New Surrogacy Rule: अब विधवा और तलाकशुदा भी बन सकेंगी मां, सरोगेसी के नियम में हुआ बदलाव
Published by : Amitabh Kumar Updated At : 23 Feb 2024 1:45 PM
Babies Name
what is surrogacy pregnancy : क्या है सरोगेसी जानें? जानें केंद्र सरकार ने नियम में क्या किया बदलाव
Surrogacy New Rules : यदि आपने उम्मीद बांध रखी है तो आशा की किरण जरूर आपको नजर आएगी. जी हां…केंद्र सरकार के एक निर्णय के बाद बहुत से लोगों के चेहरे पर खुशी आ गई है. दरअसल, सरोगेसी के जरिए माता-पिता बनने का सपना देख रहे कपल के लिए नई उम्मीद जगी है. केंद्र ने सरोगेसी (Regulation) नियम, 2022 में संशोधन किया है. इसके तहत महिला का तलाक होने के बाद या फिर पति की मृत्यु होने के बाद भी वह मां बनने का सपना पूरा कर सकेगी. केंद्र सरकार ने इसकी व्यवस्था की है.
सामान्य तौर पर, सरोगेसी से गुजरने वाले कपल के पास इच्छुक जोड़े के दोनों युग्मक होने चाहिए. लेकिन सरकार द्वारा अधिसूचित सरोगेसी (विनियमन) संशोधन नियम, 2024 में (Surrogacy Act) जो बात कही गई है उसके अनुसार, केंद्र ने सरोगेसी नियमों को फिर से संशोधित किया है, जिससे ‘इच्छुक जोड़े’ की चिकित्सीय स्थिति के मामले में डोनर के अंडे या शुक्राणु को अनुमति दी जा सकती है. इस बाबत अधिसूचना जारी की गई है.
Surrogacy rules : अधिसूचना में क्या कहा गया
अधिसूचना पर गौर करें तो इसमें कहा गया है कि यदि जिला मेडिकल बोर्ड यह प्रमाणित करता है कि इच्छुक जोड़े में से कोई भी पति या पत्नी ऐसी चिकित्सीय स्थिति से पीड़ित है जिसके लिए डोनर गैमीट के उपयोग की आवश्यकता होती है, तो डोनर गैमीट का उपयोग करके सरोगेसी की अनुमति दी जाती है. आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल मेयर-रोकितांस्की-कुस्टर-हॉसर (एमआरकेएच) सिंड्रोम (एक दुर्लभ जन्मजात विकार) से पीड़ित एक महिला को डोनर के अंडे के साथ सरोगेसी से गुजरने की अनुमति दी थी.
सरकार के निर्णय का स्वागत
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है. ऐसा इसलिए क्योंकि सरोगेसी (surrogacy pregnancy) से गुजरने वाली कई महिलाएं अधिक उम्र की हो सकती हैं और उम्र के साथ अंडे की संख्या और गुणवत्ता में गिरावट आती है. हालांकि बहुत कम लोगों को सरोगेसी की जरूरत होती है. यह केवल उन लोगों के लिए है जिनको गर्भाशय की समस्या होती है. आईवीएफ विशेषज्ञों ने कहा है कि यह एक बहुत ही सकारात्मक निर्णय है.
Surrogacy rules : विधवा या तलाकशुदा के लिए क्या
सरोगेसी से गुजरने वाली सिंगल महिला (विधवा या तलाकशुदा) को सरोगेसी प्रक्रिया का लाभ उठाने के लिए स्वयं के अंडाणु और दाता के शुक्राणु का उपयोग करना होगा.
Delhi High Court ने पूछा सरोगेसी कानून के लाभ से सिंगल और अविवाहित महिलाएं बाहर क्यों ?
what is surrogacy pregnancy : क्या है सरोगेसी जानें?
सरल शब्दों में जानें तो अपनी पत्नी के अलावा किसी दूसरी महिला की कोख में अपने बच्चे को पालने को सरोगेसी की संज्ञा दी गई है. ऐसे कपल जो माता-पिता तो बनना चाहते हैं लेकिन उन्हें बच्चे पैदा करने में दिक्कत आती है, वे सरोगेसी को अपनाते हैं. सरोगेसी मुख्य रूप से दो प्रकार की होती है जिसमें पहली ट्रेडिशनल सरोगेसी जबकि दूसरी जेस्टेशनल सरोगेसी.
ट्रेडिशनल सरोगेसी क्या है : ट्रेडिशनल सरोगेसी की बात करें तो इसमें डोनर या पिता के शुक्राणु (Sperm) को सेरोगेट मदर के अंडाणु से मिलाने का काम किया जाता है. इस पूरी प्रक्रिया में बच्चे की बायोलॉजिकल मदर सरोगेट मदर ही होती है. इसका मतलब यह है कि कोख किराए पर लेने का काम हुआ है. हालांकि बच्चा जब जन्म ले लेता है तो उसके आधिकारिक माता-पिता वे कपल ही होते हैं जिन्होंने सरोगेसी के लिए ऑप्ट किया है.
जेस्टेशनल सरोगेसी क्या है: अब बात जेस्टेशनल सरोगेसी की करें तो इसमें माता-पिता के शुक्राणु और अंडाणु को मिलाकर सेरोगेट मदर की कोख में रखने का का काम किया जाता है. इस प्रक्रिया में सरोगेट मदर केवल बच्चे को जन्म देने का काम करती है. सेरोगेट मदर का जेनेटिकली बच्चे से कोई संबंध नहीं होता है. बच्चे की मां सरोगेसी कराने वाली महिला को ही माना जाता है.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Amitabh Kumar
अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










