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बिमल राय : दो बीघा ज़मीन, बंदिनी और सुजाता जैसी आइकॉनिक फिल्‍में देनेवाले फिल्‍मकार

Updated at : 12 Jul 2018 12:45 PM (IST)
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बिमल राय : दो बीघा ज़मीन, बंदिनी और सुजाता जैसी आइकॉनिक फिल्‍में देनेवाले फिल्‍मकार

हिंदी सिनेमा के जाने-माने निर्देशक बिमल रॉय का आज जन्मदिन है. दो बीघा ज़मीन, बंदिनी, सुजाता, मधुमती, परिणीता जैसी शानदार फिल्‍में दी. बिमल रॉय का जन्‍म ढाका के एक बंगाली वैद्य जमींदार परिवार में 12 जुलाई 1909 को हुआ था, जो तब पूर्वी भारत के पूर्वी बंगाल और असम प्रांत का हिस्सा था और अब […]

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हिंदी सिनेमा के जाने-माने निर्देशक बिमल रॉय का आज जन्मदिन है. दो बीघा ज़मीन, बंदिनी, सुजाता, मधुमती, परिणीता जैसी शानदार फिल्‍में दी. बिमल रॉय का जन्‍म ढाका के एक बंगाली वैद्य जमींदार परिवार में 12 जुलाई 1909 को हुआ था, जो तब पूर्वी भारत के पूर्वी बंगाल और असम प्रांत का हिस्सा था और अब बांग्लादेश का हिस्सा है. बिमल रॉय ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत कोलकाता से की. दूसरे महायुद्ध और बंगाल के विभाजन के बाद कोलकाता में फिल्‍म उद्योग की स्थिति दयनीय हो गई थी.

ऐसे में अपने कुछ बंगाली दिग्‍गजों के साथ वे मुंबई आ गये. बिमल ने अपना करियर 1953 में शुरू किया था. उन्‍होंने फिल्‍मों में अपने करियर की शुरुआत बतौर कैमरामैन की थी.

बिमल रॉय ने अपने डायरेक्‍शन करियर कर शुरुआत 1953 में दो बीघा जमीन से की थी. वे जिन फिल्‍मों को निर्देशन करते थे वो सामाजिक मुद्दों पर बनी होती थी और उनमें कोई चकाचौंध भरा नहीं होता था. उस समय का सिनेमा कमर्शियल नहीं था जैसा आज है. बिमल राय की फिल्‍म कुछ सीख दे जाती थीं और कई सवाल खड़े करती थी. उनके पास कुछ पैसे आते थे जिससे वे दूसरे फिल्‍म बनाते और लोगों के सामने पेश करते.

उस दौर में समाज में जमींदारी, गरीबी, निम्‍न वर्गों को लेकर छुआछूत, औरतों को घर से न निकलने देने जैसे कई बड़े सामाजिक मुद्दे पर फिल्‍में बनाते थे जो समाज को एकजुट होने का संदेश देती थी. उन्‍होंने अपनी फिल्‍मों के माध्‍यम से फिल्‍म जगत की नींव को तो मजबूत किया ही, समाज को भी जागरुक करने का काम किया. बताया जाता है उनकी फिल्‍मों में काम करने के लिए बड़ी से बड़ी अभिनेत्र‍ियां बेसब्र रहती थीं.

बिमल राय ने अपने करियर के दौरान कई पुरस्‍कार जीते. जिनमें 11 फिल्‍मफेयर अवार्ड, 2 राष्‍ट्रीय पुरस्‍कार, कान्‍स फिल्‍म फेस्टिवल में अंतर्राष्‍ट्रीय पुरस्‍कार. साल 1958 में उनकी फिल्‍म ‘मधुमति’ ने 9 फिल्‍मफेयर अवार्ड जीते थे.

8 जनवरी, 1996 को उनका निधन हो गया जो फिल्म जगत के लिए एक बड़ा नुकसान था.

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