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Qubool Hai 2.0 Review : टाइमपास है जोया असद की कुबूल है 2.0, यहां पढ़ें रिव्यू

By उर्मिला कोरी
Updated Date
Qubool Hai 2.0 Review
Qubool Hai 2.0 Review
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Qubool Hai 2.0 Review

वेब सीरीज : कुबूल है 2.0

निर्माता : अभिज्ञान मृणाल झा

निर्देशक : मृणाल झा

कलाकार : करण सिंह ग्रोवर, सुरभि ज्योति, आरिफ जकारिया, सौरभ राज जैन, मंदिरा बेदी,शालिनी कपूर,महालक्ष्मी अय्यर और अन्य

रेटिंग : ढाई

जमाई राजा के बाद ज़ी फाइव अपने एक और बेहद कामयाब शो कुबूल है का वेब सीरीज वर्जन कुबूल है 2.0 Qubool Hai 2.0 Review लेकर आया है. असद और जोया टीवी की लोकप्रिय जोड़ियों में से एक रही हैं .एक बार फिर वह इस सीरीज के ज़रिए एक साथ है लेकिन उनकी दुनिया और कहानी अलग है. कहानी की शुरुआत सर्बिया से होती है जहां पर असद( करण सिंह ग्रोवर) अंतराष्ट्रीय शूटिंग चैंपियनशिप के लिए गया है और ज़ोया ( सुरभि) का निकाह अपने बचपन के दोस्त सलमान से हो रहा है.

जोया शादी छोड़कर यहां भी भाग जाती है और असद से टकराती है. सलमान के भेजे गए गुंडे के साथ असद जोया का चूहे बिल्ली का खेल शुरू हो जाता है और कहानी कुछ एपिसोड्स बाद पाकिस्तान जा पहुँचती हैं. ज़ोया के पिता (आरिफ जकारिया) पाकिस्तान के रक्षा मंत्री हैं. पाकिस्तान है तो भारत के लिए खतरा होगा ही.

परमाणु बम का एक कोड है जोया के पिता के पास है और यही कोड़ के लिए असद जोया का साथ दे रहा था. क्या है कोड का पूरा मामला और जोया के मरे हुए भाई हसन के जिंदा होने का वो कहानी सीरीज के अगले सीजन में आएगी. शुरुआत का पहला एपिसोड एंगेजिंग हैं लेकिन कहानी का जो सस्पेंस और थ्रिलर है वो आपको शुरुआत के दूसरे एपिसोड में ही पता चल जाता है.

कुलमिलाकर वेब सीरीज के जॉनर में भी मामला टेलीविज़न के डेली सोप वाला रह गया है. फ़िल्म में दो मुल्कों की सुरक्षा एजेंसियों की बात हो रही है लेकिन सीरीज कुछ भी सशक्त ढंग से नहीं रख पायी है. एडिटिंग पर थोड़ा काम करने की ज़रूरत थी.10 एपिसोड की इस कहानी को 6 एपिसोड में समेटा जा सकता था जब अगले सीजन तक कहानी जाने वाली ही थी.

अभिनय की बात करें तो करण सिंह ग्रोवर अपने किरदार के स्वैग में नज़र आ रहे हैं लेकिन 10 एपिसोड के उनके किरदार के चेहरे पर एक सा ही एक्सप्रेशन है, जो अखरता है. सुरभि ज्योति सीरीज में खूबसूरत दिखने के साथ साथ जोया के चिर परिचित अंदाज़ में बखूबी नज़र आईं हैं. असद और जोया की केमिस्ट्री एकबार फिर खास बन गयी है.

आरिफ जकारिया औसत रहे हैं. सौरभ राज जैन के लिए सीरीज के आखिरी एपिसोड में नज़र आए हैं. मंदिरा बेदी का किरदार भारत की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालने वाले अहम शख्स की है लेकिन जिस तरह से किरदार को सीरीज में दिखाया गया है कि वह सशक्त कम मजाकिया ज़्यादा लगता है. खासकर जहां वह काम कर रही हैं, उसका पूरा सेटअप और लुक.

शालिनी कपूर और महालक्ष्मी जैसे चेहरे कुबूल है सीरियल में भी थे उन्हें सीरीज में देखना अच्छा अनुभव रहा हालांकि स्क्रिप्ट में उनके लिए कुछ खास नहीं था. बाकी के किरदार ठीक ठाक रहे हैं. सर्बिया की खूबसूरत लोकेशन्स को कहानी में समेटा गया है. सीरीज का म्यूजिक अच्छा है . संवाद औसत हैं. कुलमिलाकर अगर आप असद और जोया के फैन रहे हैं तो यह सीरीज आप एक बार देख सकते हैं.

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