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अच्छी पहल : गुमला जिले में पहली बार बनी नाशपाती बागवानी की योजना, डुमरी में 50 एकड़ जमीन पर होगी खेती

Updated at : 27 Apr 2023 11:11 PM (IST)
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अच्छी पहल : गुमला जिले में पहली बार बनी नाशपाती बागवानी की योजना, डुमरी में 50 एकड़ जमीन पर होगी खेती

गुमला जिले में पहली बार नाशपाती बागवानी की योजना बनायी गयी है. घाेर नक्सल प्रभावित डुमरी में 50 एकड़ भूमि में इसकी बागवानी होगी. इसके लिए उद्यान्न विभाग ने लाभुक किसानों के चयन की प्रक्रिया शुरू कर दी है.

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गुमला, जगरनाथ पासवान : गुमला जिले में पहली बार नाशपाती बागवानी की योजना बनी है. घोर नक्सल प्रभावित डुमरी प्रखंड में 50 एकड़ भूमि में नाशपाती की बागवानी करायी जायेगी, जिसकी कार्य योजना तैयार है. उद्यान्न विभाग किसानों से बागवानी करायेगी, जिसमें 20 लाख रुपये खर्च होंगे. नाशपाती बागवानी के लिए विभाग ने लाभुक किसानों के चयन की प्रक्रिया शुरू कर दी है. गुमला जिले में उद्यान्निकी क्षेत्र का विस्तार करते हुए नयी-नयी योजनाओं पर काम किया जा रहा है. इस निमित्त इस साल जिले में नाशपाती की बागवानी कराने की योजना बनायी गयी है. योजना जिला उद्यान्न विभाग की है. विभाग ने नाशपाती की बागवानी कराने के लिए गुमला जिले के डुमरी प्रखंड का चयन किया है.

डुमरी में लाभुक किसानों के चयन की प्रक्रिया शुरू

जिला उद्यान्न कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, नाशपाती बागवानी एक नयी योजना है. उद्यान्न विभाग द्वारा हर साल टिशु कल्चर के स्ट्रॉबेरी, मशरूम, फूल, टिशु कल्चर के केला, पपीता, मिर्च, ओल, अदरख, मशरूम, विभिन्न प्रकार के फूल व सब्जियों की खेती, प्रशिक्षण कार्यक्रम जैसी योजना पर काम किया जा रहा है. टिशु कल्चर के स्ट्रॉबेरी, मशरूम, जरबेरा फूल, गेंदा फूल की बागवानी हाल के सालों से कराया जा रहा है. अब इस साल नाशपाती की बागवानी के लिए भी योजना बना कर काम शुरू कर दिया गया है. योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए विभाग अभी डुमरी प्रखंड में लाभुक चयन प्रक्रिया शुरू की है.

अभी पंजाब का नाशपाती बिकता है

बता दें कि गुमला जिले में अन्य फलों की तरह नाशपाती की भी मांग रहती है. इसके लिए गुमला जिला बाहरी राज्य और विदेश पर आश्रित है. हालांकि, जिले में स्थानीय स्तर पर ही छिटपुट क्षेत्रों में कहीं-कहीं नाशपाती के पेड़ हैं, लेकिन इससे जिले में मांग के अनुरूप पैदावार (उत्पादन) नहीं हो रहा है. साथ ही जून-जुलाई माह में बाजार में नाशपाती आने के बाद लगभग डेढ़ माह के अंदर समाप्त हो जाता है. सिजनली नाशपाती के खत्म होने के बाद यहां के फल व्यवसायी दो किस्म के नाशपाती एक विदेशी प्रजाति और एक पंजाब में उत्पादित होने वाली नाशपाती को मंगाते हैं. हालांकि, स्थानीय नाशपाती की अपेक्षा वे दोनों नाशपातियों की कीमत अधिक रहती है. परंतु विदेशी व पंजाबी प्रजाति की नाशपाती पूरे ठंड के मौसम तक लोगों को खाने को मिलता है.

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नाशपाती उत्पादन के बढ़ने से किसानों की आर्थिक स्थिति होगी मजबूत

इस संबंध में उद्यान्न विभाग के तकनीकी विशेषज्ञ दीपक कुमार ने बताया कि डुमरी प्रखंड नेतरहाट से सटा हुआ क्षेत्र है. नेतरहाट क्षेत्र में बड़े पैमाने पर नाशपाती की खेती होती है. इसलिए डुमरी प्रखंड में नाशपाती की खेती को बढ़ावा दिया जा सकता है. अभी इसकी शुरुआत की जा रही है. आनेवाले समय में नाशपाती बागवानी की योजना डुमरी के अलावा अन्य प्रखंडों के लिए भी बनायी जायेगी. इससे न केवल यहां नाशपाती उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और किसान आर्थिक रूप से मजबूत होंगे.

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