राहीगिरी फाउंडेशन की डॉक्यूमेंट्री ‘द साइलेंट एपिडेमिक’ को मिला राष्ट्रीय पुरस्कार, सड़क दुर्घटनाओं के विनाशकारी परिणामों को दिखाती है डॉक्यूमेंट्री

द साइलेंट एपिडेमिक को सर्वश्रेष्ठ गैर-फीचर फिल्म का पुरस्कार मिला, फोटो- इंस्टाग्राम
राहीगिरी फाउंडेशन की डॉक्यूमेंट्री “द साइलेंट एपिडेमिक” को सर्वश्रेष्ठ गैर-फीचर फिल्म का पुरस्कार मिला. द साइलेंट एपिडेमिक को ये पुरस्कार 71वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में मिला. यह प्रोजेक्ट व्हीलिंग हैप्पीनेस फाउंडेशन के सहयोग से तैयार किया गया.
राहीगिरी फाउंडेशन की डॉक्यूमेंट्री “द साइलेंट एपिडेमिक” को 71वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में सम्मानित किया गया है. इस फिल्म को सामाजिक और पर्यावरणीय मूल्यों को प्रोत्साहित करने वाली सर्वश्रेष्ठ गैर-फीचर फिल्म का अवॉर्ड मिला है. यह डॉक्यूमेंट्री राहीगिरी फाउंडेशन और सिनेमा फॉर गुड के बैनर तले प्रस्तुत की गई है. इसका निर्देशन अक्षत गुप्ता ने किया है, जबकि निर्माण कार्य सामाजिक उद्यमी सारिका पांडा भट्ट और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चित फिल्ममेकर जितेंद्र मिश्रा ने संभाला. फिल्म के क्रिएटिव प्रोडक्शन का कार्य आकाश बसु ने किया है. इसके अलावा यह प्रोजेक्ट व्हीलिंग हैप्पीनेस फाउंडेशन के सहयोग से बनाया गया है.
द साइलेंट एपिडेमिक की कहानी
“द साइलेंट एपिडेमिक” डॉक्यूमेंट्री भारत में सड़क दुर्घटनाओं के भयावह और अक्सर अनदेखे पहलुओं को सामने लाती है. यह फिल्म व्यक्तिगत कहानियों के जरिए उन लोगों और परिवारों के दर्द और साहस को दर्शाती है, जिनकी जिंदगी असुरक्षित सड़कों की वजह से पूरी तरह बदल गई. फिल्म में पैरालंपिक स्वर्ण पदक विजेता सुमित अंतिल की कहानी भी दिखाई गई है. इसके अलावा इसमें एक परिवार की मार्मिक कहानी भी है, जिसमें उनके छोटे बेटे की हिट-एंड-रन दुर्घटना में दुखद मृत्यु हो जाती है.
राहीगिरी फाउंडेशन की संस्थापक सारिका पांडा ने कही ये बात
राहीगिरी फाउंडेशन की संस्थापक और ट्रस्टी सारिका पांडा भट्ट ने कहा कि सड़क दुर्घटनाएं सिर्फ आंकड़े नहीं हैं. ये उन जिंदगियों की कहानियां हैं जो अब पूरी तरह से पलट चुकी हैं और सपने टूट चुके हैं. यह पुरस्कार हमें और मजबूत बनाता है कि हम सुरक्षित और समावेशी शहरों के लिए लगातार काम करें. हर एक जीवन महत्वपूर्ण है और इसलिए हमारी सड़कों को केवल वाहनों के लिए नहीं बल्कि लोगों के लिए डिजाइन किया जाना चाहिए. निर्देशक जितेंद्र मिश्रा ने कहा कि सिनेमा लोगों के दृष्टिकोण को बदलने और परिवर्तन की प्रेरणा देने की शक्ति रखता है.
फिल्म के प्रमुख योगदानकर्ता
सारिका पांडा भट्ट-राहीगिरी फाउंडेशन की संस्थापक एवं ट्रस्टी सह नगारो की निदेशक हैं. उन्होंने हरियाणा में राहीगिरी डे आंदोलन का नेतृत्व किया और भारत के अन्य शहरों में इसे लागू करने में सहयोग किया. उन्हें शहरी परिवहन, पर्यावरण और वास्तुकला में 20 वर्षों का अनुभव है. उन्हें जर्मनी के ट्यूमी द्वारा वैश्विक 60 महिला नेताओं में शामिल किया गया और 2019 में नीदरलैंड्स द्वारा गुरुग्राम की साइकिल मेयर नियुक्त किया गया. जितेंद्र मिश्रा- निर्माता एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसित फिल्म निर्माता हैं. उनके 110 से अधिक फिल्में विभिन्न विधाओं में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त हैं. उन्होंने सीआईएफईजे (युनेस्को के तहत अंतरराष्ट्रीय बच्चों और युवा सिनेमा केंद्र) के अध्यक्ष के रूप में काम किया है.
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By दिव्या केशरी
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शिक्षा और पत्रकारिता की शुरुआत
दिव्या केशरी ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से एडवरटाइजिंग एंड पब्लिक रिलेशंस में मास्टर्स की डिग्री हासिल की है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत ईटीवी भारत से की, जहां उन्हें अलग-अलग बीट्स पर काम करने का मौका मिला. इस दौरान उन्होंने कई स्पेशल स्टोरी और न्यूज पैकेज तैयार किए. झारखंड से जुड़ी कई अहम खबरों पर काम करते हुए उन्होंने रिसर्च और आसान भाषा में खबर लिखने की अपनी क्षमता को और मजबूत किया.
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