फिल्म रिव्यू : इमोशनल और एंटरटेनिंग ''बजरंगी भाईजान''

II उर्मिला कोरी II सलमान खान के पिछले पांच सात साल के करियर पर नज़र डाले तो उनके स्टारडम उनकी लार्जर देन लाइफ वाली इमेज को फिल्में भुनाती नज़र आई हैं. जबरदस्त एक्शन,दमदार डायलॉग और उनके स्टाइल का डांस,कुलमिलाकर कहानी से ऊपर सलमान लेकिन बजरंगी भाईजान में सलमान का एक अलग ही अंदाज़ नज़र आया […]
II उर्मिला कोरी II
सलमान खान के पिछले पांच सात साल के करियर पर नज़र डाले तो उनके स्टारडम उनकी लार्जर देन लाइफ वाली इमेज को फिल्में भुनाती नज़र आई हैं. जबरदस्त एक्शन,दमदार डायलॉग और उनके स्टाइल का डांस,कुलमिलाकर कहानी से ऊपर सलमान लेकिन बजरंगी भाईजान में सलमान का एक अलग ही अंदाज़ नज़र आया है.
फिल्म में सलमान एटीटुय्ड से नहीं बल्कि मासूमियत से लबरेज़ दिखते हैं. उनके चेहरे पर भोलापन नज़र आ रहा है जो उनकी हाल की फिल्मों से गायब सा था. कुलमिलाकर सलमान चकित करते हैं.सलमान का यह अलहदा अंदाज़ फिल्म की यू एस पी है. फिल्म की कहानी की बात करे तो सलमान की इस फिल्म की कहानी और उसका ट्रीटमेंट इमोशनल होते हुए एंटरटेनिंग है.
फिल्म की कहानी पाकिस्तानी बच्ची शाहिदा की है. वह गूंगी है. वह अपनी माँ से बिछड़कर हिंदुस्तान में रह जाती है और उसकी मुलाकात पवन कुमार चतुर्वेदी यानि सलमान से होती है. किस तरह से सलमान को मालूम होता है कि मुन्नी पाकिस्तान की शाहिदा है और वह उसे उसके वतन पाकिस्तान पहुंचाता है इसी पर फिल्म की कहानी घूमती है.फिल्म के फर्स्ट हाफ से ज़्यादा सशक्त सेकंड हाफ है.नवाज़ के आ जाने से फिल्म और ज़्यादा एंटरटेनिंग हो जाती है.
कबीर खान निर्देशक के तौर पर दोनों देश और अवाम की भावनाओं को बिना ठेस पहुंचाए अपनी बात कह दी है,उन्होंने धर्म और मज़हब की खाई पर सवाल भी उठाये है. मज़हब इंसान को तोड़ने के लिए नहीं है. यह बात भी रखी है कि दोनों देशों के हुक्मरान भले ही नफरत को सींच रहे है लेकिन दोनों मुल्कों के अवाम भाईचारे को पसंद करते हैं.
फिल्म के हर फ्रेम में उनकी मज़बूत पकड़ नज़र आती है.सलमान के किरदार का हाथ से मौली खोल पीर के दरगाह पर बांधना हो या ओम पुरी के किरदार का जय श्री राम बोलना. सब भाईचारे की बात को ही रखते हैं. फिल्म की कहानी में थोड़ी खामियां भी है,ज़्यादा लॉजिक न ढूंढना ही बेहतर होगा. अभिनय की बात करे तो सलमान की बेहतरीन अदाकारी वाली यह फिल्म है. हर्षाली शाहिदा के किरदार में बहुत प्यारी लगी है. जितनी उनकी तारीफ की जाए वह कम है.
नवाज़ एक बार फिर पर्दे पर जादू जगाने में कामयाब रहे हैं.उनकी सवांद अदायगी का अंदाज़ हँसा हँसा कर लोटपोट कर जाता है. उनके अभिनय की सादगी ही उनकी खासियत है. करीना कपूर खान भी अच्छी लगी है.फिल्म के गीत संगीत की बात करे तो भर दे झोली और सेल्फ़ी गीत ज़्यादा अपीलिंग है. फिल्म के सवांद कहानी के अनुरूप है. कश्मीर की खूबसूरत वादियां फिल्म को और खूबसूरत बना देती है कुलमिलाकर बजरंगी भाईजान इमोशन और एंटरटेनमेंट से बानी फिल्म है.जो हर वर्ग का मनोरंजन करती हैं.
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