Lok Sabha Election 2024 : असदुद्दीन ओवैसी ने कहा- मेरा मुकाबला बीजेपी से है, माधवी लता से नहीं, वो तो नई-नई आईं हैं…

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Asaduddin Owaisi

Asaduddin-Owaisi

Lok Sabha Election 2024 असदुद्दीन ओवैसी ने एएनआई न्यूज एजेंसी के साथ बातचीत में कहा कि क्या पीएम मोदी को यह शोभा देता है कि वे ये कहें कि हिंदू महिलाओं के गले से मंगलसूत्र छीन कर मुसलमानों को देने की साजिश हो रही है.

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Lok Sabha Election 2024 : मेरा मुकाबला बीजेपी से है, कांग्रेस से है उनकी विचारधारा से है और यही जम्हूरियत की खूबी है. कोई भी मुझे चुनौती दे सकता है. जहां तक बात चुनौती और आत्मविश्वास की है, तो मैं समझ रहा हूं कोई चुनौती नहीं है. मैं चुनाव को गंभीरता से लेता हूं. 1996 में जब वैंकेया नायडू चुनाव मैदान में थे, तो कहा जा रहा था कि अब मुश्किल होगा, लेकिन अल्लाह ने मुझे जीत दिलाई. यह बातें एआईएमआईएम के नेता असदुद्दीन ओवैसी ने एएनआई न्यूज न्यूज एजेंसी के पोडकास्ट में कही है. उन्होंने पोडकास्ट में कहा कि हैदराबाद में हमने जो काम किया है खासकर कोविड के दौरान वे मुझे हैदराबाद में जीत दिलाएंगे इसका मुझे भरोसा है. ओवैसी ने कहा कि चुनाव परिणाम आने के बाद सारी बातें स्पष्ट हो जाएगी.

पीएम मोदी पर बोला हमला

अपने इंटरव्यू में ओवैसी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला करते हुए कहा कि क्या एक प्रधानमंत्री को यह शोभा देता है कि वे ये कहें कि हिंदू महिलाओं के गले से मंगलसूत्र छीनकर मुसलमानों को देने की साजिश की जा रही है. उन्होंने आरक्षण के मुद्दे पर भी पीएम मोदी द्वारा दिए गए बयान की भी निंदा की. उन्होंने कहा कि मस्जिद की तरफ सांकेतिक तीर बनाने का काम करके बीजेपी नेता ने खुद का पर्दाफाश किया है. माधवीलता के बारे में ओवैसी ने कहा कि वे नई-नई आई हैं, उन्हें जानकारी नहीं हैं. वे गलत बातें कह रही हैं.

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बोगस वोटिंग की बात करना बेकार

ज्ञात हो कि माधवी लता ने यह बयान दिया था कि पुराने हैदराबाद में विकास नहीं हुआ है. माधवीलता यह दावा कर रही हैं कि वे ओवैसी को एक लाख से अधिक मतों से हराएंगी. वे काफी आत्मविश्वास में है. ओवैसी ने कहा कि वे पिछले पांच महीने से उन्हें फाॅलो कर रहे हैं. वे कुछ दिनों से मुस्लिम महिलाओं की हितैषी बनकर दिखा रही हैं, वे उन्हें नकाब ना पहनने की सलाह दे रही हैं. जहां तक बोगस वोटिंग की बात है, तो ये संभव नहीं है. सब जगह कैमरा लगा होता है.

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रजनीश आनंद

लेखक के बारे में

By रजनीश आनंद

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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