Hyderabad Lok Sabha Election Result 2024: ओवैसी ने हैदराबाद में फिर दिखाया दम, माधवी लता 3 लाख वोटों से पिछड़ीं

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Hyderabad Lok Sabha Election Result 2024

हैदराबाद संसदीय सीट पर पिछले 40 वर्षों से ओवैसी परिवार का दबदबा रहा है. असदुद्दीन ओवैसी के पिता सुलतान ओवैसी यहां 1984 में निर्दलीय चुनाव जीते थे.

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Hyderabad Lok Sabha Election Result 2024: हैदराबाद लोकसभा क्षेत्र में असदुद्दीन ओवैसी ने एक बार फिर अपना दम दिखाया है. उन्हें 621587 वोट मिले हैं जबकि माधवी लता को 304647 वोट मिले हैं. शुरुआत में यहां कांटे की टक्कर नजर आ रही थी. शुरुआती रुझानों में चौंकाने वाले संकेत मिले थे, जब बीजेपी की उम्मीदवार माधवीलता ने असदुद्दीन ओवैसी को कुछ राउंड की गिनती में पछाड़ दिया था, हालांकि कुछ देर मेें असदुद्दीन ओवैसी फिर आगे हो गए . ज्ञात हो कि हैदराबाद लोकसभा क्षेत्र पर 40 वर्षों से असदुद्दीन के परिवार का कब्जा रहा है, लेकिन यह भी एक सच्चाई है कि भले ही हैदराबाद सीट एआईएआईएम का गढ़ हो, लेकिन इस बार बीजेपी की उम्मीदवार माधवी लता ने जिस प्रकार उन्हें चुनौती दी है और उनकी सभाओं में जैसी भीड़ उमड़ी है, कहीं ना कहीं असदुद्दीन ओवैसी भी अंदर से बौखलाए हुुए थे. कट्टर हिंदूवादी छवि की माधवी लता पूरे आत्मविश्वास के साथ यह कहती रहीं कि मैं ओवसी भाई को चुनाव में हरा दूंगी.ओवैसी परिवार का यह किला जो 40 वर्षों से उनकी शान बना हुआ है, वह अजेय रहता है या फिर यहां लहराता है भगवा झंडा?


बीजेपी ने माधवी लता को दिया टिकट

Hyderabad Lok Sabha Election Result 2024: लोकसभा चुनाव 2024 में जिन सीटों की चर्चा सबसे ज्यादा हुई उनमें हैदराबाद लोकसभा सीट भी शामिल था. हैदराबाद लोकसभा सीट पर बीजेपी ने इस बार एक ऐसे उम्मीदवार को खड़ा किया था, जिसकी छवि कट्टर हिंदू वाली है और जिसने काफी आक्रामक अंदाज में चुनाव प्रचार किया. बीजेपी की उम्मीदवार माधवी लता ने यह दावा कि वो ओवैसी भाई को एक लाख से अधिक मतों से हरा देंगी. हैदराबाद सीट पर मुसलमान वोटर का गहरा प्रभाव है और वे किसी भी उम्मीदवार के जीत और हार का कारण बनते हैं. इन हालात में माधवी लता का आत्मविश्वास काफी चौंकाने वाला था, लेकिन उनकी सभाओं में जिस तरह भीड़ देखी जा रही थी उससे भी कुछ सवाल उठते थे. ओवैसी की थोड़ी बौखलाहट भी दिखी, जब उन्होंने एएनआई को दिए इंटरव्यू में यह कह दिया कि वो तो अभी नई-नई आई है, मेरा मुकाबला तो बीजेपी से है.


ओवैसी परिवार का रहा है दबदबा

हैदराबाद हमेशा से ही लोकसभा चुनाव में हाॅट सीट रही है. इस सीट से एआईएमआईएम के नेता असदुद्दीन ओवैसी 2004 से सांसद हैं. उनसे पहले उनके पिता सुलतान सलाउद्दीन ओवैसी यहां सांसद रहे थे. सुलतान सलाउद्दीन ओवैसी यहां 1984 से 1999 तक सांसद रहे, यानी हैदराबाद सीट पर पिछले 40 सालों से एआईएमआईएम का दबदबा रहा है. सुलतान ओवैसी और असदुद्दीन ओवैसी के खिलाफ जो भी नेता चुनाव लड़े वे हारे, यही वजह है कि ये अपनी जीत को लेकर काफी आश्वस्त रहते हैं. 2011 की जनगणना के अनुसार हैदराबाद में मुसलमानों की आबादी लगभग 45 प्रतिशत है, हालांकि यह दावा किया जा रहा है कि यहां अब लगभग 60 प्रतिशत वोटर मुसलमान हैं. इतिहास पर नजर डालें तो आजादी के वक्त हैदराबाद निजामों के अधीन था, तत्कालीन निजाम मीर उस्मान अली ने भारत में शामिल होने से इनकार कर दिया था. तब सरदार वल्लभ भाई पटेल के प्रयासों से निजाम को बाध्य किया गया कि वे भारत में शामिल हों. 1948 में सेना की कार्रवाई के बाद हैदराबाद को भारत के अधीन किया गया. उस वक्त हैदराबाद के निजाम थे.

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अहमद मोइउद्दीन थे पहले सांसद

देश में पहला लोकसभा चुनाव 1951 से 1952 के बीच कराया गया था. हैदराबाद के पहले सांसद कांग्रेस पार्टी के अहमद मोइउद्दीन थे. उनके बाद 1957 में विनायक राव कोरटकर यहां के सांसद बने वे भी कांग्रेस पार्टी के ही सदस्य थे. उसके बाद गोपालैया सुब्बुकृष्ण मेलकोटे वहां से सांसद बने, वे भी कांग्रेसी ही थे लेकिन बाद में तेलंगाना राज्य के आंदोलन में शामिल होकर उन्हें कांग्रेस पार्टी छोड़ दी थी और तेलंगाना प्रजा समिति पार्टी में शामिल हुए थे. उनके बाद हैदराबाद से 1977 और 1980 में कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार केएस नारायण चुनाव जीते. केएस नारायण के बाद वहां ओवैसी परिवार का दबदबा कायम हो गया. 1984 में यहां से सुलतान सलाउद्दीन निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीते और आज भी वहां इसी परिवार का वर्चस्व है.

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रजनीश आनंद

लेखक के बारे में

By रजनीश आनंद

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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