ई-रिक्शा चलाने वाला बनेगा डॉक्टर, टीचर का मिला साथ तो चमकी किस्मत, तीसरे प्रयास में पाई सफलता

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मोहम्मद सुहेल अपने परिवार के साथ

मोहम्मद सुहेल अपने परिवार के साथ

NEET Success Story: मुजफ्फरपुर नगर के मोहम्मद सुहेल ने कठिनाइयों के बीच अपने तीसरे प्रयास में NEET परीक्षा पास कर ली. वे दिन में ई-रिक्शा चलाते थे और रात में पढा़ई करते थे. उनके परिवार और शिक्षक ने परीक्षा में सफलता हासिल करने के लिए हर कदम पर मोटिवेट किया.

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NEET Success Story: नीट परीक्षा दुनिया की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक है. इसे पास करने के लिए कड़ी मेहनत लगती है. कई घंटों की पढ़ाई और कोचिंग इंस्टीट्यूट के बाद ही छात्र सफल हो पाते हैं. हालांकि, कुछ जुनूनी छात्र भी होते हैं जो कई सारी मुश्किलों के बाद भी नीट जैसी टफ परीक्षा पास कर लेते हैं. कुछ ऐसी ही कहानी है मोहम्मद सुहेल की, जो दिन में रिक्शा चलाते थे और रात में पढ़ाई करते थे. 

दिन में ई-रिक्शा चलाकर 300-500 रुपये कमाते थे 

मोहम्मद सुहेल उत्तर प्रदेश के मुजफ्फर नगर के एक छोटे से कस्बे के रहने वाले हैं. सुहेल का परिवार आर्थिक रूप से कमजोर है. ऐसे में घर को सपोर्ट करने के लिए सुहेल दिन में ई-रिक्शा चलाया करते थे. वे हर दिन करीब 300-500 रुपये की कमाई करते थे. 

मां चाहती थीं कि बेटा बने डॉक्टर 

सुहेल ने यूपी बोर्ड से 12वीं तक पढ़ाई की है. सुहेल की मां चाहती थी कि उनका बेटा डॉक्टर बने. लेकिन शुरुआत में सुहेल और परिवार को जानकारी ही नहीं थी. साथ ही कोचिंग की फीस महंगी थी. लेकिन एक बार सुहेल ने जब फैसला कर लिया तो वे फिर वे पीछे नहीं हटे. जब सुहेल ने फैसला कर लिया तो एक प्राइवेट कोचिंग ने उनकी मदद की. 

तीसरे अटेंप्ट में पाई सफलता, मिले 609 मार्क्स 

सुहेल को पहले प्रयास में NEET UG में सिर्फ 369 मार्क्स मिले थे. लेकिन वे खुश नहीं थे. उन्होंने दूसरा अटेंप्ट देने का सोचा. भले ही सुहेल आर्थिक रूप से कमजोर थे. लेकिन उनके पास अच्छे लोगों की कमी नहीं थी. 

भाई ने पढ़ाई छोड़कर नौकरी शुरू की 

सुहेल के पास पढ़ाई के लिए अलग कमरा नहीं था. उनके एक शिक्षक ने शांत माहौल में पढ़ाई करने के लिए उन्हें अपना कमरा दिया. सुहेल के भाई ने अपनी पढ़ाई छोड़कर नौकरी शुरू कर दी क्योंकि सभी को सुहेल में संभावनाएं दिखती थी. आखिरकार, सुहेल ने अपने तीसरे अटेंप्ट में 609 मार्क्स हासिल कर लिया. सुहेल मानते हैं कि उनकी इस सफलता में उनके परिवार और शिक्षक ने बहुत बड़ा रोल निभाया है. 

आगे सर्जन बनने का सपना है

NEET UG में सुहेल ने 11,000 के करीब रैंक हासिल की है. इस रैंक और मार्क्स पर उन्हें किसी अच्छे सरकारी मेडिकल कॉलेज में सीट मिल सकती है. आगे चलकर वो सर्जन बनना चाहते हैं और जरूरतमंद लोगों की मदद करना चाहते हैं. 

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Shambhavi Shivani

लेखक के बारे में

By Shambhavi Shivani

शाम्भवी शिवानी पिछले 3 सालों से डिजिटल मीडिया के साथ जुड़ी हुई हैं. उन्होंने न्यूज़ हाट और राजस्थान पत्रिका जैसी संस्था के साथ काम किया है. अभी प्रभात खबर की डिजिटल टीम के साथ जुड़कर एजुकेशन बीट पर काम कर रही हैं. शाम्भवी यहां एग्जाम, नौकरी, सक्सेस स्टोरी की खबरें देखती हैं. इसके अलावा वे सिनेमा और साहित्य में भी रुचि रखती हैं.

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