स्क्रीन की दुनिया, जानिए बच्चों के लिए कितना फायदेमंद, कितना नुकसानदायक?

स्टूडेंट की फोन चलाते हुए सांकेतिक फोटो (Image- Canva)
Students Screentime: आज के डिजिटल दौर में बच्चों का स्क्रीन टाइम तेजी से बढ़ रहा है. ऑनलाइन क्लासेस ने पढ़ाई को आसान बनाया है, लेकिन ज्यादा समय तक मोबाइल, लैपटॉप और टैबलेट इस्तेमाल करने से स्वास्थ्य और मानसिक विकास पर असर पड़ सकता है. जानिए स्क्रीन टाइम के फायदे, नुकसान और इसे संतुलित रखने के तरीके.
Students Screentime: आज की डिजिटल वर्ल्ड में मोबाइल, लैपटाॅप और टैबलेट जैसे डिवाइस बच्चों की पहली पसंद बन गए है. वे अपना ज्यादातर समय स्क्रीन के सामने ही बिताते हैं। ऐसे में यह उनके लिए कितना फायदेमंद और कितना नुकसानदायक है, इस बारे में हम इस आर्टिकल में बात करेंगे।
Online Classes: पढ़ाई का सबसे बड़ा डिजिटल माध्यम
आज के समय में शिक्षा भी काफी हद तक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर निर्भर हो गई है। ऑनलाइन क्लासेस, वीडियो लेक्चर, ई-बुक्स और डिजिटल नोट्स ने पढ़ाई को पहले से ज्यादा आसान और सुविधाजनक बना दिया है। बच्चे घर बैठे देश-दुनिया के शिक्षकों से पढ़ सकते हैं और अपनी जरूरत के अनुसार किसी भी विषय को दोबारा समझ सकते हैं।
Benefit of Online Classes: जानें क्या है फायदें?
- पढ़ाई में मदद
- डिजिटल स्किल्स का विकास
- क्रिएटिविटी को मिलता है बढ़ावा
Screentime Drawback: ज्यादा स्क्रीन टाइम के नुकसान
हर सिक्के के दो पहलू होते है। अगर डिजिटल माध्यम से पढ़ाई का फायदा है, तो काफी हद तक नुकसान भी है. एक ओर जहां पूरी दुनिया एक स्क्रीन पर निर्भ हो गई है, वहीं दूसरी ओर इस वजह से कई स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं, नींद पर प्रभाव, आंखों में जलन व रोशनी की समस्या देखने को मिल रही है। इसके अलावा ज्यादा देर स्क्रीन पर देखने की वजह से स्टूडेंट्स के मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर हो रहा है।
Parent's Role: क्या है पेरेंट्स की भूमिका?
ऐसे तो बच्चों की डिजिटल डिवाइस से दूर रखना आज के समय में संभव नहीं है। हालांकि उसके सही इस्तेमाल और किस तरह के इसका इस्तेमाल किया जा रहा है, इसको देखना घर में पूरी तरह माता पिता पर निर्भर करता है। उनका यह ध्यान रखना जरूरी है, कि घर में बच्चे फोन या लैपटाॅप का इस्तेमाल पढ़ाई को लेकर कर रहे हैं, या गेम्य और सोशल साइट्स पर लगे हुए हैं।
Teacher's Comment: जानिए स्कूल की शिक्षिका की राय
रांची के एक फेमस स्कूल की शिक्षिका मुक्ति शाहदेव ने बताया कि स्कूल की पीटीएम में बच्चों को फोन से दूर रखना अहम मैटर रहता है। बच्चों को फोन का कम इस्तेमाल करने और जितना हो सके फोन से दूर रहने की सलाह दी जाती है। कभी बहुत इमरजेंसी कंडीशन में ही बच्चों की क्लासेस ऑनलाइन होती है। ऐसे बच्चों को किताब से पढ़ाई करने के बारे में कहा जाता है। उन्होंने बताया कि कई बच्चे, जो पढ़ाई को लेकर सीरियस हैं, वे सही तरीके से फोन का इस्तेमाल करते है।
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लेखक के बारे में
By प्रगति सिन्हा
मैं प्रगति सिन्हा पिछले लगभग 3 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र से जुड़ी हूं। मुझे मुख्य रूप से शिक्षा से जुड़ी खबरों और उसमे हो रहे बदलावों व अपग्रेडेशन को समझना एवं उसे लोगों तक पहुंचाना पसंद है। प्रभात खबर डिजिटल के माध्यम से मेरा प्रयास रहता है कि शिक्षा जगत में हो रहे महत्वपूर्ण घटनाक्रम, विद्यार्थियों से जुड़े मुद्दे और नई योजनाओं की जानकारी रीडर्स तक पहुंचा सकूं। मैं इससे पहले कोलकाता स्थित सन्मार्ग हिंदी डेली में एजुकेशन रिपोर्टर के तौर पर काम कर चुकी हूं.
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