सोशल मीडिया में कई उल्लू के पट्ठे हैं - शाहरुख खान

By Prabhat Khabar Digital Desk
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बॉलीवुड के किंग खान शाहरुख़ रईस को लेकर सुर्खियों में हैं. वह अपनी इस फिल्म को खास बताते हैं.एक अरसे बाद वह ग्रे शेड भूमिका में हैं. उनकी यह फिल्म कमर्शियल से ज़्यादा रीयलिस्टिक अप्रोच लिए है. उनकी इस फिल्म से जुड़े विवाद और कैरियर पर उर्मिला कोरी से हुई बातचीत



फिल्म रईस में आप ग्रे किरदार निभा रहे हैं क्या आपको लगता नहीं कि आप इससे बुराई को और ज़्यादा महिमामंडित करते हैं

ऐसा बोलते हैं लोग.कई फिल्में बहुत अच्छी होती है जिस में एक मैसेज होता है दंगल,स्वदेश और चक दे वैसी ही फिल्में थी लेकिन हर फिल्म वैसी नहीं हो सकती है. मेरा मानना है कि फिल्म मेकिंग स्टोरी टेलिंग है।मैं आप से पूछता हूँ कि जब आप कोई किताब पढ़ती हैं तो क्या आप उसमें अंडरवर्ल्ड की कहानी नहीं पढ़ती हैं या आप या आपकी कोशिश होती है कि आप किसी बुरे किस्से को सुने ही ना लेकिन आप खुद जर्नलिस्ट हैं. आपकी कोशिश रहती होगी कि हर तरह की खबर पाठकों तक पहुँचे वैसे ही मेरी भी कोशिश होती है. सिनेमा वही दिखाता है. जो दुनिया में हो रहा है. हम इस बात से इंकार तो नहीं कर सकते हैं कि दुनिया में बुरे तत्व है ही नहीं. मुझे पता है सोशल मीडिया में पर इस तरह की बातों की खूब चर्चा होती है. अब ऐसा तो नहीं मेरी फिल्म बाज़ीगर देखकर लोग लड़कियों को छत से फेंकने लगे या मैंने ऐसा करने को लोगों को कहा. फिल्म की शुरुआत में ही यह बात लिखित आती है कि वह फिक्शनल कैरक्टर है. हम क्राइम को ग्लोरीफाई नहीं करते हैं.

मेरे कई दोस्त मुझे ये सलाह दे चुके है कि लोग मुझे बहुत प्यार करते हैं इसलिए मुझे अच्छे रोल करने चाहिए लेकिन मुझे लगता है कि लोग मुझे इसलिए प्यार करते हैं कि मैंने अलग रोल किये हैं. दिल तो पागल है दिलवाले दुल्हनिया किया है तो साथ साथ डर बाज़ीगर और अंजाम भी किया है. स्टोरीटेलिंग में इतनी तो छूट मिलनी चाहिए. हर चीज़ में गलत सही नहीं ढूंढना चाहिए और सबसे महत्वपूर्ण बात है कोई अच्छा है यह आप किस तरह से दिखाओगे या बताओगे. आप बुराई दिखाओगे तभी तो आप अच्छाई को बता पाएंगे. वैसे यह एक फिक्शनल किरदार है साथ ही यह जो भी करता है गलत या सही उसकी जिम्मेदारी वह लेना जानता है. जिस वजह से कहीं न कहीं यह प्रोटैगनिस्ट की खूबियां भी उस में है


रईस की आपकी क्या परिभाषा है और आपकी ज़िन्दगी में रईस कौन है

मैं सबसे पहले बता देना चाहता हूँ कि रईस का मतलब अमीर नहीं होता है. उर्दू में इसका मतलब सबको साथ लेकर चलने वाला होता है. चूँकि मुझे उर्दू की जानकारी है इसलिए मैं ये बात बता सकता हूँ. फ़क़ीर भी रईस हो सकता है और अमीर आदमी भी रईस नहीं हो सकता है. कई अमीर आदमी छुटभैये होते हैं।थोड़े थोड़े पैसों के लिए वह सोचते हैं .रईसी असल में दिल की फीलिंग है. दिलवाले भी आप रईस का मतलब समझ सकते हैं. मुझे लगता है माता पिता रईस की परिभाषा में पूरी तरह से खरे उतरते हैं क्योंकि वह हमेशा कुछ देना चाहते हैं


आप इस शीर्षक से कितने करीब खुद को पाते हैं


मैं अपनी क्या तारीफ करूँ लेकिन हाँ मुझ में भी देनेवाला नेचर है. मुझे छुटपन वैसे भी पसंद नहीं है.ये लो वो कर लो.ये मेरे लिए होना चाहिए. इतना बड़ा स्टार हूँ अगर मांग कर लिया तो क्या लिया वैसे मैं अपने दोस्तों से अक्सर ये बात कहता हूँ कि ज़िन्दगी ने मुझे इतना कुछ दिया है अगर मैं किसी भी तरह इसे रिटर्न कर पाता हूँ तो मुझे ख़ुशी मिलेगी. ज़िन्दगी को थैक्स कहने का इससे बेहतर कोई और जरिया नहीं हो सकता है


फिल्म के संवाद काफी पॉपुलर हो रहे हैं रियल लाइफ में में आपकी अम्मी की बात जो आपको याद है

हाँ वो कहती थी कि खूब मेहनत करो. अपने काम की इज़्ज़त करो।वह ख़र्चे कम करने में नहीं बल्कि कमाई बढ़ाने को कहती थी. उनका कहना था कि खर्चें कम करने में भी उतना ही समय जायेगा जितना कमाई बढ़ाने में इसलिए कमाई बढ़ाओ. मैं फिल्म मेकिंग इसी अंदाज़ में करता हूँ. बड़ी बड़ी फिल्में बनाना मुझे पसंद है. मेरी अम्मी ने बहुत गरीबी देखी थी उन्हें बहुत जूझना पड़ा था इसलिए वह मुझसे कहती कि प्रैक्टिकल चीज़ें करना लेकिन मैंने उनकी यह बात नहीं मानी बहुत कुछ ऐसी चीज़ें करता हूँ जो प्रैक्टिकल नहीं होती है. मुझमें मेरे वालिद का भी अंश जो है.


आपका शेड्यूल बहुत हेक्टिक होता है खुद को रिलैक्स करने के लिए क्या करते हो

मैं किताबें पढता हूँ. टीवी पर विदेशी फिल्में देखता हूँ. अपनी अलमारी साफ करता हूँ. कभी कभी झाड़ू पोछा भी लगाता हूँ. झाड़ू पोछा करना पसंद है. जितने काम करने वाले हैं सबको इकठ्ठा करता हूँ कि चलो तीसरे माले की सफाई करते हैं लेकिन उससे वो लोग बहुत परेशान हो जाते हैं क्योंकि सारा सामान इधर उधर बिखर जाता है. फिर वो वैसे ही बिखरा रहता है जब तक मैं फिर से सफाई के मोड़ में नहीं आता हूँ.



आप अपनी फिल्मों की पुरानी यादों को संजोते हैं

हाँ मेरी हर फिल्म से जुडी कोई चीज़ आपको मेरे घर पर मिल जायेगी. उसकी वजह से और ज़्यादा जगह भर गयी है।अभी हाल ही में मैंने रईस की कॉस्ट्यूम मंगवाई तो दस कॉस्ट्यूम आ गयी थी इसलिए मैंने तय किया है कि किसी फिल्म की एक याद को संजोकर रखूँगा. मेरे पास कुछ कुछ होता है कि कूल चेन है. कभी हाँ कभी न की और दिलवाले दुल्हनिया की टोपी है जोश की जैकेट है. ओम् शांति ओम् का गोल्डन ड्रेस है. कुलमिलाकर हर फिल्म की याद है. जब कभी लीजेंड बनूगा तो उसको लोगों को दिखाऊंगा.



आप अपने स्टारडम के बोझ को किस तरह से हैंडल करते हैं


मेरे स्टारडम ने मुझे जिम्मेदार बनाया है. फिल्ममेकिंग एक टीम एफर्ट है. कई सौ लोग मिलकर फिल्म बनाते हैं लेकिन उसकी सफलता का श्रेय लोगों मुझे दे देते हैं. उनका यही प्यार मुझे जिम्मेदार बनाता है और अच्छा करने के लिए प्रेरित करता है. मैं अपनी फिल्मों और किरदारों के ज़रिये लोगों को एंटरटेन करना चाहता हूँ. फिल्म फैन लोगों को पसंद नहीं आयी. फिल्म का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन ने मुझे दुखी नहीं किया था बल्कि मैं लोगों को निराश कर गया मुझे यह बात दुखी करती है



नए साल में क्या आपने कुछ रेजॉलूशन लिया है

हर साल लेता हूँ लेकिन फिर वो टूट जाता है. हर साल सोचता हूँ कि स्मोकिंग छोड़ दूंगा. रात को 11 बजे सो जाऊंगा और सुबह सात बजे उठकर वर्कआउट करूँगा लेकिन हो नहीं पता है. रईस के प्रमोशन में कुछ इस कदर मशरूफियत है कि सुबह के 5 बजे सोना होता है.



आपने अभी ऐसा कुछ स्टेटमेंट दिया था कि अगर आपके बेटों ने कभी लड़कियों केसाथ बदसलूकी की तो उन्हें कड़ी सजा मिलनी चाहिए

सबसे पहले वह बात बंगलुरु घटना के बाद मैंने नहीं बोली थी यह बात उससे पहले की थी लेकिन बेंगलुरु घटना के बाद चर्चा में आयी. इस बयान के बाद कोई बदतमीज़ उल्लू का पट्ठा बोलता है कि मैं आईएसआई का आदमी हूँ इसलिए मेरी सोच ऐसी है कि मैं अपने बच्चों को ग़ुलाम समझता हूँ।.लोगों की ऐसी सोच पर मुझे तरस आता है लेकिन मेरा बयान वही है कि महिलाओं की किसी भी तरह से कोई भी डिसरेस्पेक्ट करेगा फिर वह मेरा अपना ही क्यों न हो. अपना कौन होगा मेरे बच्चे वो भी सजा के भागीदारी होंगे.लड़कियां ऐसे कपड़े पहनती है. वैसे नहीं पहनती हैं. इस पर हम कब तक चर्चा करेंगे. आप खुद इस बार 12 से 15 आर्टिकल लिख चुकी हैं. सिम्पल बात है सबको अपनी ज़िन्दगी अपने तरीके से जीने का अधिकार है. कपड़ों पर डिस्कशन बंद होना चाहिए. कानून को सख्त करने की ज़रूरत है तभी लोगों में डर पैदा होगा. यहाँ लड़कियों पर एसिड फेंकने वालों को बेल मिल जाती है तो फिर कानून का खौफ कैसे होगा.


आपकी फिल्म के साथ काबिल रिलीज हो रही है दोनों पर काफी कुछ कहा जा रहा है


मेरी तरफ से कोई हार्ड फीलिंग नहीं है. मीडिया की ख़बरों की वजह से ऐसा लग रहा है.मेरे करियर की शुरुआती फिल्मों में से एक किंग अंकल रही है. राकेश,डुग्गु,पिंकी और सुनयना सभी मुझे बहुत प्यारे हैं. राकेश जी आज भी कोई फिल्म बनाते हैं तो बताते हैं कि कृष पर काम चल रहा है या इस पर,अभी चार पांच दिन पहले डुग्गु घर पर आया था.मैंने दो तीन बार राकेश जी के साथ मिलकर बात की कि फिल्म क्लैश न हो लेकिन कोई रास्ता नहीं निकला. मैं दोनों ही फिल्मों की सफलता की कामना करता हूँ.


सोशल मीडिया पर हाल ही में करीना के बेटे के नाम पर काफी कुछ लिखा गया था अब दंगल गर्ल ज़ायरा इसका निशाना बनी हैं आपका क्या कहना है

कोई भी टेक्नोलॉजी जो आती है उसके साथ अच्छा के साथ -साथ बुरा भी होता है. चूँकि सोशल मीडिया अब सब की उँगलियों पर है इसलिए लोग बिना ज़्यादा सोचे समझे कुछ भी लिख देते हैं. वैसे यह भारत की ही नहीं पुरे विश्व में यही हो रहा है. लोगों को मैं यही कहूँगा कि शोर बहुत है. इस शोर में अपने दिल की आवाज़ सुने. कुछ भी जो सोशल मीडिया पर आ रहा है वह आधे से ज़्यादा फेक है क्योंकि यहाँ लिखने को सबको छूट है इसलिए कुछ भी पढ़कर उसे हकीकत न मान ले और कुछ भी लिखने से पहले एक बार ज़रूर सोचे. मैं खुद ऐसा करता हूँ. मैं कोई जोक भी शेयर करने से पहले सोचता हूँ लेकिन कई सारे अहमक लोग हैं जो नहीं सोचते लेकिन उन्हें आगे चलकर ज़रूर पछताना होगा.

ऐ दिल है मुश्किल केवक़्त काफी विवाद गहराया था अब आपकी फिल्म को लेकर भी कई बातें सामने आ रही हैं. क्या फिल्में आसान टारगेट होती हैं


मैं ये सब नहीं सोचता हूँ. मेरी कोशिश होती है कि मैं अच्छी फिल्म बनाऊ कभी कामयाब होता हूँ कभी नहीं. दूसरा आपलोगों के ज़रिये मैं फिल्म के बारे बता दूँ कि मेरी फिल्म क्या है. मेरी फिल्म को लेकर जो भी गलतफहमी या सही फहमी है उसे क्लियर कर दूँ क्योंकि फिल्म दुनिया का एकमात्र ऐसा बिज़नस है जहाँ एक बार आपके पैसे लग गए तो फिर आपको मिल नहीं सकते हैं. कपडा ख़राब हो तो आप रिटर्न कर सकते हैं. खाना भी ख़राब आप रेस्टोरेंट में जाकर बदल सकते हैं फिल्म नहीं इसलिए आप फिल्म देखने जाए तो आपको मेरी फिल्म के बारे में पता हो कि क्या आप देखने जा रहे हैं. अब मेरा तीसरा फ़र्ज़ ये है कि आप मेरी फिल्म देखने जाए तो खुशनुमा माहौल में जाए.सब तरफ अच्छा माहौल हो।मेरे बच्चे अच्छे माहौल में फिल्में देखें.इसके लिए जो बन पड़ेगा मैं करूँगा.मैं कोई ऐसी फिल्म नहीं बना रहा हूँ जो आपको दुखी करे परेशान करे.मैं गन्दा आदमी हूं ही नहीं तो मैं ऐसी चीज़ें क्यों करूँगा. मुझे किसी के सेंटीमेंट्स को दुखाना नहीं किसी को उकसाना नहीं है.अगर मेरी फिल्म को देखते हुए आपको लगता है कि यह आपके सेंटीमेंट्स को कुछ सीन्स में हर्ट कर रही है.आप बोलिएगा मैं हटा दूंगा. मेरा फ़र्ज़ है.मैं शाहरुख़ खान हूँ.मैं घर घर में बसा हूँ.लोग अपने बच्चों को मेरे जैसा बनाना चाहते हैं



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