरा में इस स्थान को लांघना सही नहीं माना गया है. इसलिए श्रद्धालु सोमसूत्र तक जाकर वहीं से वापस लौटते हुए अर्धचंद्राकार परिक्रमा करते हैं. शिव की अर्ध-प्रदक्षिणा और सोमसूत्र को न लांघने का जिक्र कुछ पारंपरिक संस्कृत ग्रंथों में भी मिलता है.
ये भी पढ़ें: मोरपंख की असली ताकत जानकर रह जाएंगे हैरान, किस्मत और जिंदगी बदलनी है तो इसे घर की इन जगहों पर जरूर रखें
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By सौरभ पोद्दार
सौरभ पोद्दार एक लाइफस्टाइल जर्नलिस्ट हैं और पिछले 4 सालों से डिजिटल मीडिया में एक्टिव हैं. उन्होंने रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया है. फिलहाल, सौरभ 'प्रभात खबर' के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बतौर कंटेंट राइटर काम कर रहे हैं. सौरभ को उन टॉपिक्स पर लिखना सबसे ज्यादा पसंद है, जो हमारी रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े हैं. उनके आर्टिकल्स में आपको हेल्थ, फिटनेस, स्किन-हेयर केयर, पेरेंटिंग, हेल्दी रेसिपीज, घरेलू नुस्खे, रिलेशनशिप और वास्तु शास्त्र जैसी उपयोगी जानकारियां मिलेंगी. फिटनेस और अच्छी सेहत सौरभ की निजी जिंदगी का भी अहम हिस्सा हैं. वे जिन विषयों पर लिखते हैं, उन्हें अपनी रूटीन में फॉलो भी करते हैं. उनका मानना है कि जब आप किसी चीज को खुद एक्सपीरियंस करते हैं, तभी दूसरों तक सही और प्रैक्टिकल जानकारी पहुंचा सकते हैं. उनकी हमेशा यही कोशिश रहती है कि वे ट्रेंडिंग टॉपिक्स पर बिल्कुल आसान और आम बोलचाल की हिंदी में लिखें, ताकि हर पाठक उसे आसानी से समझ सके. यही वजह है कि उनके लिखे आर्टिकल्स काफी एंगेजिंग और SEO-फ्रेंडली होते हैं.
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










