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ऊंची उड़ान भरना चाहती है बगोदर की बिरहोर बेटी उपासी, बनना चाहती है आईएएस ऑफिसर

25 Sep, 2025 10:58 pm
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Success of Birhor Daughter Upasi Kumari Bagodar Giridih Jharkhand

परिवार के साथ उपासी कुमारी. फोटो : प्रभात खबर

Success of Birhor Daughter: उपासी कहती है कि बिरहोर समुदाय में विशेष रूप से उच्च शिक्षा लड़कियों के लिए बहुत मुश्किल होती है. उच्च शिक्षा गांव, टोले से स्कूल और कॉलेज का दूर होना सबसे बड़ी समस्या है. लड़कियों को स्कूल के बाद होने वाली परेशानी और गरीबी की वजह से पढ़ाई बंद कर देनी पड़ती है. यह उनकी मजबूरी है. उपासी ने कहा कि उसकी मां संजीना देवी ने उसको पढ़ाने में रुचि दिखायी. उसकी काफी मदद की.

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Success of Birhor Daughter| बगोदर (गिरिडीह), कुमार गौरव : विलुप्त हो रही आदिम जनजाति बिरहोर परिवार आज हासिये पर हैं. इस जनजाति के परिवारों में खासकर लड़कियों के लिए उच्चतर शिक्षा बड़ी चुनोती है. इस जनजाति की लड़कियों को पांचवीं या छठी तक की पढ़ाई के बाद घर में बैठा दिया जाता है. इनकी या तो शादी करा दी जाती है या घर में बैठा दिया जाता है. वहीं, लड़कों को कमाने के लिए ट्रैक्टर चलाने या रस्सी बुनने के काम में लगा दिया जाता है.

अंबुलाल बिरहोर की बेटी उपासी ने तोड़ी परंपरा

यही वजह है कि बगोदर प्रखंड के अटका के बुढ़ाचांच के बिरहोर परिवारों में से कोई भी लड़का-लड़की कॉलेज नहीं पहुंचा. इस परंपरा को टोले के अंबुलाल बिरहोर की बेटी उपासी कुमारी ने तोड़ दिया है. उसने कॉलेज की पढ़ाई शुरू कर दी है. उसकी ख्वाहिश है कि वह भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) की अधिकारी बने.

26 सितंबर से कॉलेज जायेगी उपासी बिरहोर

अटका पूर्वी पंचायत के बुढ़ाचांच में बिरहोर टंडा टोला है. इस टोले में करीब 52 चूल्हे हैं. आबादी 325 है. इंटर पास करने के बाद उपासी कुमारी ने ग्रेजुएशन की पढ़ाई के लिए बगोदर के घाघरा साइंस कॉलेज में दाखिला लिया है. उसने हिंदी विषय में स्नातक की पढ़ाई शुरू कर दी है. 26 सितंबर से उपासी बिरहोर कॉलेज जाना शुरू करेगी. इससे उपासी के साथ-साथ उसके माता-पिता भी बेहद खुश हैं.

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बिरहोर बेटियों के लिए उच्च शिक्षा बहुत मुश्किल – उपासी

उपासी कहती है कि बिरहोर समुदाय में विशेष रूप से उच्च शिक्षा लड़कियों के लिए बहुत मुश्किल होती है. उच्च शिक्षा गांव, टोले से स्कूल और कॉलेज का दूर होना सबसे बड़ी समस्या है. लड़कियों को स्कूल के बाद होने वाली परेशानी और गरीबी की वजह से पढ़ाई बंद कर देनी पड़ती है. यह उनकी मजबूरी है. उपासी ने कहा कि उसकी मां संजीना देवी ने उसको पढ़ाने में रुचि दिखायी. उसकी काफी मदद की.

यूनिफॉर्म में अपने माता-पिता के साथ उपासी कुमारी. फोटो : प्रभात खबर

Success of Birhor Daughter: कस्तूरबा स्कूल से मैट्रिक और इंटर की पढ़ाई की

मां ही ने हजारीबाग जिले के विष्णुगढ़ प्रखंड से कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय से मैट्रिक और इंटर तक की पढ़ाई करवायी. मैट्रिक और इंटर में प्रथम श्रेणी में पास करने वाली उपासी की मेधा को देखते हुए परिवार ने घाघरा साइंस कॉलेज में उसका दाखिला करवाया. उपासी का सपना आईएस बनने का है. उपासी 4 भाई-बहनों में सबसे बड़ी है. वह कहती है कि भाई को संस्था के सहयोग से एक स्कूल में भेजा गया, लेकिन उसने पढ़ाई में रुचि नहीं दिखायी. इसलिए उसकी शादी कर दी गयी.

आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों के बावजूद उपासी ने की पढ़ाई

उपासी ने आर्थिक कठिनाइयों और सामाजिक चुनौतियों के बावजूद अपनी पढ़ाई जारी रखी. वह कहती है कि उसका सपना है कि पढ़-लिखकर अपने समुदाय के बच्चों को भी शिक्षा से जोड़ने में मदद करे. वह बिरहोर समाज को आगे ले जाना चाहती है. साथ ही उनके जीवन स्तर में बदलाव के लिए काम करना चाहती है. वह टोले की अन्य लड़कियों को भी अपनी पढ़ाई जारी रखने का संदेश देती हैं.

रस्सी बनाते उपासी के माता-पिता. फोटो : प्रभात खबर

उपासी के चेहरे पर दिख रही कॉलेज जाने की खुशी

कॉलेज जाने की खुशी उपासी के चेहरे पर साफ दिख रही है. उपासी बिरहोर की मां संजीना देवी कहती हैं कि बेटी ने स्कूल में मेहनत की. अब कॉलेज जा रही है. वह काफी खुश हैं. कई लोगों का इसमें सहयोग रहा. उन्होंने सरकार से मांग की है कि बेटी की आगे की पढ़ाई पूरी हो और बाद में उसे अच्छी नौकरी मिले, ऐसी व्यवस्था सरकार करे.

उपासी की मां बोली- गांवों में स्कूल खुलें, तो बिरहोर बच्चे भी उच्च शिक्षा हासिल करेंगे

संजीना देवी ने कहा, ‘हमलोग आज भी रस्सी बुनने के पेशे से ही जुड़े हैं. सरकार अगर शिक्षा में अच्छे स्कूल गांवों में खोले, तो बिरहोरों के बच्चे भी उच्च शिक्षा हासिल कर उच्च पदों पर पहुंच सकते हैं. नौकरी नहीं मिलती, इसलिए जनजातीय परिवार के लोग अपने ब्चचों को मजदूरी करने के लिए भेज देते हैं. उपासी की सफलता अन्य बिरहोर बच्चियों को प्रेरित करेगी.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है। उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवरेज करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ में भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है। मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है

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