बिहार के गोपालगंज में बगैर लाइसेंस के धधक रहे हैं ईंट भट्ठे, प्रदूषण बोर्ड द्वारा कोई कार्रवाई नहीं
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 09 Apr 2022 1:39 PM
बिहार के गोपालगंज जिले में बिना इनवायरमेंट क्लियरेंस लाइसेंस के करीब 115 ईंट-भट्ठे धधक रहे हैं. खनिज, प्रदूषण, वाणिज्य कर विभाग की निगरानी में संचालित होने वाले ईंट-भट्ठा संचालकों की ओर से नियमों की अनदेखी करने के साथ ही सुप्रीम कोर्ट के आदेश को भी ठेंगा दिखाया जा रहा है.
बिहार के गोपालगंज जिले में बिना इनवायरमेंट क्लियरेंस (इसी) लाइसेंस के करीब 115 ईंट-भट्ठे धधक रहे हैं. खनिज, प्रदूषण, वाणिज्य कर विभाग की निगरानी में संचालित होने वाले ईंट-भट्ठा संचालकों की ओर से नियमों की अनदेखी करने के साथ ही सुप्रीम कोर्ट के आदेश को भी ठेंगा दिखाया जा रहा है.
ईंट-भट्ठा संचालक सिर्फ अपनी कमाई के चक्कर में लोगों की जिंदगी व सेहत से खिलवाड़ कर रहे हैं. लोगों की जान की परवाह नहीं कर रहे. वह भी तब जब कोरोना के कारण पिछले ही वर्ष कई लोगों ने अपनों को खोने का दर्द झेला है. एक भी परिवार इस दर्द से वंचित नहीं था, जिन्होंने अपनों को नहीं खोया हो. इसके बाद भी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की तरफ से कार्रवाई नहीं करना गंभीर चिंता की बात है.
हालांकि पर्यावरण को लेकर सुप्रीम कोर्ट सुरक्षित करने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा तरह तरह की मुहिम चलायी जा रही है. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भी सख्त आदेश दिया गया है कि वायु प्रदूषण फैलाने वाली भट्ठों पर कार्रवाई की जाये, लेकिन ईंट भट्टों से निकलने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गयी है.
शासन की ओर से ईंट-भट्ठों के संचालन को लेकर गाइडलाइन बनायी गयी है. यही नहीं दो साल पहले सुप्रीम कोर्ट ने लोगों की सेहत, जनजीवन और पर्यावरण सुरक्षा को ध्यान में रखकर सभी ईंट-भट्ठों को बिना नियम कायदे वाले ईंट-भट्ठों का संचालन बंद कराने का आदेश दिया था.
Also Read: समस्तीपुर में माध्यमिक, उच्च माध्यमिक शिक्षकों के बकाया भुगतान में अनियमितता, डीपीओ से की मुलाकात
वर्ष 2019-20 से बगैर जिग-जैग वाले ईट भट्ठों को पूर्ण रूप से बंद करने का आदेश दिया गया है. इसके बाद भी जिले में बगैर जिग-जैग वाले ईट भट्ठे धड़ल्ले से संचालित हो रहे हैं. ईंट भट्टे की चिमनी से निकलने वाले धुएं में नाइट्रोजन डाइऑक्साइड की मात्रा अधिक रहती है. इससे लोगों में सांस की बीमारी अधिक होती है.
इन भट्टों की चिमनियों से निकलने वाला धुआं शहर के आसमान पर छा जाता है, जिससे शहर की आबोहवा प्रदूषित हो रही है. बावजूद इसके प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा कार्रवाई तो दूर, आज तक जांच भी नहीं की गयी, जिसके चलते वह भट्ठों से निकलने वाला धुआं शहर के वायु को प्रदूषित कर रहा है. ग्रामीणों का कहना है कि पिछले तीन वर्षों से चारों ओर ईंट-भट्टे कोयला, रबर के टायर,गीली लकड़ी और तूरी से सुलगाये जाते हैं. जिनसे उठता धुआं गांव की आबोहवा को जहरीला करता है.
हरेंद्र कुमार, जिला खनिज पदाधिकारी ने बताया की ईंट-भट्टों की जांच हम समय-समय पर करते हैं. इसमें उनकी एनओसी, प्रदूषण आदि भी भी जांच होती है. इसके लिए हम बहुत जल्द अभियान भी चलाने वाले हैं. खनिज विभाग अपने रॉयल्टी के प्रति गंभीर है. 65 ईट भट्ठों को नोटिस भी दिया गया है.
-
ईंट भट्टे आबादी क्षेत्र से बाहर होना चाहिए.
-
पर्यावरण लाइसेंस और प्रदूषण बोर्ड से एनओसी होना चाहिए.
-
मिट्टी खनन के लिए खनिज विभाग की अनुमति होना जरूरी है.
-
आबादी बस्ती, नदी, स्कूल से दूर होना चाहिए.
-
ईंट भट्ठा-205
-
जिग-जैग से लैस-90
-
बगैर जिग-जैग के-115
-
राॅयल्टी जमा-145
-
रॉयल्टी जमा करने का नियम
-
नवंबर -5 प्रतिशत तक की छूट
-
दिसंबर में 100 प्रतिशत
-
जनवरी में 105 प्रतिशत
-
फरवरी में 110 प्रतिशत
-
मार्च में 115 प्रतिशत
-
अप्रैल- मई में 150 प्रतिशत
-
जून 200 प्रतिशत
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar News Desk
यह प्रभात खबर का न्यूज डेस्क है। इसमें बिहार-झारखंड-ओडिशा-दिल्ली समेत प्रभात खबर के विशाल ग्राउंड नेटवर्क के रिपोर्ट्स के जरिए भेजी खबरों का प्रकाशन होता है।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










