REVIEW : साहेब बीवी गैंगस्टर 3 में नहीं चला संजू का जादू, बूढ़े नजर आ रहे हैं संजय दत्त
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 27 Jul 2018 4:57 PM
-उर्मिला कोरी- फिल्म : साहेब बीवी और गैंगस्टरनिर्देशक : तिग्मांशु धूलिया कलाकार : संजय दत्त, माही गिल,जिमी शेरगिल, चित्रांगदा सिंह,दीपक तिजोरी,कबीर बेदी और अन्य रेटिंग : 1.5 स्टार साहेब बीवी और गैंगस्टर की यह तीसरी कड़ी है. इस बार फ़िल्म से संजय दत्त जुड़े हैं. जिससे फ़िल्म से उम्मीदें भी बढ़ गयी थी लेकिन ये […]
-उर्मिला कोरी-
फिल्म : साहेब बीवी और गैंगस्टर
निर्देशक : तिग्मांशु धूलिया
रेटिंग : 1.5 स्टार
साहेब बीवी और गैंगस्टर की यह तीसरी कड़ी है. इस बार फ़िल्म से संजय दत्त जुड़े हैं. जिससे फ़िल्म से उम्मीदें भी बढ़ गयी थी लेकिन ये फ़िल्म अपनी पिछली दोनों सीक्वल फ़िल्म से भी कमजोर साबित हुई है. कहानी की बात करें तो साहेब(जिमी) और माही (बीवी) में इस बार भी तकरार है. मगर इस बार कहानी में उनकी तकरार को ठीक से परिभाषित नहीं किया गया है. निर्देशक ने इस बात को समझा कि दर्शक खुद समझ लेंगे कि क्यों दोनों के बीच अभी भी तकरार मौजूद है. माही इस बार साहेब के खात्मे के लिए संजय दत्त के किरदार का इस्तेमाल करती है क्या वह इस बार बीवी कामयाब हो पाएगी इसी के इर्द गिर्द फ़िल्म की कहानी है.
फ़िल्म की कहानी में संजय दत्त के किरदार को ठीक से स्थापित नहीं किया गया है क्यों उसका परिवार उसके इतने ज़्यादा खिलाफ है. ये बात भी कहानी में अनकही सी है. फ़िल्म में पिछली फिल्मों की तरह थ्रिलर भी नहीं है. फ़िल्म की कहानी सपाट सी है. फ़िल्म कहीं से भी आज के दौर की नहीं लगती है. जिससे फ़िल्म पूरी तरह से बोझिल लगती है. अभिनय की बात करें तो पिछली फिल्मों की तरह माही गिल इस बार भी बेहतरीन रहीं हैं. जिमी शेरगिल को फ़िल्म के सेकंड हाफ में मौका मिला है और वो मौके पर खरे उतरे हैं. संजय दत्त फ़िल्म में गैंगस्टर की भूमिका के साथ न्याय नहीं कर पाये हैं. वह फ़िल्म में बहुत ज़्यादा उम्रदराज़ और थके हुए लगते हैं. चित्रांगदा को फ़िल्म में करने को कुछ खास नहीं था. एक अरसे बाद दीपक तिजोरी परदे पर दिखें हैं लेकिन वह चूक गये हैं . बाकी के किरदार ठीक ठाक हैं.
फ़िल्म का गीत संगीत औसत है. फ़िल्म वो कौन थी के क्लासिक गीत लग जा गले को फ़िल्म में रीक्रिएट किया गया है लेकिन गाना भी फ़िल्म की तरह पुराना जादू नहीं जगा पाया. फ़िल्म के संवाद ज़रूर अच्छे बन पड़े हैं. फ़िल्म की सिनेमेटोग्राफी कहानी के अनुरूप है.ताकत,मोहब्बत,सेक्स और धोखे की कहानी कहती ये फ्रेंचाइजी फ़िल्म इस बार घिसी पिटी कहानी,कमज़ोर डायरेक्शन और पुराने ट्रीटमेंट की वजह से पूरी तरह से निराश करती है.
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