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Gujarat Polls: गुजरात के इस गांव में सियासी दलों के प्रचार पर रोक, मगर वोट नहीं डालने पर लगता है जुर्माना

Updated at : 23 Nov 2022 1:19 PM (IST)
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Gujarat Polls: गुजरात के इस गांव में सियासी दलों के प्रचार पर रोक, मगर वोट नहीं डालने पर लगता है जुर्माना

A voting official marks the finger of a voter inside a polling booth during the second phase of state elections, in Azamgarh town in the northern Indian state of Uttar Pradesh February 11, 2012. Uttar Pradesh, with 200 million people, is an unruly state that stretches southeast from New Delhi, divided along its length by the Ganges River. To avoid violence, voting is staggered over seven days. Results from a total of five state elections are to be announced on March 6. REUTERS/Pawan Kumar (INDIA - Tags: POLITICS ELECTIONS)

Gujarat Election 2022: गुजरात के राजकोट में एक गांव ऐसा भी है, जहां राजनीतिक पार्टियों को चुनाव प्रचार की इजाजत नहीं दी जाती है.

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Gujarat Election 2022: गुजरात में होने जा रहे विधानसभा चुनाव के मद्देनजर सभी प्रमुख सियासी दलों ने अपनी ताकत झोंक दी है. चुनाव के लिए मतदान की तारीख के नजदीक आने के साथ ही सभी राजनीतिक पार्टियों के दिग्गज नेताओं ने प्रचार अभियान के लिए अपनी गतिविधियां तेज कर दी है. प्रचार अभियान के लिए समय खत्म होने से पहले राजनीति पार्टियों के बड़े नेता राज्य के कोने-कोने में मौजूद हर मतदाता तक पहुंचने की कोशिश में जुटे है. इन सबके बीच, गुजरात के राजकोट से एक बड़ी जानकारी सामने आ रही है.

समाधियाला गांव में चुनाव प्रचार की इजाजत नहीं

दरअसल, गुजरात के राजकोट में एक गांव ऐसा भी है, जहां राजनीतिक पार्टियों को चुनाव प्रचार की इजाजत नहीं दी जाती है. राजकोट के राज समाधियाला गांव के सरपंच ने बताया कि गांव में प्रचार की अनुमति नहीं है. हालांकि, वोट नहीं करने वालों पर 51 रुपये का जुर्माना लगाया जाता है. उन्होंने बताया कि साल 1983 से ही गांव में सियासी दलों के चुनाव प्रचार पर रोक लगी हुई है.

राजकोट शहर से केवल 22 किमी दूर है राज समाधियाला गांव

जानकारी के मुताबिक, राज समाधियाला गांव राजकोट शहर से केवल 22 किमी दूर है. गुजरात के इस गांव में खोजने पर भी आपको किसी के घर में ताला नहीं मिलेगा. बताया जाता है कि इस गांव में कोई अपने घर में ताला नहीं लगाता है. घर तो घर होता है, वहां कोई न कोई मौजूद ही रहता है. मगर यहां के दुकानदार भी दोपहर में अपनी दुकानें खुली छोड़ देते हैं और घर में खाना खाने आ जाते हैं. ग्राहक जब दुकान पर आता है तो अपनी जरूरत का सामान लेकर उसकी कीमत का पैसा दुकान के गल्ले में डालकर चला जाता है. बताया जाता है कि इस गांव में एक घटना को छोड़कर आज तक कभी भी चोरी की वारदात नहीं हुई है.

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Samir Kumar

लेखक के बारे में

By Samir Kumar

More than 15 years of professional experience in the field of media industry after M.A. in Journalism From MCRPV Noida in 2005

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