फिल्म ‘जोरम’ में मनोज बाजपेयी संग नजर आए झारखंड के ये कलाकार, अपनी अदाकारी से जीता सबका दिल

मनोज बाजपेयी की फिल्म जोरम में झारखंड के कई कलाकार नजर आए है. फिल्म हाल ही में रिलीज हुई है और समीक्षकों से इसे अच्छा रिव्यू मिला है. फिल्म मेंअनिमेष कुमार और अमलेश कुमार भी है.
‘जोरम’ फिल्म झारखंड के लिए बहुत खास है, क्योंकि इस फिल्म की शूटिंग ज्यादातर झारखंड में हुई है. ‘जोरम’ एक थ्रिलर फिल्म है. देवाशीष मखीजा लिखित और निर्देशित इस फिल्म में मनोज बाजपेयी, तनिष्ठा चटर्जी और स्मिता तांबे मुख्य किरदार में हैं. ‘जोरम’ को 8 दिसंबर 2023 को रिलीज किया गया, वहीं, इस फिल्म को झारखंड के गुमला क्षेत्र में फिल्माया गया है. इसमें झारखंड के कई कलाकार अपनी एक्टिंग का जलवा बिखेरते नजर आए है. हाल ही में इस फिल्म को पर्दे पर उतारा गया है और इस फिल्म को अच्छा रिस्पॉन्स मिला है.
मनोज बाजपेयी स्टारर फिल्म ‘जोरम’ में मनोज बाजपेयी के साथ स्क्रीन शेयर करते हुए कई कलाकार नजर आए. जेएफटीए से अनिमेष कुमार और अमलेश कुमार अहम भूमिका में है. साथ ही पंकज सिन्हा, अशोक गोप जैसे कई कलाकार स्क्रीन शेयर करते नजर आए. इस फिल्म को अभी-अभी पर्दे पर उतारा गया है और इस फिल्म ने करीब 1.20 करोड़ रुपये का नेट कलेक्शन किया है. फिल्म में मनोज के काम की भी बड़ी तारीफ हो रही है. ऐसे में संभव है कि वीकेंड में रविवार को इस फिल्म की कमाई में उछाल देखने को मिले. हालांकि, ‘एनिमल’ या ‘सैम बहादुर’ के कारण यह फिल्म थोड़ी सुस्त पड़ गई है. इस फिल्म को पर्दे के बाद अब ओटीटी के लिए शूट किया जा रहा है, बताया जा रहा है की जल्द ही इसे ओटीटी पर रिलीज भी किया जाएगा.
जोरम की कहानी झारखंड के मूल आदिवासी दसरू (मनोज बाजपेयी) और उसकी पत्नी वानो ( तनिष्ठा चटर्जी) की है. दोनों किसी जमाने में खुशी से रहते थे, अपनी भाषा में प्यार के गीत गाते थे, मगर फिर कुछ ऐसा हो जाता है कि इन दोनों को अपने गांव से शहर मुंबई में आना पड़ता है. दुधमुंही बच्ची को अपनी बीवी की साड़ी से पीठ पर बांधे दसरू पांच साल बाद मुंबई से वापस झारखंड लौटता है. बच्ची बोल नहीं सकती. लेकिन, दसरू उससे बात करता नजर आता है. बातें भी क्या? उन हरे हरे पेड़ों की जिनकी छांव में ठीक झूले के सामने बैठ वह अपनी बीवी संग महुआ और पलाश के फूलों की बातें करते झुमरू गीत गाता था. उन नदियों की जिनमें उसकी पत्नी की बड़ी तमन्ना थी डुबकियां लगाने की. लेकिन, बस पांच साल में न हरे पेड़ रहे और न ही वह नदी. नदी न दिखने के अपने सवालों का दसरू खुद ही उत्तर भी देता है, बांध बनाकर गुमा दिए होंगे कहीं यहीं. कहानी की आधार विकास पर निर्भर है. पर्दे पर इस विकास की असल तस्वीर दिखाई गई है और, इस आईने का नाम है फिल्म ‘जोरम’.
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मनोज बाजपेयी और देवाशीष इस फिल्म को लेकर दुनिया के तमाम फिल्म फेस्टिवल से तारीफ बटोर लाए हैं. मामी जैसे फिल्म फेस्टिवल में इस फिल्म का प्रीमियर हो चुका है. सिनेमाघरों में फिल्म को बीते शुक्रवार को रिलीज किया गया. जी स्टूडियोज ने फिल्म के बारे में दूर दराज के दर्शकों को देखने के लिए कोई खास प्रचार नहीं किया है. ‘जोरम’ जैसी फिल्में देखने तक दर्शक अक्सर इसलिए भी नहीं पहुंच पाते हैं क्योंकि ऐसी फिल्मों के तमाम दर्शकों की भाषा अंग्रेजी नहीं है और फिल्म बनाने वालों की नजर में दर्शक की तारीफ के आगे उनकी तारीफ की कोई अहमियत भी नहीं हैं.
मनोज बाजपेयी किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं. उन्होंने हिंदी सिनेमा में काम के अलावा तेलुगु और तमिल भाषा की फिल्में भी की हैं. ज्यादातर हिंदी सिनेमा या बॉलीवुड के बेहतरीन अभिनेताओं में से एक माने जाने वाले, वह तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार, छह फिल्म फेयर पुरस्कार और दो एशिया प्रशांत स्क्रीन पुरस्कार के प्राप्तकर्ता हैं. 2019 में, कला में उनके योगदान के लिए उन्हें भारत के चौथे सबसे बड़े नागरिक सम्मान, पद्म श्री से सम्मानित किया गया. मनोज बाजपेयी की सरदार खान वाली फिल्म ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ को लोगों ने बहुत प्यार दिया है. सरदार खान अब तक ‘द फैमिली मैन’, गुलमोहर, ‘100 डायल करें’, ‘सोनचिरैया’ जैसी कई हिट फिल्मों से सबका दिल जीत चुके हैं.
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By दिव्या केशरी
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शिक्षा और पत्रकारिता की शुरुआत
दिव्या केशरी ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से एडवरटाइजिंग एंड पब्लिक रिलेशंस में मास्टर्स की डिग्री हासिल की है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत ईटीवी भारत से की, जहां उन्हें अलग-अलग बीट्स पर काम करने का मौका मिला. इस दौरान उन्होंने कई स्पेशल स्टोरी और न्यूज पैकेज तैयार किए. झारखंड से जुड़ी कई अहम खबरों पर काम करते हुए उन्होंने रिसर्च और आसान भाषा में खबर लिखने की अपनी क्षमता को और मजबूत किया.
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