Parenting Tips: क्या बच्चे की तारीफ कर आप खुद ही बिगाड़ रहे हैं उसका फ्यूचर? देर हो इससे पहले जान लें

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Parenting Tips: अगर आप बात-बात पर अपने बच्चे की तारीफ करते हैं तो आपको ऐसा करने से बचना चाहिए. आपकी यह आदत उसे ओवरकॉन्फिडेंट बनाने का काम करती है. चलिए जानते हैं बच्चों की तारीफ करने का सबसे सही तरीका.

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Parenting Tips: हर पैरेंट्स चाहते हैं कि उनका बच्चा स्मार्ट, कॉन्फिडेंट और आगे चलकर काफी ज्यादा सक्सेसफुल बने. ऐसे में यह काफी जरूरी हो जाता है कि पैरेंट्स अपनी तरफ से कोई भी गलती न करें. बच्चे सही से ग्रो करें इसके लिए यह भी जरूरी हो जाता है कि उनकी तारीफ करें और उन्हें जीवन में अच्छा करने के लिए मोटिवेट करें. एक्सपर्ट्स के अनुसार बच्चों की तारीफ करना उनकी पर्सनालिटी डेवलपमेंट के लिए काफी ज्यादा जरूरी होता है. लेकिन कई बार पैरेंट्स बिना सोचे-समझे बच्चों की हर छोटी-बड़ी बात पर जरूरत से ज्यादा तारीफ करने लगते हैं. लगातार और गलत तरीके से की गई तारीफ बच्चों को मोटिवेट करने की बजाय ओवरकॉन्फिडेंट बना सकती है. इसलिए जरूरी है कि आप अपने बच्चे की तारीफ सही समय और सही अंदाज में करें. आज इस आर्टिकल में हम आपको बच्चों की तारीफ करने का सबसे सही तरीका बताने जा रहे हैं. तो चलिए जानते हैं विस्तार से.

हर बात पर तारीफ न करें

कई बार पैरेंट्स बच्चे के हर छोटे काम पर भी हद से ज्यादा तारीफ कर देते हैं, जैसे ‘वाह! तुम तो जीनियस हो’, ‘तुम सबसे बेस्ट हो’ और इस तरह की बातें. आपके ऐसा करने से बच्चा धीरे-धीरे यह सोचने लगता है कि वह परफेक्ट है और उसमें कोई कमी हो ही नहीं सकती. इसका नतीजा यह होता है कि बच्चा मेहनत से बचने लगता है और छोटी सी आलोचना भी बर्दाश्त नहीं कर पाता. इसलिए हर छोटी-बड़ी चीज पर तारीफ करने के बजाय, उसकी मेहनत और ईमानदारी को नोटिस करें.

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परफॉर्मेंस नहीं, एफर्ट की तारीफ करें

एक्सपर्ट्स के अनुसार जब भी बच्चा कोई काम करे तो सिर्फ रिजल्ट पर ध्यान देने की जगह पर आपको उसकी मेहनत और कोशिश की तारीफ करनी चाहिए. जैसे ‘तुमने बहुत अच्छा ड्रॉ किया है’ कहने की जगह पर आपको कहना चाहिए कि ‘तुमने बहुत मेहनत करके यह ड्रॉइंग बनाई है, यह अच्छी बात है’. इस तरह बच्चा समझेगा कि असली क्रेडिट उसकी मेहनत और को मिला है सिर्फ रिजल्ट का नहीं.

कम्पैरिजन से बचें

अक्सर पैरेंट्स तारीफ करते समय बच्चे को दूसरों से कंपेयर करने लगते हैं जैसे कि ‘तुम तो अपनी क्लास में सबसे तेज हो’ या ‘तुम अपने भाई से बहुत आगे हो.’ यह तरीका बच्चों में ईगो को बढ़ावा देता है और वह खुद को दूसरों से ऊपर और बेहतर समझने लगता है. बेहतर होगा कि आप उसकी तुलना किसी और से न करके सिर्फ उसके काम पर फोकस करें.

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तारीफ को स्पेसिफिक बनाएं

एक्सपर्ट्स के अनुसार जितनी स्पेसिफिक तारीफ होगी, बच्चे पर उसका उतना ही अच्छा असर पड़ेगा. जैसे कि ‘तुम बहुत अच्छे हो’ कहने की जगह पर ‘आज तुमने अपने दोस्त की मदद की, यह बहुत अच्छी बात है’ कहना ज्यादा कारगर होता है. इससे बच्चा समझता है कि उसे किस चीज के लिए तारीफ की जा रही है और आगे भी वही पॉजिटिव बिहेवियर रिपीट करता है.

ईमानदारी और बैलेंस जरूरी

एक्सपर्ट्स की मानें तो तारीफ हमेशा सच्ची और बैलेंस्ड होनी चाहिए. बच्चा अगर सचमुच मेहनत करता है तो उसकी तारीफ जरूर करें, लेकिन अगर कहीं कमी रह गई है तो उसे पॉजिटिव तरीके में सुधारने की सलाह भी दें. आपके ऐसा करने से बच्चा न तो ओवरकॉन्फिडेंट होगा और न ही डिमोटिवेट.

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सौरभ पोद्दार

लेखक के बारे में

By सौरभ पोद्दार

सौरभ पोद्दार एक लाइफस्टाइल जर्नलिस्ट हैं और पिछले 4 सालों से डिजिटल मीडिया में एक्टिव हैं. उन्होंने रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया है. फिलहाल, सौरभ 'प्रभात खबर' के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बतौर कंटेंट राइटर काम कर रहे हैं. सौरभ को उन टॉपिक्स पर लिखना सबसे ज्यादा पसंद है, जो हमारी रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े हैं. उनके आर्टिकल्स में आपको हेल्थ, फिटनेस, स्किन-हेयर केयर, पेरेंटिंग, हेल्दी रेसिपीज, घरेलू नुस्खे, रिलेशनशिप और वास्तु शास्त्र जैसी उपयोगी जानकारियां मिलेंगी. फिटनेस और अच्छी सेहत सौरभ की निजी जिंदगी का भी अहम हिस्सा हैं. वे जिन विषयों पर लिखते हैं, उन्हें अपनी रूटीन में फॉलो भी करते हैं. उनका मानना है कि जब आप किसी चीज को खुद एक्सपीरियंस करते हैं, तभी दूसरों तक सही और प्रैक्टिकल जानकारी पहुंचा सकते हैं. उनकी हमेशा यही कोशिश रहती है कि वे ट्रेंडिंग टॉपिक्स पर बिल्कुल आसान और आम बोलचाल की हिंदी में लिखें, ताकि हर पाठक उसे आसानी से समझ सके. यही वजह है कि उनके लिखे आर्टिकल्स काफी एंगेजिंग और SEO-फ्रेंडली होते हैं.

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