Harmful Effects Of Mobile Phones: स्मार्टफोन का इस्तेमाल करने वाले बच्चों में हो सकती है मानसिक परेशानी

Edited by Shaurya Punj
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Harmful Effects Of Mobile Phones: अगर बात छोटे बच्चों की करें तो ज्यादा स्मार्टफोन का इस्तेमाल करने से वो कई बीमारियों के शिकार बन सकते हैं. अगर आप का भी बच्चा हर वक्त फोन से चिपका रहता है तो आपको सतर्क होने की जरूरत है क्योंकि यह थोड़ी देर कि एंटरटेनमेंट आपके बच्चे के जीवन पर ग्रहण लगा सकती है.

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Harmful Effects Of Mobile: स्मार्टफोन ने एक ओर जहां लोगों की जिंदगी काफी आसान बना दी है और इसकी मदद से लोग तकनीक की दुनिया से जुड़ते जा रहे हैं. वहीं इसका हद से ज्यादा इस्तेमाल नुकसान भी पहुंचाता है. खासतौर पर अगर बात छोटे बच्चों की करें तो ज्यादा स्मार्टफोन का इस्तेमाल करने से वो कई बीमारियों के शिकार बन सकते हैं. अगर आप का भी बच्चा हर वक्त फोन से चिपका रहता है तो आपको सतर्क होने की जरूरत है क्योंकि यह थोड़ी देर कि एंटरटेनमेंट आपके बच्चे के जीवन पर ग्रहण लगा सकती है. आपका बच्चा मानसिक और शारीरिक तौर पर बीमार हो सकता है.

डिप्रेशन की समस्या

मोबाइल की जरूरत से ज्यादा उपयोग से आपका बच्चा डिप्रेशन का शिकार हो सकता है. इसके साथ ही आपका बच्चा बहुत ज्यादा चिड़चिड़ा और गुस्सैल बन सकता है. दरअसल ऐसा इसलिए होता है क्योंकि मोबाइल के अधिक इस्तेमाल से बचा बाहरी दुनिया से संपर्क नहीं कर पाता है, ऐसे में जब बाद में आदत बदलने की कोशिश की जाती है तो वह आक्रमक चिड़चिड़ा और डिप्रेशन में चला जाता है.

दिमाग का विकास ना होना

एक स्टडी में खुलासा हुआ है कि 10 साल तक के बच्चे अगर 7 घंटे से ज्यादा मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हैं तो उनके दिमाग पर गहरा असर पड़ता है ज्यादा समय मोबाइल फोन पर चिपके रहने से बच्चों के दिमाग की बाहरी परत पतली पड़ जाती है इसे दिमाग की ग्रोथ पर भी बुरा असर पड़ता है.

ड्राई आई की समस्या

बच्चों का स्मार्टफोन की स्क्रीन पर ज्यादा समय बिताना आंखों में सूखे पन का कारण बन सकता है. कम उम्र में ही बच्चों को चश्मा लगने लग जाता है, उनकी आंखों का नंबर बढ़. जाता है इतना नहीं कई बार इस से सिरदर्द जैसी समस्या और माइग्रेन जैसी परेशानी हो सकती है.

जानें क्या कहती है सर्वे रिपोर्ट

अमेरिका के एनजीओ सैपियन लैब्स ने इस स्टडी को 40 से अधिक देशों में किया. नए ग्लोबल स्टडी में 40 से अधिक देशों के 18 से 24 साल की आयु के 27,969 एडल्ट्स का डेटा जुटाया गया. इसमें भारत के लगभग 4,000 युवा शामिल हैं. इसमें पाया गया कि महिलाएं अधिक प्रभावित दिखाई देती हैं. इसमें महिलाएं अधिक प्रभावित दिखीं. ‘एज ऑफ फर्स्ट स्मार्टफोन एंड मेंटल वेलबीइंग आउटकम’ स्टडी के तहत मेंटल हेल्थ कोशेंट (MHQ) के तहत मानसिक क्षमताओं और लक्षणओं का आकलन किया गया. इसके तहत अंकों की तुलना उत्तरदेने के बीच पहले स्मार्टफोन या टैबलेट के स्वामित्व की रिपोर्ट की गई आयु से की गई थी.

सर्वे के रिजल्ट्स में माता-पिता के लिए एक स्पष्ट संदेश है. इसमें जितना हो सके अपने बच्चे को स्मार्टफोन देने में देरी करें. न्यूरोसाइंटिस्ट का कहना है कि बच्चों पर अपने साथियों का दबाव अधिक है. ऐसे में अपने पर बच्चे पर ध्यान दें.

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By Shaurya Punj

शौर्य पुंज विशेष रूप से दैनिक राशिफल, साप्ताहिक एवं मासिक भविष्यफल, पूजा-पाठ, व्रत-त्योहार, शुभ मुहूर्त, ज्योतिषीय उपाय, वास्तु टिप्स और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी खबरों एवं लेखों पर फोकस कर रहे हैं. वो डिजिटल मीडिया जगत के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. पाठकों की रुचि और जरूरतों को ध्यान में रखते हुए वे सरल, सहज और तथ्यपूर्ण धार्मिक एवं ज्योतिषीय कंटेंट तैयार करते हैं. डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ शौर्य खबरों की नब्ज को समझने और जटिल विषयों को आसान भाषा में प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 2008 में ग्रेजुएशन के दौरान दैनिक हिंदुस्तान, प्रभात खबर, दैनिक जागरण और तरंग भारती (हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र) के लिए फ्रीलांस लेखन से की थी. वर्ष 2011 में उन्होंने दैनिक जागरण के टैब्लॉइड समाचार पत्र iNext में इंटर्नशिप की. इसी दौरान उन्हें प्रभात खबर के डिजिटल सेक्शन में कार्य करने का अवसर मिला और अप्रैल 2011 से उन्होंने प्रभातखबर.कॉम के एंटरटेनमेंट सेक्शन में काम शुरू किया. यहां उन्होंने बॉलीवुड फिल्म रिव्यू, बॉक्स ऑफिस रिपोर्ट और मनोरंजन जगत की प्रमुख खबरों पर लेखन किया. साल 2020 के दौरान उन्होंने लाइफस्टाइल, हेल्थ, एजुकेशन और अन्य नॉन-न्यूज कैटेगरी में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया. Health & Fitness, Beauty & Fashion, Relationship & Family, Food & Recipes, Travel, Astrology & Vastu, Career & Motivation, Festival & Culture जैसे विषयों पर उन्होंने सैकड़ों उपयोगी और जानकारीपूर्ण लेख तैयार किए. शिक्षा शौर्य पुंज का जन्म रांची, झारखंड में हुआ. उनकी प्रारंभिक शिक्षा डीएवी पब्लिक स्कूल, हेहल, रांची से हुई. इसके बाद उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन में बी.ए. (ऑनर्स) की डिग्री प्राप्त की. पत्रकारिता की उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि उन्हें समाचार लेखन के मूल सिद्धांत 5Ws और 1H — क्या, कौन, कहां, कब, क्यों और कैसे के आधार पर तथ्यपूर्ण, संतुलित और प्रभावी कंटेंट तैयार करने में सक्षम बनाती है. विशेषज्ञता के क्षेत्र दैनिक राशिफल साप्ताहिक एवं मासिक भविष्यफल ज्योतिषीय उपाय पूजा-पाठ एवं धार्मिक अनुष्ठान व्रत-त्योहार एवं शुभ मुहूर्त वास्तु शास्त्र धार्मिक मान्यताएं एवं परंपराएं लाइफस्टाइल एवं वेलनेस हेल्थ एवं फिटनेस डिजिटल कंटेंट राइटिंग एवं SEO पाठकों तक विश्वसनीय, उपयोगी और आसान भाषा में जानकारी पहुंचाना शौर्य पुंज की लेखन शैली की सबसे बड़ी विशेषता है.

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