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Chanakya Niti: महिलाओं को क्यों कहा गया है जीवन की सबसे बड़ी ताकत और कमजोरी? आचार्य चाणक्य से जानें रहस्य

Updated at : 27 Aug 2025 9:03 PM (IST)
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chanakya niti on women

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Chanakya Niti: आचार्य चाणक्य ने अपनी नीतियों में स्त्री या फिर एक महिला को जीवन की सबसे बड़ी शक्ति कहा है और उसी स्त्री को सबसे बड़ी कमजोरी।लेकिन आखिर उनका ऐसा कहने के पीछे कारण क्या है? चलिए जानते हैं विस्तार से.

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Chanakya Niti: आचार्य चाणक्य का नाम सुनते ही दिमाग में शिक्षा, पॉलिटिक्स और जीवन के कुछ गहरे सीक्रेट्स उभरकर सामने आते हैं। उनकी चाणक्य नीति सिर्फ सफलता पाने का ही रास्ता नहीं दिखाती, बल्कि इंसान के बर्ताव और रिश्तों की सच्चाई को भी उजागर करती है. अपनी नीतियों में उन्होंने महिलाओं को लेकर कई गहरी बातें कही हैं. आचार्य चाणक्य के अनुसार महिला किसी भी पुरुष के जीवन की सबसे बड़ी शक्ति भी हो सकती है और सबसे बड़ी कमजोरी भी. लेकिन आखिर उन्होंने ऐसा कहा क्यों है? इसके पीछे कारण क्या रहे होंगे? आइए समझते हैं विस्तार से.

परिवार और समाज की नींव

आचार्य चाणक्य के अनुसार महिला को हमेशा से शक्ति स्वरूपा माना गया है. जिस घर में स्त्री को सम्मान मिलता और वे सुखी रहती हैं, वहां देवताओं का वास होता है. एक महिला सिर्फ परिवार ही नहीं बल्कि पूरे समाज को दिशा देने की काबिलियत अपने अंदर रखती है. उसकी शिक्षा, उसकी समझदारी और उसके संस्कार ही आने वाली जेनेरेशन को प्रभावित करते हैं. यह एक मुख्य कारण है कि चाणक्य कहते थे स्त्री के बिना जीवन अधूरा है.

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मोटिवेशन और सक्सेस की चाबी

चाणक्य नीति में साफतौर पर कहा गया है कि महिला अपने पति और परिवार के लिए सबसे बड़ी मोटिवेशन बन सकती है. एक समझदार और सहयोगी पत्नी पुरुष को हर मुश्किल हालात से निकलने की ताकत देती है. एक स्त्री की हिम्मत और उसका सपोर्ट किसी भी पुरुष को जीवन में ऊंचाइयों तक पहुंचा सकता है. इसलिए महिला को शक्ति का प्रतीक माना गया है.

कमजोरी बनने के कारण

आचार्य चाणक्य के अनुसार जहां एक महिला इंसान को सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंचा सकती है, वहीं गलत संगति या आकर्षण में पड़कर वही इंसान की सबसे बड़ी कमजोरी भी बन सकती है. चाणक्य कहते थे कि, अगर कोई व्यक्ति अपने जीवन में डिसिप्लिन खोकर सिर्फ स्त्री के आकर्षण में खो जाता है या फिर बह जाता है, तो उसका बर्बाद होना तय है. इतिहास भी इसका गवाह है कई बड़े साम्राज्य सिर्फ स्त्री मोह में पड़कर ही बर्बाद हो गए हैं.

कंट्रोल और बैलेंस

आचार्य चाणक्य ने महिलाओं से दूरी बनाने की सलाह नहीं दी, बल्कि उनकी इज्जत करने और उनके साथ जीवन में बैलेंस बनाकर चलने की शिक्षा दी है. उनका कहना था कि नारी शक्ति है तो उसका इस्तेमाल हमेशा मोटिवेशन और एनर्जी के रूप में करें, न कि उसे अपनी कमजोरी बनने दें. कंट्रोल और बैलेंस्ड विजन से ही इंसान सफलता की ओर बढ़ सकता है.

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Disclaimer: यह आर्टिकल सामान्य जानकारियों और मान्यताओं पर आधारित है. प्रभात खबर इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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Saurabh Poddar

लेखक के बारे में

By Saurabh Poddar

मैं सौरभ पोद्दार, पिछले लगभग 3 सालों से लाइफस्टाइल बीट पर लेखन कर रहा हूं. इस दौरान मैंने लाइफस्टाइल से जुड़े कई ऐसे विषयों को कवर किया है, जो न सिर्फ ट्रेंड में रहते हैं बल्कि आम पाठकों की रोजमर्रा की जिंदगी से भी सीधे जुड़े होते हैं. मेरी लेखनी का फोकस हमेशा सरल, यूजर-फ्रेंडली और भरोसेमंद भाषा में जानकारी देना रहा है, ताकि हर वर्ग का पाठक कंटेंट को आसानी से समझ सके. फैशन, हेल्थ, फिटनेस, ब्यूटी, रिलेशनशिप, ट्रैवल और सोशल ट्रेंड्स जैसे विषयों पर लिखना मुझे खास तौर पर पसंद है.

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