जब कारगिल युद्ध से पहले नवाज शरीफ ने अटल जी से मांगी 'खास चीज', पीएम भी रह गए थे हैरान
देव आनंद नवाज शरीफ और अटल बिहारी बाजपेयी के साथ, फोटो- इंस्टाग्राम
जब कारगिल युद्ध के बीच अटल बिहारी वाजपेयी लाहौर जाने लगे, तो नवाज शरीफ ने भारत से क्या मांगा? जानिए देव आनंद से जुड़ा 1999 की ऐतिहासिक बस यात्रा का दिलचस्प किस्सा और जानिए OTT पर आई नई वेब सीरीज 'ऑपरेशन सफेद सागर' के बारे में.
Operation Safed Sagar Dev Anand: 1999 का कारगिल युद्ध भारत और पाकिस्तान के बीच सबसे अहम सैन्य संघर्षों में से एक माना जाता है। इस युद्ध में भारतीय सेना ने जहां जमीन पर 'ऑपरेशन विजय' के जरिए दुश्मन को करारा जवाब दिया, वहीं भारतीय वायुसेना ने 'ऑपरेशन सफेद सागर' चलाकर युद्ध का रुख बदल दिया. इस ऐतिहासिक अभियान पर आधारित नई सीरीज 'ऑपरेशन सफेद सागर' एक बार फिर उस दौर की कई अनसुनी कहानियों को सामने ला रही है.
इसी सिलसिले में एक दिलचस्प किस्सा भी चर्चा में है, जिसका संबंध पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और हिंदी सिनेमा के सदाबहार अभिनेता देव आनंद से है. यह कहानी बताती है कि राजनीति और युद्ध के तनाव के बीच भी सिनेमा और संगीत लोगों को जोड़ने की ताकत रखते हैं.
When Nawaj Sarif Asked to Bring Dev Anand With Atal Bihari Bajpayee: जब नवाज शरीफ ने पीएम को रिक्वेस्ट की थी देवानंद के बारे में
1999 की लाहौर बस यात्रा से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा काफी खबरों में था. जब अटल बिहारी वाजपेयी ने नवाज शरीफ से पूछा कि क्या वह भारत से कुछ मंगवाना चाहते हैं, तो शरीफ ने मुस्कुराते हुए कहा,
"अगर संभव हो तो देव आनंद को भी साथ ले आइए."
बताया जाता है कि देव आनंद को इस यात्रा की जानकारी रवाना होने से सिर्फ एक दिन पहले मिली थी. Journalist पुण्य प्रसून बाजपेयी के अनुसार, उन्हें प्रधानमंत्री कार्यालय से फोन आया. इसके बाद वाजपेयी ने खुद उनसे कहा,
"कल तैयार रहिए. कुछ अधिकारी आपसे मिलने आएंगे. दिल्ली पहुंच जाइए और अपना पासपोर्ट साथ रखना मत भूलिए. आपको मेरे साथ लाहौर चलना है। पड़ोसी देश में भी आपके बहुत से प्रशंसक हैं."
देव आनंद के लिए यह यात्रा सिर्फ एक सरकारी दौरा नहीं थी, बल्कि भावनात्मक भी थी। बंटवारे से पहले वह लाहौर के गवर्नमेंट कॉलेज में पढ़ चुके थे। 1999 की यह बस यात्रा उन्हें कई वर्षों बाद अपने पुराने शहर लौटने का अवसर लेकर आई.
कारगिल युद्ध के समय पाकिस्तान के प्रधानमंत्री रहे नवाज शरीफ हिंदी फिल्मों के बड़े प्रशंसक थे. उन्हें खास तौर पर देव आनंद की फिल्में बेहद पसंद थीं. बताया जाता है कि उनके पास देव आनंद की फिल्मों की एक सीडी थी, जिसे वह बार-बार देखते थे. हालात ऐसे थे कि लगातार चलने की वजह से वह सीडी आखिरकार घिस गई. यह किस्सा इस बात का उदाहरण है कि सीमाओं के दोनों ओर भारतीय फिल्मों की लोकप्रियता कितनी गहरी रही है.
क्यों खास था यह मिशन?
'ऑपरेशन सफेद सागर' भारतीय वायुसेना के इतिहास के सबसे चुनौतीपूर्ण अभियानों में गिना जाता है. पहली बार इतनी अधिक ऊंचाई पर लड़ाकू विमानों से सटीक बमबारी की गई थी. बर्फ से ढके पहाड़, खराब मौसम और सीमित हवाई क्षेत्र के बावजूद भारतीय पायलटों ने सफलतापूर्वक मिशन पूरा किया. सैन्य विशेषज्ञों के अनुसार, इस अभियान ने कारगिल युद्ध में भारत की जीत की नींव मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई.
ऑपरेशन सफेद सागर इस OTT पर उपलब्ध
कारगिल युद्ध में भारतीय वायुसेना के योगदान पर बहुत कम फिल्में और सीरीज बनी हैं. इसी वजह से 'ऑपरेशन सफेद सागर' को खास माना जा रहा है. यह सीरीज उन पायलटों की बहादुरी, कठिन परिस्थितियों और देश के लिए किए गए उनके बलिदान को दर्शकों के सामने लाने की कोशिश करती है. इसमें युद्ध के दौरान लिए गए कठिन फैसलों और सैनिकों के जज्बे को भी दिखाया जाएगा। इस सीरीज को आप नेटफ्लिक्स पर देख सकते हैं.
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By आशा कुमारी
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झारखंड की रहने वाली आशा ने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन (IIMC), दिल्ली से इंग्लिश जर्नलिज्म में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है.
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आशा को कंटेंट राइटिंग में ढाई साल का अनुभव है. अपने करियर की शुरुआत उन्होंने ‘द पैम्फलेट’ (The Pamphlet) में न्यूज राइटर के तौर पर की थी. इसके बाद उन्होंने आउटलुक (Outlook) में लाइफस्टाइल कंटेंट राइटर के तौर पर काम किया. इसके साथ ही, आशा ने ईटीवी भारत (ETV Bharat) और हिंदुस्तान टाइम्स (Hindustan Times) जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में इंग्लिश कंटेंट राइटर के रूप में अपना योगदान दिया है.
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