बिकरु कांड मामले में सुनवाई, गैंगस्टर विकास दुबे की पत्नी और भाई पर आरोप तय, रिचा दुबे पर कानून कसेगा शिकंजा

Bikru Kand: चौबेपुर पुलिस ने विकास दुबे की पत्नी ऋचा दुबे व उसके भाई दीपक और एनकाउंटर में मारे गए अमर दुबे की पत्नी खुशी दुबे पर दूसरे की आईडी से सिम का उपयोग करने का मामला दर्ज किया था. इसके साथ ही पुलिस ने मामले में आरोप पत्र अदालत में पेश किए थे.
कानपुर. बहुचर्चित बिकरू कांड में सभी आरोपितों पर मुख्य मामलें में आरोप तय होने के बाद अदालत ने दूसरे की आईडी से लिए सिम का उपयोग करने के मामले में आरोपित विकास दुबे की पत्नी ऋचा दुबे और उसके भाई दीपक कुमार उर्फ दीपू के खिलाफ भी आरोप तय कर दिये हैं. अब सुनवाई के लिए कोर्ट ने 20 मार्च की तिथि तय की है. वहीं बिकरू कांड के साथ ही चौबेपुर पुलिस ने विकास दुबे की पत्नी ऋचा दुबे व उसके भाई दीपक और एनकाउंटर में मारे गए अमर दुबे की पत्नी खुशी दुबे पर दूसरे की आईडी से सिम का उपयोग करने का मामला दर्ज किया था. इसके साथ ही पुलिस ने मामले में आरोप पत्र अदालत में पेश किए थे. जिस समय बिकरु कांड हुआ था. उस समय खुशी दुबे नाबालिग थी. नाबालिग होने के कारण उसके मामले की सुनवाई किशोर न्याय बोर्ड में चल रही है. वहीं आरोपी ऋचा दुबे व अन्य के मामले की सुनवाई एंटी डकैती कोर्ट में चल रही है.
बता दें कि 2-3 जुलाई 2020 को चौबेपुर के जादेपुरधस्सा गांव के रहने वाले राहुल तिवारी ने विकास दुबे व उसके साथियों पर हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज कराया था. एफआईआर दर्ज करने के बाद उसी रात करीब साढ़े बारह बजे तत्कालीन सीओ बिल्हौर देवेंद्र कुमार मिश्रा के नेतृत्व में बिकरू गांव में दबिश दी गई थी. इस दौरान दबिश की सूचना पुलिस विभाग की ओर से लीक हो गई थी. जिसके बाद घात लगाए बैठे गैंगस्टर विकास दुबे ने अपने गुर्गों के साथ मे मिलकर पुलिस पार्टी पर ताबड़तोड़ गोलियों से हमला किया था. जिसमे डिप्टी एसपी समेत 8 पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे. वहीं, 1 दर्जन से अधिक घायल थे. पुलिसकर्मियों की हत्या से थर्राई यूपी पुलिस ने घटना के दूसरे दिन से सुबह से ताबड़तोड़ एनकाउंटर की शुरुआत की थी. जिसमें मुख्यआरोपी विकास दुबे समेत 6 लोगों को पुलिस ने एनकाउंटर में ढेर कर दिया था. साथ ही घटना से जुड़े करीब 5 दर्जन लोग अभी भी जेल की सलाखों के पीछे हैं.
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बता दे कि बिकरु कांड में पुलिस ने तीन जुलाई की सुबह विकास के रिश्तेदार प्रेम कुमार पांडेय और अतुल दुबे को एनकाउंटर में मार गिराया था. इसके बाद हमीरपुर में अमर दुबे और इटावा में प्रवीण दुबे को मारा गया. फिर पुलिस कस्टडी से भागने पर पनकी में प्रभात मिश्रा उर्फ कार्तिकेय मिश्रा ढेर कर दिया गया और नौ जुलाई की सुबह उज्जैन में नाटकीय ढंग से सरेंडर हुए दहशतगर्द विकास दुबे सचेंडी थाना क्षेत्र में भागने के दौरान मारा गया था. एसटीएफ ने दावा किया था कि गाड़ी पलटने की वजह से विकास पिस्टल लूटकर भागा और गोली चलाई थी. जवाबी कार्रवाई में वो ढे़र हो गया था.
रिपोर्ट: आयुष तिवारी
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