करोड़ों खर्च कर हॉलैंड से मंगाया एस्टोटर्फ हुआ बेकार, गुमला में हॉकी खेलने लायक नहीं है ग्राउंड

Updated at : 25 Aug 2022 7:32 AM (IST)
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करोड़ों खर्च कर हॉलैंड से मंगाया एस्टोटर्फ हुआ बेकार, गुमला में हॉकी खेलने लायक नहीं है ग्राउंड

गुमला जिला हॉकी खेल की नर्सरी है, लेकिन ग्राउंड के अभाव में खेल प्रतिभा कुंठित हो रही है. करोड़ों खर्च कर हॉलैंड से एस्टोटर्फ मंगाया गया, पर पानी के अभाव में सड़ गया. वहीं, ग्राउंड नहीं होने के कारण खिलाड़ी को अभ्यास करने में भी काफी दिक्कत आ रही है.

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Jharkhand News: गुमला जिला हॉकी खेल की नर्सरी है. यहां से कई खिलाड़ी निकले जो राज्य से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक नाम कमाया. आज से 15 साल पहले हॉकी खेल में गुमला जिला की तूती बोलती थी. लेकिन आज ग्राउंड के आभाव में खेल प्रतिभा कुंठित हो रही है. गुमला में हॉकी खेलने लायक ग्राउंड नहीं हैं. जिस कारण खिलाड़ी खेल का अभ्यास बेहतर तरीके से नहीं कर पा रहे हैं.

सड़ गया एस्टोटर्फ

वर्ष 2005 में हॉकी खेल को बढ़ावा देने के लिए कला-संस्कृति, खेलकूद एवं युवा कार्य विभाग झारखंड सरकार द्वारा संत इग्नासियुस हाई स्कूल के कुछ जमीन को अपने अधीन लेकर उसमें एस्टोटर्फ (हॉकी ग्राउंड) का निर्माण किया गया था. यहां हॉकी खेल के लिए सभी सुविधा देनी थी. परंतु सिर्फ ग्राउंड बनाकर छोड़ दिया गया. हॉलैंड से एस्टोटर्फ मंगाकर ग्राउंड में बिछाया गया. लेकिन पानी छिड़कने की व्यवस्था नहीं रहने के कारण एस्टोटर्फ उखड़ गया है. अब पूरा एस्टोटर्फ सड़ गया है.

खिलाड़ियों के लिए नहीं है समुचित व्यवस्था

गैलरी बनी है. परंतु बैठने लायक नहीं है. चेजिंग रूम है. परंतु जर्जर हो गया है. चेजिंग रूम में खिलाड़ी नहीं जाते हैं. बिजली की व्यवस्था नहीं है. एस्टोटर्फ की वर्तमान स्थिति ऐसी है कि मैदान में जहां-तहां जलजमाव है. कई जगहों पर टर्फ घिसकर खराब हो गया है और टर्फ को सतह (जमीन) से सही से नहीं चिपकाये जाने के कारण जहां-तहां से उखड़ गया है. वहीं अगर खिलाड़ियों को ड्रेस चेंज करने के लिए चेंज रूम जाना है तो एस्टोटर्फ मैदान के बीच से होकर जाना पड़ेगा? क्योंकि चेंज रूम तक जाने के लिए और कोई रास्ता नहीं है. दर्शक-दीर्घा में काई जमने लगी है. जो बैठने लायक नहीं है.

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बिना मानक के बना है एस्टोटर्फ

गुमला के संत इग्नासियुस उच्च विद्यालय में स्थापित हॉकी ग्राउंड एस्टोटर्फ में कई खामियां व कमियां हैं. इन खामियों व कमियों के संबंध में वर्ष 2010 में विद्यालय के तत्कालीन प्रधानाध्यापक ने कला-संस्कृति, खेलकूद एवं युवा कार्य विभाग झारखंड सरकार के निदेशक को पत्राचार किये थे. जिसमें प्रधानाचार्य ने उल्लेखित किया था कि एस्टोटर्फ सही तरीका से नहीं बिछाया गया है. एस्टोटर्फ को सतह (जमीन) से सही से चिपकाया नहीं गया है. जिससे मैदान अनइवेन नजर आता है और जगह-जगह टर्फ उभरा हुआ प्रतीत होता है.

परेशानियों से जूझ रहा खेल ग्राउंड

एस्टोटर्फ और दर्शक-दीर्घा के बीच बाड़ा (फेंस) नहीं लगाया गया है. दर्शकों एवं आम जनता को सीधा टर्फ मैदान में प्रवेश से रोकने एवं खतरनाक बॉल से दर्शकों की रक्षा के लिए बाड़ा लगाना अत्यावश्यक है. पानी सप्लाई के लिए पाइप बिछाया गया है. परंतु एस्टोटर्फ में पानी के छिड़काव के लिए स्प्रींकर नहीं लगाया गया है. बिजली आपूर्ति की व्यवस्था लंबित है. जल संग्रह के लिए वाटर टैंक बनाया गया है, परंतु वह त्रुटिपूर्ण है. टैंक में पानी भरने पर भी पानी नहीं ठहरता है और टैंक तुरंत सूख जाता है. साथ ही टैंक के इर्द-गिर्द समतलीकरण भी नहीं हुआ है. बरसात के पानी को रोकने के लिए गार्डवाल नहीं बनाया गया है. गार्डवाल के अभाव में बरसाती पानी के साथ मिट्टी व बालू भी मैदान में प्रवेश करता है. जिससे टर्फ खराब गया है.

नये एस्टोटर्फ बिछाने के लिए खेल विभाग को लिखा पत्र

इस संबंध में डीएसओ हेमलता बून ने कहा कि संत इग्नासियुस हाई स्कूल परिसर में बना एस्टोटर्फ सड़ गया है. अब यह खेलने लायक नहीं है. नया एस्टोटर्फ बिछाने के लिए खेल विभाग निदेशालय को पत्र लिखा गया है.

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रिपोर्ट : दुर्जय पासवान, गुमला.

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