मां का सपना और 6 साल की कड़ी मेहनत, ग्वालियर के आशीष को UPSC में AIR 186

Published by :Smita Dey
Published at :06 May 2026 9:30 PM (IST)
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Ashish Sharma AIR 186

आशीष शर्मा UPSC AIR 186 (Instagram)

Ashish Sharma AIR 186: ग्वालियर के आशीष शर्मा ने UPSC 2025 में 186वीं रैंक हासिल कर अपनी मां का सपना पूरा किया. जानें 10 साल की उम्र में मां को खोने के बाद आशीष ने कैसे 5 प्रयासों के बाद यह बड़ी सफलता पाई.

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Ashish Sharma AIR 186: कहते हैं कि अगर इरादे मजबूत हों और मकसद के पीछे कोई जज्बा छिपा हो, तो मंजिल मिल ही जाती है. यूपीएससी (UPSC) की परीक्षा पास करना लाखों युवाओं का सपना होता है, लेकिन ग्वालियर के आशीष शर्मा के लिए यह सिर्फ एक करियर नहीं, बल्कि अपनी दिवंगत मां को दिया गया एक वादा था. आशीष ने UPSC 2025 में 186वीं रैंक हासिल किया है. आशीष का यह सफर भावनाओं, हार न मानने की जिद और सही रणनीति की एक मिसाल है. 

Ashish Sharma AIR 186: 10 साल की उम्र में सिर से उठा मां का साया

आशिष का बचपन ग्वालियर के एक खुशहाल परिवार में बीता, लेकिन जब वह महज 10 साल के थे, तब उनकी मां का निधन हो गया. आशीष बताते हैं कि सिविल सर्वेंट बनना उनकी मां का सपना था. मां के जाने के बाद, उनकी अधूरे सपने को आशीष ने अपनी जिंदगी का मकसद बना लिया. 10वीं क्लास से ही उन्होंने तय कर लिया था कि वह यूपीएससी की परीक्षा जरूर देंगे.

Ashish Sharma AIR 186: ग्वालियर से शुरू हुआ पढ़ाई का सफर

आशीष की शुरुआती शिक्षा ग्वालियर के जीडी गोयनका स्कूल से हुई. इसके बाद उन्होंने जीवाजी यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया. कॉलेज में उनके विषय पॉलिटिकल साइंस, हिस्ट्री और सोशियोलॉजी थे. हालांकि ये विषय यूपीएससी के लिए अच्छे माने जाते हैं, लेकिन आशीष को इनमें बहुत ज्यादा रुचि नहीं आ रही थी. उन्होंने ऑप्शनल सब्जेक्ट में एंथ्रोपोलॉजी को चुना.

आशीष शर्मा यूपीएससी टॉपर (instagram)

5 कोशिशें और 6 साल का लंबा इंतजार

आशीष की यूपीएससी की जर्नी कोई आसान नहीं थी. उन्होंने कुल 5 बार परीक्षा दी और 6 साल तक कड़ी मेहनत की. उन्होंने अपने पहले ही प्रयास में प्रीलिम्स और मेन्स क्लियर कर लिया था और इंटरव्यू तक पहुंचे थे, लेकिन फाइनल लिस्ट में जगह बनाने से सिर्फ 20 नंबरों से चूक गए. इसके बाद उन्होंने तीसरे और फिर पांचवें प्रयास में भी इंटरव्यू दिया. 5 प्रयासों से मिली असफलता ने उन्हें तोड़ा नहीं, बल्कि अपनी गलतियों को सुधारने का मौका दिया.

मेन्स की रणनीति में किया बड़ा बदलाव

पिछले प्रयासों में मिली हार से आशीष ने सीखा कि उनकी कमी आंसर राइटिंग में थी. उन्होंने टॉपर्स की कॉपियों को गहराई से पढ़ा और समझा कि नंबर कैसे बढ़ाए जा सकते हैं. इस बार उन्होंने अपने आंस में सुधार किया. 

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Smita Dey

लेखक के बारे में

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स्मिता दे प्रभात खबर में डिजिटल कंटेंट क्रिएटर के तौर पर काम कर रही हैं. बुक्स पढ़ना, डांसिंग और ट्रैवलिंग का शौक रखने वाली स्मिता युवाओं को बेहतर करियर गाइड करना और नौकरी के लिए प्रोत्साहित करना पसंद करती हैं.

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