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B''Day Spl: जब मीठी आवाज वाली लता ने लगाये विरोध के कड़े सुर... आैर झुक गया Filmfare

Updated at : 28 Sep 2018 5:35 PM (IST)
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B''Day Spl: जब मीठी आवाज वाली लता ने लगाये विरोध के कड़े सुर... आैर झुक गया Filmfare

लता मंगेशकर 89 साल की हो गयींहैं. ईश्वर उन्हें अच्छी सेहत और लंबी उम्र का आशीर्वाद दें. लगभग 6 दशकों से अपनी जादुई आवाज के जरिये 20 से अधिक भाषाओं मे 50,000 से भी ज्यादा गीत गाकर ‘गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकाॅर्ड’ में अपना नाम दर्ज करा चुकीं स्वर कोकिला लता मंगेशकर आज भी श्रोताओं […]

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लता मंगेशकर 89 साल की हो गयींहैं. ईश्वर उन्हें अच्छी सेहत और लंबी उम्र का आशीर्वाद दें. लगभग 6 दशकों से अपनी जादुई आवाज के जरिये 20 से अधिक भाषाओं मे 50,000 से भी ज्यादा गीत गाकर ‘गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकाॅर्ड’ में अपना नाम दर्ज करा चुकीं स्वर कोकिला लता मंगेशकर आज भी श्रोताओं के दिल पर राज करतीहैं.

13 साल की कच्ची उम्र में उठा ली घर की जिम्मेदारी
इंदौर में 28 सितंबर 1929 को जन्मीं लता का वास्तविक नाम हेमा हरिदकर है. उनके पिता दीनानाथ मंगेशकर मराठी रंगमंच से जुड़े थे. 5 साल की उम्र में लता ने अपने पिता के साथ नाटकों में अभिनय करना शुरू कर दियाथा. इसके साथ ही वह संगीत की शिक्षा अपने पिता से लेने लगीं. वर्ष 1942 में 13 साल की उम्र में ही लता के सिर से पिता का साया उठ गया और परिवार की जिम्मेदारी उन पर आ गयी. इसके बाद उनका पूरा परिवार पुणे से मुंबई आ गया.

फिल्मों में अभिनय पसंद नहीं था,तो बन गयींगायिका
लता को फिल्मों में अभिनय करना पसंद नहीं था, लेकिन परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी उठाते हुए उन्होंने फिल्मों में अभिनय करना शुरू कर दिया. वर्ष 1942 में लता को ‘पहली मंगलगौर’ में अभिनय करने का मौका मिला. वर्ष 1945 में लता की मुलाकात संगीतकार गुलाम हैदर से हुई. गुलाम हैदर लता के गाने के अंदाज से काफी प्रभावित हुए. वर्ष 1949 में फिल्म महल के गाने ‘आयेगा आने वाला’ गाने के बाद लता बॉलीवुड में अपनी पहचान बनाने में सफल हो गयीं.

कहानी फिल्मफेयर की
लता जी का एक दिलचस्प किस्सा फिल्मफेयर से जुड़ा हुआ है, जो कम ही लोग जानते हैं. आइए जानें-
आज की तारीख में हिंदी फिल्म जगत के सबसे प्रतिष्ठित सम्मान फिल्मफेयर की शुरुआत 1954 में हुई थी. खास बात यह है कि इसी साल राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी शुरू हुए. शुरुआत में सिर्फ पांच श्रेणियों में फिल्मफेयर अवॉर्ड दिये गये. ये थे- सर्वश्रेष्ठ फिल्म, सर्वश्रेष्ठ निर्देशक, सर्वश्रेष्ठ अभिनेता, सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री और सर्वश्रेष्ठ संगीतकार. 1954 में ‘दो बीघा जमीन’ को सर्वश्रेष्ठ फिल्म, बिमल रॉय को सर्वश्रेष्ठ निर्देशक, दिलीप कुमार को फिल्म ‘दाग’ के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता, मीना कुमारी को ‘बैजू बावरा’ के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री और नौशाद को इसीफिल्म के लिए सर्वश्रेष्ठ संगीतकार चुना गया था.

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लता जी ने लगाये विरोध के सुर
कम ही लोग जानते हैं कि मीठी आवाज में गाने के लिए मशहूर लता मंगेशकर ने अपने अधिकारों कीखातिर विरोध के कड़े सुर भी लगाये. यह कहानी फिल्मफेयर अवॉर्ड से जुड़ी हुई है. दरअसल, 1957 में फिल्म ‘चोरी चोरी’ के गाने ‘रसिक बलमा’ के लिए संगीतकार शंकर जयकिशन को फिल्मफेयर अवॉर्ड के लिए चुना गया. अवॉर्ड सेरेमनी से पहले जयकिशन ने लता मंगेशकर से एक गुजारिश की. उन्होंने लता जी से कहा कि वो अवॉर्ड सेरेमनी में ‘रसिक बलमा’ गाना गा दें. लता जीने अपना विरोध दर्ज करानेके लिए यह कहकर गाने से इनकार कर दिया कि फिल्मफेयर अवॉर्ड गाने के संगीतकार को दिया जा रहा है न कि गायक को, इसलिए वह ये गाना कार्यक्रम के दौरान नहीं गायेंगी. उन्होंने कहा कि अगर आपलोग चाहें तो सेरेमनी में गाने की धुन बजा लें. इस बात को लेकर शंकर जयकिशन और लता जी के बीच मनमुटाव भी हुआ. बाद में यह बात कार्यक्रम के आयोजकों तक पहुंची तो उन्हें अपनी गलती का एहसास हुआ. लता जी की बात पर अमल करते हुए फिल्मफेयर आयोजकों ने अगले साल से प्लेबैक सिंगर्स को भी फिल्मफेयर अवॉर्ड देनाशुरू कर दिया.

मेल और फीमेल सिंगर काअवाॅर्ड
दिलचस्प बात यह भी है कि फिल्मफेयर अवॉर्ड में गायक और गायिकाओं को अलग-अलग पुरस्कार दिलाने की लड़ाई लड़नेवाली भी लता मंगेशकर ही थीं. दरअसल, आयोजकों ने 1959 में फिल्मफेयर अवॉर्ड की ज्यूरी बनायी तो उसमें प्लेबैक सिंगर के लिए भी नाम चुने जाने को कहा. हालांकि इसके बाद अगले 8 साल तक यानी 1967 तक इस कैटेगरी में अवॉर्ड तो मिलते थे लेकिन मेल और फीमेल सिंगर को अलग-अलग नहीं, बल्कि किसी एक प्लेबैक सिंगर को ही चुना जाता था. 1967 से यह बदलाव हुआ जब इस अवॉर्ड के लिए मेल और फीमेल सिंगर को अलग-अलग चुना जाने लगा. कहना गलत न होगा कि अगर लता जी ने आवाज ना उठायी होती, तो शायद किसी और ने इस पर ध्यान भी नहीं दिया होता. साथ ही संगीतकारों के सामने अपनी बात इतनी मजबूती से कहने की हिम्मत भी हर किसी में नहीं थी.

सम्मानों के शिखर पर
वर्ष 1958 में आयी बिमल रॉय की फिल्म ‘मधुमती’ के गाने ‘आजा रे परदेसी मैं तो कब से खड़ी इस पार’ के लिए लता जी ने फिल्मफेयर पुरस्कारजीता.इसकेबाद उन्होंने अपने लंबे करियर में पांच बार फिल्मफेयर अवॉर्ड जीता. इसमें फिल्म ‘मधुमती’ के गाने ‘आजा रे परदेसी’ के अलावा, ‘कहीं दीप जले कहीं दिल’ (फिल्म – ‘बीस साल बाद’), ‘तुम्हीं मेरे मंदिर, तुम्हीं मेरी पूजा’ (फिल्म – ‘खानदान’) और ‘आप मुझे अच्छे लगने लगे’ (फिल्म – ‘जीने की राह’) के लिए मिले सम्मानशामिल हैं. इसके अलावा वर्ष 1993 में लता जी को फिल्मफेयर लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था. वहीं, वर्ष 1994 में उन्हें फिल्म ‘हम आपके हैं कौन’ के बेहद लोकप्रिय हुए गाने ‘दीदी तेरा देवर दीवाना’ के लिए फिल्मफेयर का स्पेशल अवॉर्ड भी दिया गया. सम्मानों के शिखर पर पहुंच चुकीं लता जी को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से भी नवाजा जा चुका है.

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