Nagpuri Song : भाषा आउर संस्कृति हय तो हम ही, नागपुरी संगीत में फैलती अश्लीलता पर बहस तेज

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Debate on obscenity in Nagpuri music

नंद लाल नायक (बाएं) लाल विजय शाहदेव (दाएं)

Nagpuri Song : नागपुरी की असली पहचान को बचाना होगा. आज के यूट्यूब युग में जहां कोई भी नौसिखिया खुद को म्यूजिक डायरेक्टर कहने लगता है. यही नहीं सुर-ताल से अनजान गायक तथाकथित “संगीत” के नाम पर केवल अश्लीलता परोसकर चैनल चलाने लगते हैं. नागपुरी संगीत में फैलती अश्लीलता पर पढ़ें प्रबुद्ध लोगों ने क्या कहा?

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Nagpuri Song : नागपुरी संगीत में अश्लीलता का मामला लगातार गरमाता जा रहा है और इस पर सोशल मीडिया पर बड़ी बहस छिड़ी हुई है. लोगों का कहना है कि झारखंड की पहचान केवल उसकी खनिज संपदा, जंगलों और जनजातीय जीवन से नहीं है, बल्कि उसकी असली आत्मा उसके गीत-संगीत में बसती है. नागपुरी संगीत इस क्षेत्र की संस्कृति की धड़कन है, जो पीढ़ी दर पीढ़ी लोकजीवन से जुड़ा रहा है. खेतों और त्योहारों से लेकर श्रमगीतों और मंगलगीतों तक, हर अवसर पर इस संगीत ने जीवन में रंग भरे हैं. लेकिन अब यह संस्कृति अपनी पहचान और अस्मिता के संकट से जूझ रही है.

भोजपुरी की बीमारी अब नागपुरी संगीत को भी ले रही है गिरफ्त में : लाल विजय शाहदेव

नागपुरी संगीत में अश्लीलता को लेकर प्रभात खबर से फिल्म निर्माता लाल विजय शाहदेव ने बात की. उन्होंने मामले को लेकर चिंता व्यक्त की. शाहदेव ने कहा कि आज अगर यूट्यूब पर ‘नागपुरी गाना’ सर्च करें तो असली नागपुरी धुन कम और भोजपुरी की सस्ती नकल ज्यादा दिखाई देती है. यह चिंता का विषय है. भोजपुरी संगीत कभी अपनी मिठास और लोकधुनों के लिए मशहूर था, लेकिन धीरे-धीरे वह अश्लीलता का पर्याय बन गया. यही बीमारी अब नागपुरी संगीत को भी अपनी गिरफ्त में ले रही है. सवाल यह है कि क्या हम चुपचाप बैठे रहेंगे और अपनी सांस्कृतिक धरोहर को इस दलदल में डूबता देखेंगे?

शाहदेव ने कहा कि नागपुरी संगीत की खूबसूरती उसकी सरलता और गहराई में है. लेकिन आज एक बड़ी संख्या केवल ‘व्यूज’ और ‘लाइक’ की दौड़ में फंस गई है. यही कारण है कि सस्ते और बेसुरे गीत भी लाखों-करोड़ों लोगों तक पहुंच जाते हैं. इस स्थिति के लिए केवल कलाकार ही दोषी नहीं हैं, इन गानों को सुनने वाले भी उतने ही जिम्मेदार हैं. जब समाज नकली को असली मान ले और गंदगी को सराहना देने लगे, तो असली कला हाशिये पर चली जाती है.

धरोहर को सजाने संवारने की जरूरत : नंदलाल नायक

“मायं माटी भाषा आउर संस्कृति हय तो हम ही नहीं तो कोनवे नहीं…यह कहना नंदलाल नायक का है. जो जनरल काउंसिल सदस्य (झारखण्ड राज्य), महासभा, संगीत नाटक अकादमी, नई दिल्ली, भारत सरकार के पद पर हैं. प्रभात खबर से बात करते हुए उन्होंने कहा,’’यदि आप भाषा और संस्कृति को उसकी गरिमा प्रदान करेंगे तो भाषा आपको अपना ‘गौरव’ प्रदान करेगी. आप भाषा को सम्मान दें. पॉपुलारिटी लेने के लिये किसी भी हद तक ना गिरें.’’ आगे नायक ने कहा कि क्षेत्रीय संगीत… जैसे लोकगीत या पारंपरिक धुनें, समाज की गहराईयों से जुड़ी होती हैं. ये किसी क्षेत्र की आत्मा को अभिव्यक्त करते हैं हमारे पूर्वजों के इस धरोहर को सजाने संवारने की जरूरत है. युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों के साथ जुड़ने की जरूरत है. जैसे-जैसे नई पीढ़ी हमारी विरासत को जानेगी, हमारी संस्कृति, मूल्य और परंपराएं न केवल संरक्षित रहेंगी बल्कि विकसित भी होंगी.

अश्लीलता फैलाने वालों पर होनी चाहिए कानूनी कार्रवाई : नंदलाल नायक

नंदलाल नायक ने कहा कि संस्कृति कोई पायदान नहीं है जिसके ऊपर पैर रखकर अपने लिए नाम और दाम कमाया जाए. हमारे युवा पीढ़ी के कुछ लोग किसी भी हद पर गिर कर ऐसा कर रहे हैं. वे सांस्कृतिक अश्लीलता को सार्वजनिक मंच पर नागपुरी भाषा में प्रस्तुत कर सस्ती लोकप्रियता हासिल कर रहे हैं. ऐसे लोगों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए. उन्होंने कहा कि अभी हमारी लीगल टीम कानूनी कार्रवाई की संभावना की जांच कर रही है.

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अमिताभ कुमार

लेखक के बारे में

By अमिताभ कुमार

डिजिटल जर्नलिज्म में 14 वर्षों से अधिक का अनुभव है. करियर की शुरुआत Prabhatkhabar.com से की. राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों पर अच्छी पकड़ है. राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर गहन लेखन का अनुभव रहा है. तथ्यपरक रिपोर्टिंग और विश्लेषणात्मक लेखन में विशेष रुचि है. ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग खबरों पर लगातार फोकस रहता है.

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