Election results : राजस्थान में कांग्रेस की हार की वजह बना सचिन पायलट और अशोक गहलोत का विवाद
Published by : Rajneesh Anand Updated At : 03 Dec 2023 4:26 PM
सचिन पायलट की नाराजगी इस वजह से थी कि उन्हें पिछले चुनाव में मुख्यमंत्री का पद नहीं मिला. राजनीतिक गलियारों से जो खबरें छनकर सामने आईं उनके अनुसार अशोक गहलोत और सचिन पायलट को ढाई-ढाई साल तक मुख्यमंत्री बनाने की बात हुई थी,
राजस्थान विधानसभा चुनाव के परिणाम कांग्रेस के लिए निराश करने वाले हैं. अबतक प्राप्त रूझानों के अनुसार कांग्रेस पार्टी को 70 सीट पर बढ़त मिली है, जिनमें से सात के परिणाम घोषित किए जा चुके हैं. पिछली दफा कांग्रेस को राजस्थान में बहुमत मिला था और उस चुनाव को जीतने में सचिन पायलट की अहम भूमिका थी. सचिन पायलट ने जमीनी स्तर पर पार्टी को मजबूत करने के लिए बहुत प्रयास किए थे, जिसका परिणाम चुनाव में दिखा था. लेकिन इस चुनाव में सचिन पायलट नाराज थे.
सचिन पायलट की नाराजगी इस वजह से थी कि उन्हें पिछले चुनाव में मुख्यमंत्री का पद नहीं मिला. राजनीतिक गलियारों से जो खबरें छनकर सामने आईं उनके अनुसार अशोक गहलोत और सचिन पायलट को ढाई-ढाई साल तक मुख्यमंत्री बनाने की बात हुई थी, लेकिन बाद में हाईकमान ने अशोक गहलोत के अनुभव को देखते हुए उन्हें मुख्यमंत्री का पद सौंपा और सचिन दरकिनार कर दिए गए.
सचिन पायलट ने इस उपेक्षा के बाद अपने 20 समर्थक विधायकों के साथ पार्टी तोड़ने की धमकी भी दी थी, लेकिन वे सफल नहीं हो पाए. लेकिन सचिन पायलट और अशोक गहलोत के बीच तनातनी जारी रही. अशोक गहलोत के खिलाफ उन्होंने ना सिर्फ बयान दिया, बल्कि एक अभियान भी छेड़ा और यह कहा कि अगर अशोक गहलोत की सरकार उन वायदों को पूरा नहीं करती, जिनके भरोसे वे सत्ता तक पहुंचे हैं, तो पार्टी को चुनाव में जाने का कोई हक नहीं है.
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वहीं अशोक गहलोत ने भी सचिन पायलट पर सार्वजनिक तौर पर कई हमले किए और उनकी मानसिक स्थिति पर भी सवाल उठा दिए. अशोक गहलोत की बयानबाजी से पार्टी ने इन दोनों के बीच पैचअप कराने के जो भी प्रयास किए वे विफल हो गए. सचिन पायलट और अशोक गहलोत के झगड़े का असर कांग्रेस पार्टी के भविष्य पर पड़ा और पार्टी राजस्थान में सत्ता से दूर होती नजर आ रही है.
सचिन पायलट की अनदेखी से गुर्जर वोटर नाराज चल रहे थे और उन्होंने प्रदेश में कांग्रेस को सत्ता से दूर कर दिया. हालांकि सचिन पायलट टोंक विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीत गए हैं उन्होंने बीजेपी नेता अजित सिंह मेहता को शिकस्त दी है. सचिन पायलट को 105812 वोट मिले हैं. अशोक गहलोत अभी सरदारपुरा सीट से आगे चल रहे हैं, वे चुनाव जीत भी जाएंगे, लेकिन दो नेताओं की लड़ाई में पार्टी को बड़ा नुकसान हुआ है, उनके हाथ से एक राज्य निकल गया है.
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By Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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