गुमला के पालकोट में 18 सरकारी भवन जर्जर, कभी भी हो सकता है हादसा, करोड़ों की लागत से हुआ था निर्माण
Published by : Sameer Oraon Updated At : 29 Jul 2022 2:01 PM
गुमला जिले के पालकोट में 18 सरकारी भवन जर्जर है. जहां कभी भी हादसा हो सकता है. इन सभी भवनों का लागत मूल्य तीन से चार करोड़ रुपये है. यहां तक बीडीओ के लिए बनाया गया अवास भी जर्जर है. बीडीओ खुद राजस्व कर्मचारियों के लिए बनाये गये भवन में रहते हैं
गुमला : पालकोट प्रखंड के 18 सरकारी भवनों को कंडम घोषित कर दिया गया है. यानी कि जर्जर जो कभी भी ध्वस्त हो सकता है. ये सभी सरकारी भवन तीन से चार करोड़ रुपये की लागत से बनी थी, जो अब किसी उपयोग का नहीं है. अगर इन भवनों को जल्द ध्वस्त नहीं किया गया तो कभी भी यहां कोई बड़ा हादसा हो सकता है. यहां तक कि बीडीओ जिस आवास में रहते थे. वह भी जर्जर हो गया है. भवन गिर न जाये.
इसलिए बीडीओ फिलहाल राजस्व कर्मचारियों के लिए बनाये गये भवन में रहते हैं. यहां बता दें कि जिन 18 सरकारी भवनों को कंडम घोषित किया गया है. इसमें कई ऐसे भवन हैं जो आधा-अधूरा बना कर छोड़ दिये गये थे. जिसका कुछ ही दिन उपयोग हो सका और जर्जर हो गया. जो अब ध्वस्त होने की स्थिति में है. यहां बता दें कि पालकोट प्रखंड परिसर में प्रवेश करते ही यहां अनगिनत भवन खंडहर की तरह नजर आता है.
ऐसा लगता है. जैसे यह वर्षों से बेकार पड़ा है. कभी इन भवनों की मरम्मत नहीं करायी गयी. इस कारण खंडहर हो गया और अब टूट कर गिर भी रहा है. सबसे ज्यादा डर बारिश के समय होती है. बारिश के समय डर से कोई व्यक्ति जर्जर भवन के नीचे शरण नहीं लेता है. हालांकि प्रशासन ने इन सभी जर्जर भवनों को ध्वस्त करने की योजना बनायी है. जर्जर भवन की सूचना भी तैयार कर ली गयी है. पालकोट प्रखंड परिसर में 40 से अधिकारी सरकारी भवन है. जिसमें मात्र नया प्रखंड सह अंचल कार्यालय व तहसील कचहरी और हल्का कर्मचारी आवास ठीक है.
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प्रखंड परिसर के मुख्य द्वार के बायीं ओर एफसीआई गोदाम जर्जर हो गया, कभी भी ध्वस्त हो सकता है.
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प्रखंड परिसर के मुख्य द्वार के बायीं ओर शौचालय व वाहन शेड जर्जर हो गया, ध्वस्त हो सकता है.
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प्रखंड परिसर के पुराना तहसील कचहरी के पीछे गोशाला जर्जर हो गया, कभी भी ध्वस्त हो सकता है.
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ब्लॉक के मंदिर के बायीं ओर गार्ड रूम और पर्यवेक्षक आवास जर्जर हो गया, कभी भी ध्वस्त हो सकता है.
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ब्लॉक परिसर में मंदिर के बायीं ओर रसोईघर भवन जर्जर हो गया, कभी भी ध्वस्त हो सकता है.
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बीडीओ आवास के समीप स्थित तृतीय वर्ग के कर्मियों का आवास जर्जर हो गया, कभी भी ध्वस्त हो सकता है.
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पुराना प्रखंड कार्यालय का भवन पूरी तरह जर्जर हो गया, यह कभी भी ध्वस्त हो सकता है.
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अंचल अभिलेखागार भवन व राजीव गांधी सेवा केंद्र स्थित भवन जर्जर हो गया, ध्वस्त हो सकता है.
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पशु चिकित्सालय के समीप स्थित शौचालय, गौशाला व भवन जर्जर हो गया, ध्वस्त हो सकता है.
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प्रथम वर्गीय पशु चिकित्सा शेड जर्जर हो गया, कभी भी ध्वस्त हो सकता है.
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श्रम भवन के समीप स्थित तृतीय वर्गीय कर्मियों का आवास जर्जर हो गया, कभी भी ध्वस्त हो सकता है.
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आत्मा कार्यालय के समीप स्थित तृतीय वर्गीय कर्मियों का आवास व भवन जर्जर हो गया, ध्वस्त हो सकता है.
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प्रखंड कार्यालय परिसर स्थित लैंपस भवन जर्जर हो गया, कभी भी ध्वस्त हो सकता है.
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चतुर्थ वर्गीय कर्मचारियों का आवास व शौचालय सहित भवन जर्जर हो गया, कभी भी ध्वस्त हो सकता है.
तहसील कचहरी, गोशाला स्थित शौचालय, मंदिर, राजीव गांधी सेवा केंद्र भवन, टीपीसी भवन, टीपीसी भवन का शौचालय, पुराना बाल विकास परियोजना पदाधिकारी का कार्यालय, प्रथम वर्गीय पशु चिकित्सा भवन, श्रम भवन, पंचायत समिति भवन व शौचालय, दक्षिणी पालकोट पंचायत भवन शौचालय, आत्मा भवन व शौचालय, आत्मा कार्यालय के समीप स्थित जेनरेटर रूम, एफसीआई गोदाम, बीआरसी भवन की मरम्मत की जरूरत है. ये सभी सरकारी भवन क्रियाशील है. परंतु मरम्मत की आवश्यकता है. जिससे भवन को सुरक्षित रखा जा सकता है
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By Sameer Oraon
समीर उरांव, डिजिटल मीडिया में सीनियर जर्नलिस्ट हैं और वर्तमान में प्रभात खबर.कॉम में सीनियर कटेंट राइटर के पद पर हैं. झारखंड, लाइफ स्टाइल और स्पोर्ट्स जगत की खबरों के अनुभवी लेखक समीर को न्यूज वर्ल्ड में 5 साल से ज्यादा का वर्क एक्सपीरियंस है. वह खबरों की नब्ज पकड़कर आसान शब्दों में रीडर्स तक पहुंचाना बखूबी जानते हैं. साल 2019 में बतौर भारतीय जनसंचार संस्थान से पत्रकारिता करने के बाद उन्होंने हिंदी खबर चैनल में बतौर इंटर्न अपना करियर शुरू किया. इसके बाद समीर ने डेली हंट से होते हुए प्रभात खबर जा पहुंचे. जहां उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग और वैल्यू ऐडेड आर्टिकल्स लिखे, जो रीडर्स के लिए उपयोगी है. कई साल के अनुभव से समीर पाठकों की जिज्ञासाओं का ध्यान रखते हुए SEO-ऑप्टिमाइज्ड, डेटा ड्रिवन और मल्टीपल एंगल्स पर रीडर्स फर्स्ट अप्रोच राइटिंग कर रहे हैं.
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