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Delhi Crime 3 Review : इस बार रोमांच और शॉक वैल्यू है नदारद.. बेअसर रहा तीसरा सीजन

Updated at : 17 Nov 2025 6:06 AM (IST)
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वेब सीरीज दिल्ली क्राइम के तीसरे सीजन में क्या है खास और कहां हो गयी है चूक जानते हैं इस रिव्यु

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वेब सीरीज -दिल्ली क्राइम 3
निर्देशक -तनुज चोपड़ा
कलाकार -शेफाली शाह,रसिका दुग्गल,मीता वशिष्ठ,हुमा कुरैशी ,सयानी गुप्ता,राजेश तैलंग,अंशुमान पुष्कर और अन्य
प्लेटफॉर्म -नेटफ्लिक्स
रेटिंग -दो

delhi crime 3 review :बहुप्रतीक्षित और चर्चित वेब सीरीज में शुमार दिल्ली क्राइम का तीसरा सीजन दस्तक दे चुका है। इंटरनेशनल एमी अवार्ड को अपने नाम कर चुकी इस वेब सीरीज का तीसरा सीजन भी सच्ची घटना पर आधारित है.2012 के बेबी फलक केस पर है, जिसने दिल्ली को नहीं पूरे देश को हिला दिया था. यह सीरीज इस बार लेखन और उसके ट्रीटमेंट में उस बेंचमार्क को छू नहीं पायी है. जिसे इसके पहले सीजन ने स्थापित किया था. यह सीजन सबसे कमजोर रह गया है.यह कहना गलत ना होगा.

बेबी फलक केस की है कहानी

इस सीजन की कहानी की बात करें तो मालूम पड़ता है कि डीआईजी वर्तिका (शेफाली शाह )की पोस्टिंग दिल्ली से बदलकर नार्थ ईस्ट में हुई है.वह अपनी टीम के साथ एक चेक पोस्ट पर हथियारों से भरे ट्रक के इन्तजार में है.जिसे उसकी टिप मिली है. ट्रक मिलता तो है लेकिन उसमें हथियार नहीं बल्कि लड़कियां मिलती हैं. जिन्हें नौकरी दिलाने के नाम पर हरियाणा में बिकाऊ दुल्हन बनाकर तो दिल्ली से लेकर थाईलैंड तक जिस्मफरोशी के दलदल में धकेला जा रहा है.इस रैकेट से जुड़े तार वर्तिका को एक बार दिल्ली पहुंचा देते हैं।इंटर स्टेट केस ये बन चुका है. इधर दिल्ली के एम्स अस्पताल में दो साल की बच्ची नूर बुरी तरह से जख्मी हालत में पहुंची है. ज़िन्दगी और मौत से जूझ इस मासूम बच्ची का केस एसपी नीति सिंह (रसिका दुग्गल ) के पास है.वह इस केस के गुनाहगारों को ढूंढ रही है.वर्तिका नीति को बताती है कि बेबी नूर के मामले के लिए निधी को जिस राहुल (अंशुमान पुष्कर )की तलाश है.लड़कियों की तस्करी के मामले में उसे भी उसकी तलाश है. राहुल से कड़ी कल्याणी (मीता वशिष्ठ )की और जुड़ती है फिर बड़ी दीदी (हुमा कुरैशी )का नाम सामने आता है, जिसके लिए सभी काम कर रहे हैं.वर्तिका एक बार फिर अपनी टीम के साथ मिलकर इस केस से जुड़े गुनहगारों को पकड़ने में जुट जाती है. कौन है बड़ी दीदी. बेबी नूर से लेकर ट्रक में मिली लड़कियों की ज़िन्दगी से वह किस तरह से जुडी है.क्या बड़ी दीदी को उसके अंजाम तक वर्तिका और उसकी टीम पहुंचा पाएगी। यही आगे की कहानी है

सीरीज की खूबियां और खामियां

दिल्ली क्राइम का यह सीजन असल घटना पर आधारित है.जिसकी यादें एक बार फिर यह सीरीज ताजा कर गयी हैं. सीरीज की मेकिंग पर बात करें तो सीरीज असल घटना पर है लेकिन स्क्रीनप्ले और उसके ट्रीटमेंट में रोमांच और शॉक वैल्यू गायब है। इस सीरीज के पहले सीजन ने निराशा के साथ साथ गुस्से से भी देखने वालों को भर दिया था दूसरे सीजन ने भी बहुत हद तक उस जादू को बरक़रार रखने की कोशिश की थी,लेकिन इस बार वह जुड़ाव नहीं बन पाता है .कहानी आपके दिल को छूती है लेकिन कमजोर ट्रीटमेंट की वजह से झकझोरती नहीं है। नौकरी देकर गरीब तबके की लड़कियों को हरियाणा में बिकाऊ दुल्हन बनाना, दिल्ली से लेकर थाईलैंड तक जिस्मफरोशी के दलदल में फेंक देना ,भीख मांगने के लिए छोटे बच्चों की खरीद फरोख्त ये सब पहलू अब चौंकाते नहीं है क्योंकि इस तरह के कई एपिसोड्स क्राइम पेट्रोल और दूसरे क्राइम सीरीज और फिल्मों में दिखाए जा चुके हैं। यह सीरीज इन पहलुओं पर कुछ अलग नहीं दिखाती है, जो देखा या सुना ना हो. सीरीज कुछ सवालों के जवाब भी नहीं देती है. भाई जी का जिक्र हम लगातार सुनते रहते हैं, जिसको बड़ी दीदी को पैसे देने हैं। मगर ये कौन था। क्यों बड़ी दीदी को उसको पैसे देने है. छह एपिसोड की यह सीरीज इसका जवाब नहीं देती है.बड़ी दीदी का प्रेमी विजय जब राजेश तैलंग के किरदार पर रिवाल्वर तानता है. किरदार बड़ा बन जाता है. वर्तिका चतुर्वेदी उसके बारे में पता लगाने को भी कहती है लेकिन आगे के स्क्रीनप्ले में उसका जिक्र तक करना भूल जाती है. बड़ी दीदी की बैकग्राउंड स्टोरी पर भी काम नहीं किया गया है तो आयुष्मान पुष्कर के किरदार को अचानक से तीन एपिसोड के बाद गायब ही कर दिया गया है. इस बार सीरीज में जमकर सिनेमैटिक लिबर्टी भी ली गयी है.सीरीज की शुरुआत में एक चेक पोस्ट पर ट्रक में लड़कियां मिलती हैं लेकिन उसके बाद एक भी चेक पोस्ट सीरीज में नहीं आया.क्योंकि बड़ी दीदी बड़ी आसानी से ट्रक में भेड़ बकरियों की तरह लड़कियों को भरकर हरियाणा ,सूरत और मुंबई लेकर जा रही है. गोली से घायल विजय किसी कमर्शियल फिल्म के एक्टर की तरह बड़ी आसानी से कई घंटों की ट्रैवेलिंग सूरत से मुंबई कर रहा है. दूसरे पक्षों की बात करें तो सीरीज का संवाद स्क्रीनप्ले की तरह औसत हैं. बाकी के पहलू सीरीज के साथ न्याय करते हैं।

मीता वशिष्ठ की पावरफुल परफॉरमेंस

कलाकारों की एक्टिंग इस सीजन का प्लस पॉइंट इस बार भी रही है. मैडम सर यानी वर्तिका की भूमिका में एक बार फिर से अभिनेत्री शेफाली शाह पूरी तरह से रची बसी नजर आती हैं.रसिका दुग्गल ने भी अपने किरदार को पूरी शिद्दत के साथ निभाया है, तो राजेश तैलंग की भी तारीफ बनती है. हुमा कुरैशी इस सीजन खलनायिका की भूमिका में है. उनकी कोशिश अच्छी है लेकिन कमजोर लेखन की वजह से उनके किरदार में वह प्रभाव नहीं आ पाया है ,जो कहानी की जरुरत थी.मीता वशिष्ठ ने कम स्क्रीन टाइम में भी पावरफुल परफॉरमेंस दी है.वह याद रह जाती हैं.सयानी गुप्ता को करने को कुछ खास नहीं था.गोपाल दत्त,जया भट्टाचार्य,सिद्धार्थ भारद्वाज ,अंशुमान पुष्कर सहित बाकी के किरदारों ने भी अपनी -अपनी भूमिका के साथ बखूबी न्याय किया है.

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Urmila Kori

लेखक के बारे में

By Urmila Kori

I am an entertainment lifestyle journalist working for Prabhat Khabar for the last 14 years. Covering from live events to film press shows to taking interviews of celebrities and many more has been my forte. I am also doing a lot of feature-based stories on the industry on the basis of expert opinions from the insiders of the industry.

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