Gita Updesh: आलोचक ही चमकाता है आपकी किस्मत - सफलता चाहिए? तो इन्हें बनाए अपना दोस्त

Gita Updesh
Gita Updesh: अहंकारी और चापलूस लोगों से दूरी बनाना जरूरी है. गीता और कबीर की वाणी हमें सिखाती है कि आलोचक ही हमारा सच्चा भाग्यविधाता है.
Gita Updesh: जीवन में संगति का बहुत बड़ा महत्व होता है. जैसी संगति होगी, वैसा ही व्यक्ति का स्वभाव और आचरण बनता है. यही कारण है कि गीता से लेकर संत कबीर तक ने संगति के महत्व पर जोर दिया है. गीता में जहां अहंकार को दूर करने और आलोचक का साथ निभाने की बात कही गई है, वहीं संत कबीर ने निंदक को अपने पास रखने की सलाह दी है.
Bhagvad Gita Quotes: गीता का उपदेश
गीता में कहा गया है –
“जिसके संग तुम्हारे अंदर अहंकार पैदा हो, उसका संग छोड़ दो और जो मनुष्य तुम्हारे दोषों को दिखलावे उसकी खुशामद करो, आलोचक को सदा साथ रखो.”
यह उपदेश इस बात पर जोर देता है कि हमें ऐसे लोगों से दूरी बना लेनी चाहिए, जिनके साथ रहने से हमारे अंदर घमंड या बुराइयां पनपने लगें. इसके विपरीत, जो लोग हमारी गलतियों को आईना दिखाते हैं, उनका हमें सम्मान करना चाहिए क्योंकि वही हमें सही दिशा दिखाते हैं.
Gita Updesh: सफलता चाहिए? तो निंदक को बनाइए अपना दोस्त

Kabir Amritvani: संत कबीर का दोहा
संत कबीर ने भी निंदक के महत्व को समझाते हुए कहा है –
“निंदक नियरे राखिए, आंगन कुटी छवाय.
बिन पानी, साबुन बिना, निर्मल करे सुभाय..”
अर्थात, जो हमारी आलोचना करता है, उसे पास रखना चाहिए. उसके लिए अपने आंगन में कुटिया बना लेनी चाहिए, क्योंकि बिना पानी और साबुन के ही वह हमारे स्वभाव को साफ और पवित्र बना देता है.
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क्यों गीता और कबीर कहते हैं निंदक है जीवन का सबसे बड़ा साथी
किसकी संगति करनी चाहिए?
- ऐसे व्यक्तियों की संगति करें जो सकारात्मक सोच रखते हों.
- जो आपकी कमियों को बिना झिझक बता सकें और सुधार का मार्ग दिखाएं.
- सच्चे मित्र और गुरुओं का साथ करें, क्योंकि वे आपके जीवन को सही दिशा देते हैं.
- विद्वानों और सज्जनों के साथ रहकर ज्ञान और संस्कारों का विकास होता है.
किसकी संगति से दूर रहना चाहिए?
- उन लोगों से बचें जिनके साथ रहने से अहंकार और बुरी आदतें बढ़ती हों.
- चापलूस और झूठे प्रशंसा करने वालों से दूरी बनाएं.
- नकारात्मक और आलसी लोगों की संगति से बचें, क्योंकि उनकी आदतें धीरे-धीरे आप पर भी असर डालती हैं.
गीता और संत कबीर दोनों यही संदेश देते हैं कि हमें आलोचक और सच्चे मार्गदर्शक का साथ निभाना चाहिए. वही हमें हमारी वास्तविकता से रूबरू कराते हैं और हमें बेहतर इंसान बनने में मदद करते हैं. वहीं, बुरे संग से हमेशा बचना चाहिए, क्योंकि वही पतन का कारण बनता है.
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Disclaimer: यह आर्टिकल सामान्य जानकारियों और मान्यताओं पर आधारित है. प्रभात खबर इसकी पुष्टि नहीं करता है.
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By Pratishtha Pawar
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