वर्कआउट में खूब पसीना आया, फिर भी नहीं घटा फैट? जानें असली वजह
सांकेतिक फोटो (Social Media)
Does Sweating Help Burn Fat: क्या ज्यादा पसीना बहाने से सच में शरीर की चर्बी तेजी से पिघलती है. जानिए इसके पीछे का असली वैज्ञानिक सच और पसीना बहाने से जुड़ी कुछ आम गलतियां.
Does Sweating Help Burn Fat: अक्सर जब हम जिम में किसी को पसीने से तरबतर देखते हैं या खुद धूप में जमकर पसीना बहाते हैं, तो मन में एक ही ख्याल आता है आज तो बहुत अच्छी फैट बर्न हुई है. यह एक ऐसा मिथक (Myth) है जिस पर हममें से ज्यादातर लोग आंख मूंदकर भरोसा करते हैं. कई लोग तो वजन घटाने के चक्कर में बिना पंखे के वर्कआउट करते हैं या पसीना निकालने वाले स्लिमिंग बेल्ट बांधकर घूमते हैं. लेकिन क्या वाकई ज्यादा पसीना बहाने का मतलब ज्यादा फैट बर्न होना है. आइए जानते हैं.
Does Sweating Help Burn Fat: पसीना आने का असली मतलब क्या है?
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि हमारे शरीर से पसीना क्यों निकलता है। पसीना आना हमारे शरीर का एक ‘कूलिंग सिस्टम’ (Cooling System) है। जब हम कोई भारी काम करते हैं, वर्कआउट करते हैं या गर्म माहौल में होते हैं, तो हमारे शरीर का तापमान बढ़ने लगता है।
इस बढ़े हुए तापमान को कम करने के लिए हमारी स्वेद ग्रंथियां (Sweat glands) त्वचा के जरिए पानी बाहर निकालती हैं। जब यह पानी हवा में उड़ता है (Evaporate होता है), तो हमारे शरीर को ठंडक मिलती है। यानी, पसीने का काम शरीर के तापमान को कंट्रोल करना है, न कि फैट को पिघलाना.

वजन तो कम होता है, पर वो फैट नहीं है
अगर आप बहुत ज्यादा पसीना बहाने के बाद वेइंग मशीन (Weight Machine) पर खड़े होंगे, तो आपको अपना वजन 500 ग्राम से 1 किलोग्राम तक कम दिख सकता है. क्योंकि यह घटा हुआ वजन आपकी चर्बी (Does Sweating Help Burn Fat) का नहीं, बल्कि ‘वॉटर वेट’ है.
पसीने के रूप में आपके शरीर से सिर्फ पानी और कुछ जरूरी मिनरल्स (जैसे सोडियम और पोटेशियम) बाहर निकलते हैं. जैसे ही आप वर्कआउट के बाद एक-दो गिलास पानी या जूस पिएंगे, वह घटा हुआ वजन वापस अपनी जगह आ जाएगा.
फैट कैसे बर्न होती है?
शरीर से फैट कम करने की प्रक्रिया पूरी तरह से केमिकल और मेटाबॉलिक होती है. जब हम कोई फिजिकल एक्टिविटी करते हैं, तो शरीर को एनर्जी की जरूरत होती है. इस एनर्जी को पाने के लिए हमारा शरीर फैट सेल्स को तोड़कर उन्हें ऊर्जा में बदलता है. इस पूरी प्रक्रिया में जो बाय-प्रोडक्ट बनते हैं, वे कार्बन डाइऑक्साइड और पानी के रूप में बाहर निकलते हैं.

कम पसीने का मतलब कम वर्कआउट नहीं
हर इंसान के शरीर का कंपोजिशन अलग होता है. कुछ लोगों को बहुत कम मेहनत में भी बहुत ज्यादा पसीना आता है, जबकि कुछ लोग भारी वजन उठाने के बाद भी ज्यादा नहीं पसीजते. पसीना आना इस बात पर निर्भर करता है कि:
- आपके आस-पास का तापमान और ह्यूमिडिटी (उमस) कितनी है.
- आपके शरीर में स्वेट ग्लैंड्स की संख्या कितनी है.
- आपके जेनेटिक्स कैसे हैं.
इसलिए, अगर आपको वर्कआउट के दौरान कम पसीना आ रहा है, तो इसका यह बिल्कुल मतलब नहीं है कि आपकी कैलोरी बर्न नहीं हो रही है.
ज्यादा पसीना बहाने के चक्कर में न करें ये गलतियां
तेजी से वजन घटाने के लिए जानबूझकर ज्यादा पसीना निकालना (Does Sweating Help Burn Fat) सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है.
- डिहाइड्रेशन: शरीर से ज्यादा पानी निकल जाने के चक्कर में आपको चक्कर आ सकते हैं, कमजोरी लग सकती है और सिरदर्द हो सकता है.
- स्लिमिंग बेल्ट और प्लास्टिक रैप: कई लोग पेट पर प्लास्टिक या स्लिम बेल्ट बांधकर दौड़ते हैं. इससे सिर्फ उस हिस्से का तापमान बढ़ता है और त्वचा खराब हो सकती है, फैट कम नहीं होता.
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लेखक के बारे में
By Smita Dey
स्मिता दे प्रभात खबर में डिजिटल कंटेंट क्रिएटर के तौर पर काम कर रही हैं. बुक्स पढ़ना, डांसिंग और ट्रैवलिंग का शौक रखने वाली स्मिता युवाओं को बेहतर करियर गाइड करना और नौकरी के लिए प्रोत्साहित करना पसंद करती हैं.
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