The Odyssey Movie Review :ग्रीक महाकाव्य को नए अर्थ में परिभाषित करती है नोलन की द ओडिसी

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द ओडिसी रिव्यू: नोलन की शानदार सिनेमाई दास्तान

क्रिस्टोफर नोलन की 'द ओडिसी' प्राचीन ग्रीक महाकाव्य को नए सिरे से परिभाषित करती है.कहानी के साथ साथ तकनीकी तौर पर भी यह फिल्म बेहद शानदार है. मैट डेमन और एनी हैथवे जैसे सितारों के साथ, यह फिल्म एक अविस्मरणीय सिनेमाई अनुभव प्रदान करती है.

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फ़िल्म - द ओडिसी

निर्माता- क्रिस्टोफर नोलन और इमा थॉमस

निर्देशक - क्रिस्टोफर नोलन

कलाकार - मैट डेमन, एनी हैथवे,टॉम हॉलैंड,रॉबर्ट पैटीनसन. झेंडेया और अन्य

प्लेटफार्म- सिनेमाघर

रेटिंग- चार

the odyssey movie review : क्रिस्टोफर नोलन सिनेमा में किवंदती का नाम है.जिनकी फिल्में अक्सर समय और यादों से खेलती हैं लेकिन वह साथ में समायिक भी होती हैं .इस बार वह प्राचीन ग्रीक महाकाव्य ओडिसी को नए अर्थ के साथ परिभाषित कर रहे हैं .जबरदस्त स्केल और माइंड बेंडिंग कहानी के साथ इस बार क्रिस्टोफर नोलन ने पर्दे कितनी मजबूत और सिनेमाई अनुभव वाली फ़िल्म साकार की है . इसे जानने के लिए पढ़े ये रिव्यू

ये है कहानी

कहानी की शुरुआत समंदर के तट पर पड़े विशालकाय ट्रोजन हॉर्स से होती है .उसके बाद कहानी १८ साल आगे बढ़ जाती है .ट्रोजन युद्ध लड़ने के लिए राजा ओडिसियस (मैट डेमन) के इथाका से निकले हुए अठारह साल बीत चुके हैं।उनकी पत्नी पेनेलोपे (ऐनी हैथवे) १८ सालों से अपने पति के इंतज़ार में हैं.सभी मानते हैं कि वह मर चुका है लेकिन पेनेलोपे को उसका इंतज़ार है लेकिन यह इंतज़ार अब बहुत मुश्किल हो गया है .उसका महल षड्यंत्रकारी लोगों से भर गया है.एंटिनस (रॉबर्ट पैटिनसन) उनका मुखिया है, जो ना सिर्फ़ पेनेलोपे और ओड़िसी के बेटे टेलीमैकस (टॉम हॉलैंड) की हत्या करना चाहता है बल्कि पेनेलोपे से शादी करके इथाका के सिंहासन पर कब्ज़ा करना चाहता है।क्या ओडिसियस समय पर पहुंचकर षड्यंत्रकारियों को रोक पायेगा .क्या वजह रही जो १८ सालों से ओडिसियस अपने घर वापस नहीं आ पाया .देवताओं का क्रोध, डरावने राक्षस और अलौकिक शक्तियाँ यह सब भी कहानी का हिस्सा हैं।

कहानी और स्क्रीनप्ले इंसानियत की अहम सीख लिए है

होमर के प्राचीन ग्रीक महाकाव्य ट्रोजन वॉर पर यह फ़िल्म आधारित है.ब्रैड पिट अभिनीत 2004 में रिलीज हुई फिल्म ट्रॉय इसी विषय पर आधारित थी लेकिन क्रिस्टोफर की यह कहानी युद्ध से ज्यादा उसके बाद की स्थिति और ओडियसी के अपराध बोध की यात्रा को दिखाती है।अपराध बोध क्रिस्टोफर नोलन के फिल्मों के किरदारों अक्सर जुड़ा हुआ रहा है। 'मेमेंटो' 'इनसोम्निया' 'द डार्क नाइट' ट्रिलॉजी से हालिया रिलीज हुई 'द ओडिसी' भी इसे बखूबी दिखाती है .इस बात की गहराई में जाती है कि वॉर में जीत का असल मतलब तब क्या होता है.जब उसकी कीमत आपकी इंसानियत होती है। नोलन की यह फ़िल्म प्राचीन ग्रीक महाकाव्य पर आधारित होने के बावजूद मौजूदा दौर में समायिक है . यह फ़िल्म ओडिसियस की जर्नी के साथ इंसानियत की अहम सीख दे जाती है .नोलन ने फ़िल्म की कहानी और स्क्रीनप्ले को पर्दे पर कुछ इस क़दर पेश किया है कि अगर आपने होमर का महाकाव्य ओडिसी पढ़ा भी नहीं होगा तो भी फ़िल्म को समझने में दिक्कत नहीं होगी .

कुछ कमी भी है लेकिन एक्सपीरियंस फिर भी यादगार

ख़ामियों की बात करें तो फ़िल्म में कुछ ख़ामियाँ भी रह गई हैं. ख़ासकर टॉम हालैंड के किरदार की लिखावट कमज़ोर रह गई है.जिस तरह से उस किरदार की जर्नी होनी चाहिए .वैसा स्क्रीनप्ले में नहीं आ पाया है .हिंदी दर्शक होने के नाते पिता पुत्र के बीच भावनात्मक रिश्ता भी कमजोर सा लगता है .फ़िल्म शुरुआत में नैरेटिव बुनने में थोड़ा वक़्त लेती है.लेकिन इसके बावजूद यह नोलन का जादू ही है. जो दर्शक के तौर पर यह ख़ामियाँ मायने नहीं रखती है .

तकनीकी तौर पर शानदार फ़िल्म

यह फ़िल्म तकनीकी रूप से बेहद शानदार है. आईमैक्स कैमरा ना सिर्फ बड़े एक्शन दृश्यों बल्कि समुंदर और पहाड़ों के प्राकृतिक नज़ारों को भी बेहद प्रभावशाली बनाया गया है.विशालकाय राक्षस,योद्धा और जादूगरनी का ट्रैक शानदार सिनेमेटिक संसार रचते हैं .एक्टर्स की आंखों में झांकते कैमरे की रोशनी उनके किरदार के प्रभाव को दर्शाती है . यह कहना ग़लत ना होगा .फ़िल्म के एक दृश्य में सभी लोग अपने कानों को बंद कर लेते हैं. उस दृश्य में पर्दे पर भी साउंड को म्यूट कर दिया हुआ है. जो पर्दे पर अलग ही प्रभाव को बनाता है .बैकग्राउंड म्यूजिक शानदार है

मैट डैमन ने किरदार में जान डाल दी है

मैट डैमन ने ओडियसिस के किरदार में जान डाल दी है.वह सिर्फ़ एक वीर योद्धा के तौर पर ही पर्दे पर अपनी छाप नहीं छोड़ते हैं बल्कि वह किरदार से जुड़े गिल्ट,द्वंद ,बैचेनी और हताशा को भी हर फ्रेम में जीते हैं.एनी हैथवे कम स्क्रीन टाइम में भी अपनी छाप छोड़ जाती है .टॉम हॉलैंड और रॉबर्ट पेटिसन ने भी अपने किरदार को बखूबी जिया है .जेंडेया का किरदार ओडीसियस के गिल्ट का चेहरा बखूबी बनकर उभरी हैं . बाक़ी के किरदारों ने भी अपनी भूमिकाओं के साथ यादगार परफॉरमेंस दी है .


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Urmila Kori

लेखक के बारे में

By Urmila Kori

I am an entertainment lifestyle journalist working for Prabhat Khabar for the last 14 years. Covering from live events to film press shows to taking interviews of celebrities and many more has been my forte. I am also doing a lot of feature-based stories on the industry on the basis of expert opinions from the insiders of the industry.

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