Raju Srivastava Died: राजू श्रीवास्तव कभी महज 50 रुपये में करते थे शो, जानें गजोधर भैया का अब तक का सफर

Published by : Ashish Lata Updated At : 21 Sep 2022 11:54 AM

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राजू श्रीवास्तव का 52 साल की उम्र में निधन हो गया है. कॉमेडियन 42 दिनों से अस्पताल में भर्ती थे. आज हम आपको उनके जीवन के संघर्ष के बारे में बताएंगे. कभी राजू श्रीवास्तव ने केवल 50 रुपये में शो किया करते थे. राजू श्रीवास्तव ने बताया था कि वह केवल जॉनी लिवर को देखकर खुद को संभालते थे.

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कॉमेडियन राजू श्रीवास्तव का निधन हो गया है. पिछले कुछ महीनों से वो अस्पताल में भर्ती थे. राजू को जिम में एक्सरसाइज के दौरान दिल का दौरा पड़ा था. कॉमेडियन के जल्द ठीक होने की प्रार्थना उनके चाहने वाले कर रहे थे. हालांकि उन्हें बचाया नहीं जा सका. उनके परिवार वालों पर दुख का पहाड़ टूट गया है. राजू श्रीवास्तव कॉमेडी के बेताज बादशाह रहे हैं. देश में स्टैंड-अप कॉमेडी का जनक राजू श्रीवास्तव को माना जाता है. आइये उनके संघर्ष की कहानी पर एक नजर डालें.

ऑटो ड्राइवर थे राजू श्रीवास्तव

राजू श्रीवास्तव का जन्म 25 दिसंबर 1963 को कानपूर में हुआ था. माया नगरी मुंबई में राजू श्रीवास्तव आये तो थे अपने सपनों को साकार करने के लिए. लेकिन उन्हें शुरुआती दिनों काफी संघर्ष करना पड़ा था. उनके पास पैसों की कमी हो गयी और उन्हें शुरुआती दिनों में अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए ऑटो चलाना पड़ा. हालांकि ऑटो चलाने के बाद भी उन्होंने अपना पहला प्यार कॉमेडी को जारी रखा. ऑटो चलाने के दौरान उनकी किस्मत ने अचानक करवट ली और उन्हें कॉमेडी शो से बुलावा आया. वहीं से राजू श्रीवास्तव की जिंदगी बदल गयी. उन्होंने वापस पीछे मुड़कर नहीं देखा. डीडी नेशनल चैनल में उन्हें शो करने का मौका मिला. फिर उन्होंने ग्रेट इंडियन लॉफ्टर चैलेंज पर हिस्सा लिया और उपविजेता बने. यहीं से गजोधर भैया का भी जन्म हुआ.

एक शो के मिलते थे केवल 50 रुपये

राजू श्रीवास्तव ने एक साक्षात्कार में कहा था कि शुरुआती दिनों में उन्होंने मुंबई में काफी संघर्ष किया था. एक शो करने के उन्हें केवल 50 रुपये मिलते थे. उस दौर में कॉमिडियन की ज्यादा पूछ नहीं होती थी. राजू श्रीवास्तव ने बताया था कि वह केवल जॉनी लिवर को देखकर खुद को संभालते थे. एक दिन उनकी जिंदगी बदलेगी. उन्होंने साक्षात्कार में बताया था कि एक शो करने के लिए उन्हें केवल 50 रुपये मिलते थे.

कई बॉलीवुड फिल्मों में नजर आये राजू श्रीवास्तव

राजू श्रीवास्तव ने कई हिंदी फिल्मों में भी काम किया. उन्होंने सबसे पहले 1988 में तेजाब में काम किया. उसके बाद 1981 में मैंने प्यार किया. 1993 में बाजीगर और मिस्टर आजाद में काम किया. उसके बाद 1994 में अभय, 2001 में आमदनी अठन्नी खर्चा रुपइया, 2002 में वाह! तेरा क्या कहना, 2003 में मैं प्रेम की दीवानी हूं. 2006 में विद्यार्थी: द पावर ऑफ स्टूडेंट्स, 2007 में बिग ब्रदर और बॉम्बे टू गोवा, 2010 में भावनाओं को समझो और बारूद: द फायर – अ लव स्टोरी’ और आखिरी फिल्म 2017 में टॉयलेट: एक प्रेम कथा में नजर आये.

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राजनीति में भी राजू श्रीवास्तव ने कदम रखा

राजू श्रीवास्तव ने अभिनय के साथ-साथ राजनीति में भी कदम रखा. 2014 लोकसभा चुनाव में उन्हें समाजवादी ने कानपुर सीट से उतारा. लेकिन उन्होंने इसलिए टिकट वापस कर दिया क्योंकि उन्हें पार्टी के स्थानीय इकाइयों से पर्याप्त समर्थन नहीं मिल रहा है. हालांकि 19 मार्च 2014 को वह भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गये. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें स्वच्छ भारत अभियान का हिस्सा बनाया.

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Ashish Lata

लेखक के बारे में

By Ashish Lata

आशीष लता डिजिटल मीडिया की अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभात खबर में सीनियर कंटेंट राइटर के साथ एंटरटेनमेंट हेड के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया इंडस्ट्री में करीब 7 साल का अनुभव रखने वाली आशीष ने एंटरटेनमेंट से लेकर देश-दुनिया और विभिन्न राज्यों की खबरों पर गहराई से काम किया है. बिहार, मध्यप्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों से जुड़ी खबरों के कंटेंट प्रोडक्शन में भी उनकी मजबूत पकड़ रही है. वह खबरों को आसान, रोचक और पाठकों की रुचि के अनुसार पेश करने के लिए जानी जाती हैं. एंटरटेनमेंट जर्नलिज्म में आशीष की खास दिलचस्पी सिनेमा और सितारों की दुनिया से जुड़ी खबरों में रही है. वह बॉलीवुड और टीवी इंडस्ट्री की थ्रोबैक स्टोरीज, BTS अपडेट्स, सेलेब्रिटी गॉसिप, बॉक्स ऑफिस रिपोर्ट, टीवी शोज, वेब सीरीज और स्टार इंटरव्यू जैसे विषयों पर लगातार लिखती रही हैं. इसके अलावा स्पेशल और प्रीमियम न्यूज कंटेंट तैयार करने में भी उनकी खास विशेषज्ञता मानी जाती है. उनकी राइटिंग स्टाइल में फैक्ट्स, एंटरटेनमेंट वैल्यू और रीडर्स फर्स्ट अप्रोच का अच्छा संतुलन देखने को मिलता है. आशीष लता ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्लस न्यूज से की थी. यहां उन्होंने बिहार में एंकर और रिपोर्टर के रूप में काम करते हुए कई महत्वपूर्ण ग्राउंड रिपोर्ट्स कीं. इस दौरान उन्होंने अशोक चौधरी और नगर निगम अध्यक्ष जैसे कई प्रमुख नेताओं के इंटरव्यू भी किए. शुरुआती दौर में रिपोर्टिंग और फील्ड जर्नलिज्म के अनुभव ने उनकी लेखन शैली और न्यूज प्रेजेंटेशन को और मजबूत बनाया. इसके बाद आशीष ने एबीपी न्यूज और ईटीवी भारत जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इन संस्थानों में रहते हुए उन्होंने न्यूज कवरेज, डिजिटल कंटेंट और एंटरटेनमेंट रिपोर्टिंग के कई अलग-अलग फॉर्मेट्स पर काम किया. लगातार बदलते डिजिटल मीडिया ट्रेंड्स को समझते हुए उन्होंने अपने कंटेंट को हमेशा ऑडियंस फ्रेंडली और SEO ऑप्टिमाइज्ड बनाए रखा. पटना में जन्मी आशीष लता की शुरुआती पढ़ाई पटना सेंट्रल स्कूल, सीबीएसी से हुई. इसके बाद उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ मास कम्युनिकेशन की डिग्री हासिल की. आगे की पढ़ाई के लिए उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास्टर्स ऑफ इलेक्ट्रॉनिक मीडिया किया. उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि और मीडिया अनुभव उन्हें हिंदी पत्रकारिता के उन मूल सिद्धांतों की मजबूत समझ प्रदान करते हैं, जो जर्नलिज्म के बेसिक प्रिंसिपल 5Ws+1H यानी पर आधारित न्यूज राइटिंग के लिए बेहद जरूरी माने जाते हैं.

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