Mexican food : मुंबई वालों की जीभ पर चढ़ा मैक्सिकन फूड का स्वाद, जानिए क्या है वजह

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Mexican food : मुंबई वालों की जीभ पर चढ़ा मैक्सिकन फूड का स्वाद, जानिए क्या है वजह

Mexican food : भारतीय खाने के शौकीन होते हैं, यही वजह है कि विदेश के खाने भी भारत में काफी डिमांड में हैं. मैक्सिकन फूड इन दिनों मुंबई में चलन में है.

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Mexican food : देश में मैक्सिकन फूड की डिमांड दिन ब दिन बढ़ती जा रही है. खासकर मुंबई महानगर के लोग मैक्सिकन फूड के दीवाने हो गए हैं. मैक्सिकन फूड की बढ़ती डिमांड को देखते हुए मैक्सिकन फूड चेन के बड़े रेस्तरां मुंबई में अपनी दस्तक दे चुके हैं. कुछ इसी तरह के रेस्तरां हैं Mezcalita, Pompa and Lyla.

मैक्सिकन ब्राॅन्ड मुंबई में पेश


इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार मैक्सिकन फूड के कई रेस्तरां अब मुंबई में दिख रहे हैं, जिसे कोई भी आम आदमी नोटिस कर सकता है. मुंबई में रेस्तरां चलाने वाले विक्की सिंह और रिजवान अमलानी ने मैक्सिकन ब्राॅड Mezcalita, Pompa and Lyla को मुंबई में लाॅन्च किया है.

भारतीय और मैक्सिकन फूड में समानता


भारत में मैक्सिकन फूड की बढ़ती डिमांड की वजह है भारतीय और मैक्सिकन फूड में समानता. भारतीय जिस प्रकार का खट्ठा-मीठा और तीखा खाना पसंद करते हैं, कुछ उसी तरह का स्वाद मैक्सिकन फूड में नजर आता है. यही वजह है कि मैक्सिकन फूड को भारतीय स्वाद श्रृंखला की अगली कड़ी माना जाता है. मसलन मेक्सिको में जो टोस्टाडा है, वो भारत में सेव पुरी या भेल पुरी है. इसी तरह टैकोस यानी भारत में सब्जी और रोटी. इतना ही नहीं

एक ही तरह के मसालों का प्रयोग

भारतीय और मैक्सिकन खानों में मसाला भी एक तरह का ही प्रयोग होता है, जैसे धनिया, मिर्च और जीरा.
भारतीय और मैक्सिकन खान-पान में स्वादिष्ट स्नैक्स का भी अहम स्थान है. साथ ही शाकाहार भी दोनों ही जगह के फूड में शामिल किया जाता है. हालांकि जानकारों का मानना है कि मैक्सिकन फूड की ओर भारतीयों का झुकाव कोई नयी चीज नहीं है. इससे पहले भी कई बार यह देखा गया है कि पांच सितारा होटलों में मैक्सिकन फूड की डिमांड रही है और उसे परोसा भी जा रहा है. साल 2000 से ही यह ट्रेंड दिखा है.

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रजनीश आनंद

लेखक के बारे में

By रजनीश आनंद

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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