सरायकेला के चांडिल डैम के विस्थापितों की समस्या को लेकर CM हेमंत सोरेन से मिलीं ईचागढ़ विधायक सविता महतो, 116 गांवों की समस्या से कराया अवगत

Jharkhand News (जमशेदपुर/सरायकेला) : झारखंड के सरायकेला- खरसावां जिला अंतर्गत चांडिल डैम में विस्थापितों की समस्या के निदान के लिए बुधवार को ईचागढ़ की विधायक सविता महतो मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से रांची स्थित प्रोजेक्ट भवन में मुलाकात की. विधायक ने मुख्यमंत्री से कहा कि चांडिल बांध के पूर्ण एवं आंशिक रूप से 116 गांवों का भू-अर्जन को वर्ष 2001 तक संपन्न किया चुका है, लेकिन पुनर्वास की समस्या जस की तस बनी हुई है.
Jharkhand News (जमशेदपुर/सरायकेला) : झारखंड के सरायकेला- खरसावां जिला अंतर्गत चांडिल डैम में विस्थापितों की समस्या के निदान के लिए बुधवार को ईचागढ़ की विधायक सविता महतो मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से रांची स्थित प्रोजेक्ट भवन में मुलाकात की. विधायक ने मुख्यमंत्री से कहा कि चांडिल बांध के पूर्ण एवं आंशिक रूप से 116 गांवों का भू-अर्जन को वर्ष 2001 तक संपन्न किया चुका है, लेकिन पुनर्वास की समस्या जस की तस बनी हुई है.
विधायक सविता महतो ने सीएम श्री सोरेन से कहा कि जब तक चांडिल डैम के विस्थापितों का पुनर्वास नहीं हो जाता है, तब तक चांडिल डैम में जल भंडारण की क्षमता को 180 मीटर तक ही रखा जाये. जल संसाधन विभाग द्वारा विकास पुस्तिका की मान्यता मार्च 2022 तक निर्धारित है, जबकि चांडिल बांध से प्रभावित विस्थापित परिवारों का पूर्ण पुनर्वास सुविधा मुहैया कराना अभी बाकी है.
उन्होंने विकास पुस्तिका की भी अवधि विस्तार मार्च 2028 तक करने का मांग की. सुवर्णरेखा परियोजना में स्थायी प्रशासक को जल्द पदस्थापित किया जाना चाहिए. मुख्यमंत्री ने इस मामले में आश्वासन देते हुए कहा कि विस्थापितों की समस्याओं का जल्द समाधान होगा. इस दौरान वहां झामुमो के केंद्रीय सदस्य राजीव कुमार महतो काबलू भी मौजूद थे.
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विधायक सविता महतो ने कहा कि सीएम के साथ स्वर्णरेखा के विस्थापितों के संबंध में बैठक में कई मुद्दों पर चर्चा हुई. उन्होंने मुख्यमंत्री से कहा कि 116 गांवों को ही पुनर्वास सुविधाएं मुहैया कराने, भू-अर्जन के संपूर्ण व्यवस्था की जानी थी, जो अभी तक लंबित हैं. पुनर्वास नीति का अक्षरशः पालन होने से लोगों को न्याय मिलेगा. IDTR से औद्योगिक प्रशिक्षण प्राप्त 300 युवक-युवतियों को प्रमाण पत्र दिया जा चुका है. उनकी वरीयता के आधार पर औद्योगिक प्रतिष्ठानों में नियुक्ति की जानी चाहिए.
समझौते के अनुसार, परियोजना का पानी औद्योगिक संस्थान व्यवहार में ला रहे हैं. पुनर्वास स्थल पर संपूर्ण सुविधाएं एवं सौंदर्यीकरण की व्यवस्था की मांग की गयी, ताकि रिक्त भूखंड पर विस्थापितों को बसाया जा सके. जो बसे हुए हैं, उन स्थलों की जांच कर उन्हें वासगत पर्चा निर्गत कराने को कहा. डूब क्षेत्र में जो सरकारी कामकाज बंद पड़े हुए है उन्हें चालू करने के लिए निर्देश जारी हो.
पुनर्वास नीति के तहत स्वर्णरेखा परियोजना के अंतर्गत लगभग 700 परिवार के विस्थापित सदस्यों को नियोजन दिया गया है, जबकि पुनरीक्षित पुनर्वास नीति में प्रदत्त प्रावधान के अनुसार प्रत्येक परिवार के योग्य व्यक्ति को नियोजन किया जाना था. विभाग की शिथिलता के कारण नियोजन की कार्रवाई लंबित है.
रोजगार के अभाव में डूब क्षेत्र के विस्थापित भटक रहे हैं. परियोजना स्तर पर रिक्त पदों पर विस्थापित परिवारों के योग्य सदस्य के नियोजन की कार्रवाई ली जाये. साथ ही जिला स्तर पर नियोजन में विस्थापित परिवार के सदस्यों को प्राथमिकता के आधार पर आरक्षण का लाभ देते हुए बहाल करने की मांग की.
Posted By : Samir Ranjan.
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