Health : खुद को रखना है स्वस्थ, तो दिल की सुनिए... ये लक्षण दिखे, तो हो जायें अलर्ट

Doctor with stethoscope and red heart shape with icon heartbeat in hands on hospital background
यदि दिल की सुनेंगे, तो स्वस्थ रहेंगे
हम अक्सर कहते हैं : ‘दिल की सुनें.’ वैज्ञानिकों ने भी शोध से पता लगाया है कि यह बात सच हो सकती है. यदि दिल की सुनेंगे, तो स्वस्थ रहेंगे. मन तो चंचल होता है, जो अक्सर आपकी दिनचर्या को बिगाड़ देता है़ यहीं कारण है कि हमारी जीवनशैली भी असंतुलित होती जा रही है. खानपान का तरीका बदल गया है़ आज हर किसी के मन को नूडल्स काफी भाता है, जबकि दिल कहता है कि यह हमारी सेहत के लिए अच्छा नहीं है़ दिल की नहीं सुनने का ही नतीजा है कि हमारा दिल अस्वस्थ होता जा रहा है़ बीमार दिल की सर्जरी तक करानी पड़ जा रही है. हम यह बातें इसलिए कर रहे हैं कि आज वर्ल्ड हार्ट डे है़ दिल को स्वस्थ रखने का संदेश देने वाला एक खास दिन. इस वर्ष का थीम है : यूज हार्ट टू बीट कार्डियोवस्कुलर डिजीज. पढ़िए राजीव पांडेय की यह रिपोर्ट़
दिल को शरीर का इंजन कहा जाता है. यही इंजन पूरे शरीर को चलाता है. दिल को धड़कने से लेकर शरीर में खून से लेकर ऑक्सीजन की अापूर्ति करता है. दिल तीन हिस्साें में बंटा होता है. सबका काम अलग-अलग है़ धमनियां से रक्त का प्रवाह पूरे शरीर में जाता है, इसलिए इन धमनियां को साफ व स्वच्छा रखना होता है. गंदगी जमा होने पर ही हार्ट अटैक (हृदयाघात) की समस्या होती है. विशेषज्ञ डॉक्टर कहते हैं : 95 फीसदी हृदय की बीमारी का कारण है जीवन जीने का हमारा खराब तरीका़ दिनचर्या सुधार लें, खानपान ्रसंयमित कर लें, तो आपका दिल हमेशा धड़कता रहेगा़
भारत की बात करें, तो हर चार में एक व्यक्ति को दिल की बीमारी : विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) के अनुसार दिल की बीमारी से होने वाली मौत की संख्या तेजी से बढ़ रही है़ विश्व में हर साल 17.9 मिलियन लोगों के दिल की धड़कन हमेशा के लिए बंद हो जा रही है. यह विश्व में होने वाली कुल मौत का 31 फीसदी है. भारत की बात करें, तो हर चार में एक व्यक्ति दिल की बीमारी से पीड़ित है.
तला-भूना व चटपटा खाना: तला व भुना खाद्य पदार्थ आदि का उपयोग. फास्टफूड जैसे: चाऊमिन, बर्गन, पिज्जा, ्र का उपयोग. कोल्डड्रिंक आदि.
शारीरिक परिश्रम नहीं करना: युवा भागदौड़ की जिंदगी में शरीरिक परिश्रम नहीं करते है. सब्जी व छोटे काम के लिए भी वाहन का उपयोग करना.
मानसिक तनाव: अनावश्यक मानसिक तनाव, काम का बोझ, पारिवारिक समस्या आदि.
पारंपरिक खाना : हार्ट को स्वस्थ रखना है तो तला व भुना खाद्य पदार्थ से परहेज करें. फास्ट फूड का उपयोग नहीं करें. पारंपरिक खाद्य पदार्थ जैसे : दाल, रोटी, सब्जी, दूध व दही का उपयोग करें. अंकुरित अनाज को सुबह के नाश्ता में शामिल करें.
सुबह उठे, लेकिन पूरी नींद लें : सुबह उठने की आदत को अपनी दिनचर्या में शामिल करें. सुबह उठें, लेकिन सात से आठ घंटे की नींद पूरी अवश्य लें. क्योंकि नींद पूरी नहीं करेंगे, तो चिड़चिड़ापन, स्ट्रेस की समस्या शुरू हो जायेगी़
वजन नियंत्रित रखें: असंतुलित खाने की आदत व फास्ट फूड के उपयोग से आजकल वजन बढ़ने की समस्या हो रही है. वजन बढ़ने से खून की नलियाें पर दबाव बढ़ता है. इससे आपके दिल पर भी असर पड़ता है़
30 मिनट व्यायाम करें : दिल की बीमारी से बचना है, तो रोज व्यायाम करना चाहिए. इससे खून की नलियों में कोलेस्ट्राल जमा नहीं होगा़ धड़कन भी सामान्य रहेगी़
हृदय रोग विशेषज्ञ कहते हैं : जब आपकी उम्र 30 वर्ष हो जाये, तो अपने दिल के प्रति फिक्रमंद हो जायें. नहीं, तो अधिक देर होने पर समस्या हो सकती है़ इसके लिए जरूरी है नियमित जांच. घर मेें किसी सदस्य को हार्ट की समस्या है, तो और भी सतर्क रहें. बीपी, किडनी व कोलेस्ट्रोल की समस्या वालों को भी सावधानी बरतने की जरूरत है.
डायबिटीज (शुगर) को सभी बीमारी का जन्मदाता कहा जाता है. इसे दीमक कहा जाता है जो शरीर को पूरी तरह खोखला बना देता है. हार्ट की सभी प्रकार समस्या का जन्मदाता डायबिटीज को ही माना जाता है. डायबिटीज के मरीजों में सबसे बड़ी बात यह है कि हार्ट अटैक होने पर सीने में दर्द या जलन की समस्या नहीं होती है. ऐसे में डायबिटीज के मरीज को छह माह में अपने स्वास्थ्य की जांच जरूर करानी चाहिए.
कोराेना काल में लोगों की जीवनशैली में बदलाव हुआ है. प्रदूषण का स्तर भी कम हुआ है, जिससे आबोहवा भी शुद्ध हुई है. वहीं लोगों की दिनचर्या में सुधार हुआ है. कोरोना के भय से लोग प्रकृति की ओर लौट रहे हैं. संतुलित खानपान को डायट में शामिल कर रहे हैं. योगाभ्यास व व्यायाम का नियमित अभ्यास कर रहे हैं. शारीरिक मेहनत के कारण मोटापा भी कम हो रहा है़ परिवार के साथ समय गुजर रहा है. अनावश्यक तनाव कम हुआ है. ट्रैफिक का स्ट्रेस भी बहुत कम हुआ है. -हालांकि, जो कोरोना पॉजिटिव हैं उनके दिल पर पड़ रहा खराब असर
कोराेना वायरस का असर वैसे शरीर के प्रत्येक अंग पर पड़ता है, लेकिन असर हृदय पर ज्यादा पड़ता है. हार्ट पर इसका दुष्प्रभाव देखने को मिल रहा है. हार्ट की बीमारी का अधिकतर लक्षण कोरोना में होने वाली समस्या से मिलता जुलता है, इसलिए डॉक्टर को भी समझने में परेशानी होती है. मरीज भी भ्रमित हो जाता है कि उसको हार्ट की समस्या हो गयी है या फिर कोरोना के कारण यह समस्या है.
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कोरोना वायरस के खिलाफ एंटीबॉडी तैयार करने में हार्ट की मांसपेशियों पर असर पड़ता है. इससे थकान व कमजोरी की समस्या हो सकती है.
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कोरोना संक्रमण के कारण छाती में दर्द की समस्या होती है. इससे हार्ट की मांसपेशियों में सूजन हो जाता है. इसे स्ट्रेस कार्डियोमायापैथी कहा जाता है.
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कोरोना के भय से दिल की धड़कन तेज हो जाती है.
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कोरोना में जो एंटीबायोटिक दवाएं दी जा रही है उसका हार्ट पर दुष्प्रभाव पड़ता है.
शारीरिक मेहनत जरूर करें
हार्ट की बीमारी हमारी जीवनशैली से होने वाली बीमारी है. अपने मन को काबू मेें नहीं रख पाते हैं, इसलिए
पाश्चात्य खाद्य पदार्थ को जीवन में शामिल कर चुके हैं. यही हार्ट की बीमारी के प्रमुख कारण हैं. शारीरिक मेहनत जरूर करें. नियमित व्यायाम इस बीमारी से बचाता है.
डाॅ प्रशांत कुमार, कार्डियोलाॅजिस्ट रिम्स
योग व ध्यान से हम शरीर के हर बीमारी को नियंत्रित कर सकते हैं. अनुलोम-विलोम, ध्यान, प्रणायाम, आसन को अपनी दिनचर्या में शामिल करें. इससे आपका दिल हमेशा स्वस्थ रहेगा.
-डॉ परणीता सिंह, योग शिक्षिका
तला व भुना हुआ खाद्य पदार्थ हार्ट को बीमार बनाता है. इसलिए अंकुरित अनाज का नियमित सेवन कीजिए. पारंपरिक खाद्य पदार्थ से शरीर को सभी विटामिन मिलते हैं. पनीर व उससे बने खाद्य पदार्थ को अपने भोजन में शामिल करें. फल व सब्जी का प्रयोग पर्याप्त मात्रा में करें. रेगुलर एक ही तेल का प्रयोग नहीं करें.
-मीनाक्षी कुमारी, डायटिशियन रिम्स
रिम्स के कार्डियोलाॅजी विंग में हार्ट के मरीजों की संख्या पिछले दो साल की तुलना बढ़ी है. रिम्स में वर्ष 2018 में 24,000 हृदय रोगियों ने परामर्श लिया. वहीं वर्ष 2019 मेें 27,000 लोगों का इलाज किया गया. ओपीडी में आने वाले मरीजों में 75 से 80 फीसदी नये मरीजों ने परामर्श लिया. कार्डियोलॉजी के अलावा रिम्स में कार्डियेक सर्जरी विभाग भी है, जिसमें ओपेन हार्ट व वास्कुलर हार्ट की बीमारी की सर्जरी की जाती है. रिम्स के सीटीवीएस विभाग में दो साल में हार्ट के दर्जनों मरीजों की सर्जरी की है. हालांकि कोरोना संकट के कारण वर्तमान समय में मरीजों की संख्या कम हो गयी है.
– सीने में दर्द
– सांस फूलना
– सीढ़ी चढ़ने पर सीने में दर्द व धड़कन तेज होना
– सीने में जलन
हार्ट की बीमारी की जांच के लिए सबसे पहले इसीजी किया जाता है. इसके बाद इकोकार्डियोग्राफी, हॉल्टर जांच व एंजियोग्राफी की जांच की जाती है. एंजियोग्राफी की जांच से हार्ट की वास्तविक स्थिति की जानकारी होती है.
Post by : Pritish sahay
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