जन्म से एक हाथ नहीं था, फिर भी काजल ने UPSC में हासिल की AIR 167

काजल राजू UPSC AIR 167 (Instagram)
Kajal Raju AIR 167: जन्म से एक हाथ न होने के बावजूद काजल राजू ने UPSC 2025 में AIR 167 हासिल करके इतिहास रच दिया है. जानें कैसे रेलवे की नौकरी के साथ उन्होंने पूरा किया अपना IAS बनने का सपना.
Kajal Raju AIR 167: केरल के कासरगोड जिले के नीलेश्वरम कस्बे की रहने वाली काजल राजू ने UPSC 2025 में AIR 167 हासिल की है. काजल शारीरिक कमी और सामाजिक सोच, दोनों को मात देकर यह सफलता हासिल की है. आइए काजल की यूपीएससी की जर्नी को करीब से जानते हैं.
Kajal Raju AIR 167: चुनौतियों के बीच बीता बचपन
काजल का जन्म केरल के एक छोटे से कस्बे में हुआ था. उनके पास जन्म से ही एक हाथ का अगला हिस्सा (Forearm) नहीं था. आम लोगों के लिए जो काम आसान होते हैं, काजल के लिए वही चुनौतियां बन गए. लिखना, खाना, सामान उठाना या रोजमर्रा के छोटे-छोटे काम करना, हर चीज के लिए उन्हें दूसरों से ज्यादा मेहनत और तालमेल बिठाना पड़ता था. काजल ने बचपन में ही तय कर लिया था कि वे अपनी पहचान अपनी कमजोरी से नहीं, बल्कि अपने काम से बनाएंगी.
पहली सफलता और IAS बनने का सपना
UPSC की तैयारी आसान नहीं होती और काजल के लिए भी यह सफर लंबा रहा. साल 2022 की परीक्षा में काजल ने पहली बार 910वीं रैंक हासिल की. एक दिव्यांग उम्मीदवार के तौर पर इतनी बड़ी परीक्षा निकालना ही अपने आप में मिसाल थी. उन्हें सरकारी सेवा में जगह मिली और भारतीय रेलवे में काम करने का मौका मिला. लेकिन काजल का लक्ष्य कुछ और था. उनका सपना शुरू से ही IAS ऑफिसर बनने का था.
नौकरी के साथ दोबारा तैयारी का कठिन सफर
सरकारी नौकरी मिलने के बाद काजल ने हार नहीं मानी और पढ़ाई की. उन्होंने रेलवे की नौकरी के साथ-साथ अपनी तैयारी जारी रखी. ऑफिस के काम के साथ मॉक टेस्ट देना, करंट अफेयर्स पढ़ना, यह सब उनकी रूटीन का हिस्सा बन गया.

इंटरव्यू का वो एक सवाल
UPSC के इंटरव्यू में अक्सर ऐसे सवाल पूछे जाते हैं जो आपकी सोच को परखते हैं. काजल से एक बार पूछा गया, अगर आपका सिलेक्शन नहीं हुआ, तो यह आपके लिए कितना मुश्किल होगा. यह सवाल किसी को भी भावुक कर सकता था, लेकिन काजल ने अपनी पूरी जिंदगी संघर्ष में बिताई थी. उन्होंने हार और जीत को करीब से देखा था. उनके जवाब और उनके आत्मविश्वास ने पैनल को प्रभावित किया. 2025 के इंटरव्यू में उनसे जटिल मुद्दे जैसे भू-राजनीति (Geopolitics) और सामाजिक कानूनों पर भी सवाल हुए, जिनका जवाब उन्होंने बहुत ही मैच्योरिटी के साथ दिया.
910 से 167वीं रैंक तक का शानदार सफर
काजल (Kajal Raju AIR 167) का चौथा प्रयास उनके लिए सबसे बड़ी कामयाबी लेकर आया. अपनी हर गलती से सीखा और खुद को बेहतर बनाकर 910 से 167 रैंक तक पहुंची. उनकी कहानी उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है जो छोटी-छोटी बाधाओं से घबराकर अपने कदम पीछे खींच लेते हैं.
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लेखक के बारे में
By Smita Dey
स्मिता दे प्रभात खबर में डिजिटल कंटेंट क्रिएटर के तौर पर काम कर रही हैं. बुक्स पढ़ना, डांसिंग और ट्रैवलिंग का शौक रखने वाली स्मिता युवाओं को बेहतर करियर गाइड करना और नौकरी के लिए प्रोत्साहित करना पसंद करती हैं.
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