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पुलकित सम्राट ने ऋचा चड्ढा को लेकर किया दिलचस्‍प खुलासा, पढ़े इंटरव्‍यू...

Updated at : 29 Nov 2017 4:04 PM (IST)
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पुलकित सम्राट ने ऋचा चड्ढा को लेकर किया दिलचस्‍प खुलासा, पढ़े इंटरव्‍यू...

टीवी से फिल्मों में आए पुलकित सम्राट फुकरे को अपने कैरियर की सबसे अहम फ़िल्म करार देते हैं. ‘फुकरे’ का सीक्वल ‘फुकरे 2’ जल्द ही सिनेमाघरों में दस्तक देने को तैयार है. फिल्‍म में पुलकित सम्राट के अलावा वरुण शर्मा, अली फजल, मनजोत सिंह और ऋचा चड्ढा मुख्‍य भूमिकाओं में हैं. फिल्‍म का ट्रेलर रिलीज […]

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टीवी से फिल्मों में आए पुलकित सम्राट फुकरे को अपने कैरियर की सबसे अहम फ़िल्म करार देते हैं. ‘फुकरे’ का सीक्वल ‘फुकरे 2’ जल्द ही सिनेमाघरों में दस्तक देने को तैयार है. फिल्‍म में पुलकित सम्राट के अलावा वरुण शर्मा, अली फजल, मनजोत सिंह और ऋचा चड्ढा मुख्‍य भूमिकाओं में हैं. फिल्‍म का ट्रेलर रिलीज हो चुका है जिसे दर्शक बेहद पसंद कर रहे हैं. हाल ही में हमारी संवाददाता उर्मिला कोरी ने पुलकित सम्राट से बातचीत की…

‘फुकरे 2’ में इस बार क्या लेकर आ रहे हैं ?

पिछली बार हमने भोली को गोली दी थी इस बार पूरी दिल्ली को खिला रहे हैं. पिछली बार भोली को हमने तिहाड़ पहुंचा दिया था. भोली अब भूखी शेरनी बनकर वापस निकली है. भोली के साथ साथ इस बार फिल्म में टाइगर भी है सांप भी और भी बहुत सारी अतरंगी चीजें.पिछली फिल्म से इस बार ज्यादा आपको पागलपन इस फिल्म में देखने को मिलेगा.

जब इस फ़िल्म के सीक्वल की घोषणा हुई थी तब आपकी क्‍या प्रतिक्रिया थी ?

हमलोग काफी समय से इंतजार कर रहे थे ऐसा नहीं है कि हम वो बनाकर भूल गए थे. हम एक्टर ही नहीं प्रोडक्शन हाउस एक्सेल और फिल्म के निर्देशक भी सेकेंड पार्ट बनाने की सोच रहे थे. हमसे लगातार लोग पूछते भी थे कि फुकरे इतनी अच्छी थी उसका सेकेंड पार्ट आएगा या नहीं. मुङो बहुत खुशी है कि आखिरकार दर्शकों के साथ साथ हमारा इंतजार भी खत्म हुआ.

जब पिछली फिल्म रिलीज हुई थी उस वक़्त इंडस्ट्री में आपलोग नए थे इस बार क्या प्रेशर महसूस कर रहे हैं

मैं अपनी बात करुं तो मैं नर्वस नहीं होता हूं. मुझे लगता है कि सेट पर हमें अपनी स्क्रिप्ट के किरदार की तरह पहुंचना चाहिए. अपना काम करना चाहिए बस और कुछ नहीं सोचना चाहिए. अगर प्रेशर लेकर आप काम करेंगे तो आपके जेहन में हमेशा यही बात रहेगी कि ये पिछली वाली से कम तो नहीं रह गयी है. इसका ह्यूमर ठीक है. उसमे ऐसा सीन किया था. इसमे ऐसा.ये सही है या नहीं. एक कलाकार के तौर पर हमें खुद को निर्देशक के हवाले कर देना चाहिए. वो जो बोले आप करते जाईए. मैं वही करता हूँ इसलिए नर्वस नहीं होता हूँ.

क्या आपको लगता है कि फुकरे ने कॉमेडी का ट्रेंड बदला था ?

हां, उस फिल्म में हिंदी फिल्मों में कॉमेडी के ट्रेंड को लेकर बदला था. इसमे न सिर्फ गैग्स थे और न ही स्लैपस्टिक कॉमेडी थी. एक दुनिया बनायी गयी थी जिसमे लोग पूरी तरह से घुस गए थे. ह्यूमर था भी तो अलग अलग पॉसेस पर. कहीं पर लुक पर ह्यूमर था कहीं पर पॉज. कहीं पर बैकग्राऊंड म्यूजिक पर था. मुङो लगता है कि फिल्म की राइटिंग बहुत ही उम्दा थी.

अजीबोगरीब सपनें फ़िल्म की कॉमेडी का हिस्सा थे स्क्रिप्ट सुनते हुए आपके क्या रिएक्शन्स होते थे

हम तो सुन सुन कर हंसकर लोट पोट हो जाते थे. हमारे निर्देशक बहुत ही अच्छे नरेटर भी हैं तो लगता था कि पूरा दृश्य आपके सामने चल रहा है. हम सब की आंखों में पानी होता था. कुर्सी से नीचे पड़े होते थे और पेट में दर्द होता था. इस बार देजा वू नहीं देजा चू पर कहानी है तो सोचिए कितना हंसने के मसाले मिलने वाले हैं.

आप निजी जिंदगी में कैसे हैं सीरियस या ह्यूमरस ?

रियल लाइफ में सेंस ऑफ ह्यूमर है लेकिन मेरे चेहरे के एक्सप्रेशन नहीं बदलेंगे. पोकर फेश रहता है और कॉमेडी कर देता हूँ. मुझे लगता है कि रियल लाइफ में भी सेंस ऑफ हूयमर होना ही चाहिए

फुकरे में लड़कों का ग्रुप हैं क्या निजी जिंदगी में भी आपका ऐसा कोई ग्रुप रहा है

हां ,दो तीन लोगों का हमारा ग्रुप है. स्कूल के ये दोस्त हैं. चूचा और मेरा किरदार जिस तरह से साइकिल में घूमता रहता है. हमलोग स्कूटर में घूमते रहते थे. मैं और मेरा बेस्ट फ्रेंड राहुल हमने एक्स्ट्रा पॉकेट मनी के लिए पेट्रोकार्ड भी बेंचे हैं बारिश में खड़े होकर. हालांकि उस आदमी ने हमें पैसे नहीं दिए लेकिन मैं इस बात को बहुत मानता हूं कि हर अनुभव आपको कुछ न कुछ सीखा जाता है. घर में बैठने से अच्छा है दुनिया देखों. क्या चल रहा है.

अब तक की जर्नी में संघर्ष क्या रहा

मैंने कभी संघर्ष नहीं देखा. मैं मुंबई आया मुङो टीवी में काम मिल गया. टीवी में काम छोड़ा फिल्मों के लिए. फ़िल्म बिट्टू बॉस मिली. फिर मैं वैभवी मर्चेट के शो म्यूजिकल का हिस्सा बना. उसके बाद फुकरे ऑफर हुई फिर एक के बाद एक फिल्म. उतार चढ़ाव देखा लेकिन अच्छी बात यह थी कि मैं कभी खाली नहीं बैठा.

असफलता को कैसे देखते हैं.

जैसे स्कूल के मार्क्‍स को इतना गौर नहीं दिया उसी तरह मैं असफलता को देखता हूं.

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