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Exclusive: बोले अनुपम खेर- प्रोफेशन के बीच निजी विचारों को नहीं लाता

Updated at : 05 Jan 2019 12:06 PM (IST)
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Exclusive: बोले अनुपम खेर- प्रोफेशन के बीच निजी विचारों को नहीं लाता

अनुपम खेर अभिनीत फिल्म ‘द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर’ अपने ट्रेलर लांच के साथ ही विवादों में घिर गयी है. फिल्म को लेकर आये दिन कोई न कोई विवाद सामने आ रहा है.अभिनेता अनुपम खेर की मानें तो इन विवादों से फिल्म को फायदा ही पहुंचेगा. इस फिल्म और उससे जुड़ी कॉन्ट्रोवर्सी पर उर्मिला कोरी से […]

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अनुपम खेर अभिनीत फिल्म ‘द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर’ अपने ट्रेलर लांच के साथ ही विवादों में घिर गयी है. फिल्म को लेकर आये दिन कोई न कोई विवाद सामने आ रहा है.अभिनेता अनुपम खेर की मानें तो इन विवादों से फिल्म को फायदा ही पहुंचेगा. इस फिल्म और उससे जुड़ी कॉन्ट्रोवर्सी पर उर्मिला कोरी से हुई बातचीत.

फिल्म ‘द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर’ को हां कहने की क्या वजह थी?

मैंने पहले इस फिल्म को मना कर दिया था.मेरे दोस्त अशोक पंडित के जरिए इस फिल्म के लिए मुझे संपर्क किया गया था.मुझे लगा कि किताब पर विवाद तो है ही फिल्म पर भी होगी क्यों मैं इसमें फंसू.वैसे भी मैं कुछ न कुछ बोलता हूं तो उस पर विवाद होता ही रहता है. फिर भी फिल्म के मेकर्स ने मुझसे कहा कि आप थोड़ा और समय ले लीजिए सोचकर बोलिएगा.मैं एक दिन ऐसे ही न्यूज देख रहा था.मनमोहन सिंह जी चल रहे थे.उनकी चाल थोड़ी अजीब सी है.मैं सिटींग रूम में अपने खड़ा हुआ और उनकी तरह चलने की कोशिश करने लगा. बहुत ही खराब था.दूर-दूर तक उनसे मेल नहीं खा रहा था.आधा पौना घंटा प्रैक्टिस की तब भी नहीं हुआ. मुझे लगा कि यार ये रोल करना चाहिए. ये एक एक्टर के तौर पर मुझे चुनौती दे रहा है. उसके बाद मैंने स्क्रिप्ट मांगी और वो मुझे बहुत पसंद आयी.

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के किरदार को निभाते हुए सबसे बड़ी चुनौती क्या थी?

उनके पर्सोना में हर चीज मुश्किल है. वह खुद को एक्सप्रेस ही नहीं करते. उनको दुख है तो चेहरे का वही भाव रहता है. खुशी ,हैरानी सब में वही रहता है. क्या कभी आपने उन्हें खिलखिलाकर हंसते देखा है. एक एक्टर के तौर पर मेरे लिए यही चुनौती थी. मुझे खुशी,दुख,हैरानी हर चीज की एक्सप्रेस करना था. तीन से चार महीने मैंने इसकी रिहर्सल की है. 100 घंटो का उनका फुटेज देखा. प्राणायाम और मेडिटेशन भी शुरू किया.सबसे मुश्किल उनकी आवाज को एक्ट करना था. मैंने पूरी यूनिट को बोल रखा था कि मुझे प्रधानमंत्री जी बोलें.मैं पूरी तरह से उनके किरदार में रच बस गया था.

क्या आप कभी मनमोहन सिंह से मिले थे?

मिला तो नहीं, लेकिन हां मैंने उनको एक दो बार सामने से देखा था.2004 में जब मुझे पद्मश्री मिला था. उस वक्त मैंने उनको देखा था.

ये फिल्म मनमोहन सिंह पर आधारित है. फिर भी आप उनसे मिले नहीं?

जिन्होंने किताब लिखी है संजय बारू .वो आज तक उनसे नहीं मिले हैं तो वो मुझसे क्या मिलेंगे लेकिन हां फिल्म की रिलीज के बाद वो अगर इस फिल्म को देखते हैं तो ये फिल्म उनके दिल को जरूर छू जाएगी. जिस तरह से मैंने उन्हें पर्दे पोट्रे किया है. प्रधानमंत्री और वित्तिय मंत्री के तौर पर वह हमारे इतिहास का हिस्सा रहे हैं.लोग उनको पसंद करते थे इस फिल्म के बाद लोगों के दिल में वो घर कर जायेंगे. ऐसी उनकी प्यारी पर्सनालिटी रही है.

लेकिन इसी पर्सनालिटी का अक्सर मजाक बनाया जाता रहा है बीजेपी भी उसमें शामिल रही है.

हम आसानी से किसी का मज़ाक बना देते हैं लेकिन एक सच्चाई ये भी है कि उनकी आदतें भी वैसी ही थी.वह टेक्निकली पॉलिटिशियन नहीं थे ब्यूरोक्रेट थे इसलिए तो एक्सीडेंटली प्राइम मिनिस्टर बनें.उन्हें खुद को नहीं पता था. मैंने उनका एक वीडियो देखा था जिसमें उन्होंने कहा था कि लोग मुझे एक्सीडेंटली प्राइम मिनिस्टर बोलते हैं लेकिन मैं एक्सीडेंटली फाइनेंस मिनिस्टर भी हूं.नरसिम्हा राव ने उन्हें कहा था कि फ़ाइल लेकर आ जाओ कल से तुम फाइनेंस मिनिस्टर हो. कभी स्पीच की कोई ट्रेनिंग नहीं हुई थी.वो क्या स्पीच देंगे. कभी भी आप उनकी पार्लियामेंटरी स्पीच सुन लो आपको लगेगा कि ये बोल क्या रहे हैं.

यह फिल्म बीजेपी की छवि को चमकाने का प्रयास है?

मेरे बारे में लोगों को पता चलता है कि मैं बीजेपी सपोर्टर हूं. क्योंकि मैं नरेंद्र मोदी की तारीफ करता हूं.मेरी बीवी बीजेपी की सांसद है इसलिए सबको पता है, लेकिन प्रोफेशन के बीच में हम निजी विचारों को नहीं लाते हैं और मैं प्रोफेशनल एक्टर हूं ऐसे तुक्के से एक्टर नहीं बना हूं.बाकायदा ट्रेनिंग की है.चार से छह एक्टिंग स्कूल चलाता हूं. मुझे बीजेपी की तारीफ करनी होती तो 50 हजार ऐसे प्लेटफार्म हैं. जिन पर मैं कर सकता हूं. मैं वीडियो बनाकर बोल सकता हूं कि हमारा नेता कैसा हो ये सब दो मिनट के अंदर वायरल हो जायेगा.आठ महीने की मेहनत फिल्म पर सिर्फ बीजेपी को फायदा हो इसलिए करू फिर तो मैं बेवकूफ होऊंगा.वैसे मेरे पास इतना वक्त नहीं है.

कांग्रेस फिल्म पर बैन लगाने की मांग कर रही है.

दर्शक ये सोचकर फिल्म थोड़े न देखती है कि फिल्म पर बैन है या नहीं. वे सिर्फ अच्छी फिल्म देखना चाहते हैं.वो जो फिल्म थी ‘पद्मावत’ वो भी दो तीन राज्यों में बैन थी लेकिन सुपरहिट हुई.

बीजेपी इस फिल्म को प्रमोट कर रही है ?

राजनेता राजनीति नहीं करेंगे तो कौन करेगा. वैसे यह पहली बार नहीं है जब किसी राजनीति पार्टी ने किसी फिल्म के बारे में कुछ कहा है .जब अकाली दल और बीजेपी की सरकार पंजाब में थी उस वक़्त फिल्म उड़ता पंजाब को लेकर बहुत लोगों ने ट्वीट किया था. दुख की बात ये है कि हम बहुत जल्दी इतिहास भूल जाते हैं.

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