JEE Main में 99 परसेंटाइल, 12वीं में मिले 75% से भी कम, खतरे में IIT का सपना
Published by : Smita Dey Updated At : 18 May 2026 3:11 PM
स्टूडेंट की सांकेतिक फोटो (AI Generated)
CBSE 12th Result 2026: क्या CBSE की डिजिटल चेकिंग बनी होनहार छात्रों की मुसीबत. जानें कैसे ऑन-स्क्रीन मार्किंग के कारण 12वीं के रिजल्ट में अचानक गिर गए टॉपर्स के नंबर.
CBSE 12th Result 2026: इस साल सीबीएसई 12वीं का रिजल्ट आते ही देश भर के कई घरों में सन्नाटा छा गया. दो साल तक दिन-रात एक करने वाले, कोचिंग के चक्कर लगाने वाले और मॉक टेस्ट में 90% से ज्यादा नंबर लाने वाले स्टूडेंट्स आज परेशान हैं. रिजल्ट उम्मीद से बिल्कुल उल्टा आया है.
सबसे ज्यादा झटका उन होनहार स्टूडेंट्स को लगा है जो हमेशा अपनी क्लास में अव्वल आते थे. मैथ्स, इंग्लिश, फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी जैसे सब्जेक्ट में उनके नंबर उम्मीद से बहुत कम आए हैं. इस गिरावट के पीछे इस साल शुरू हुई एक नई व्यवस्था ‘ऑन-स्क्रीन मार्किंग’ (OSM) को माना जा रहा है.
CBSE 12th Result 2026: आईआईटी का सपना खतरे में
इस गड़बड़ रिजल्ट का सबसे बुरा असर छात्रों के करियर पर पड़ रहा है. Indian Express की रिपोर्ट के अनुसार असम के एक छात्र की कहानी इसका बड़ा उदाहरण है. उसने जेईई मेन्स (JEE Main) में बहुत अच्छा स्कोर किया और उसकी तैयारी भी पक्की थी. लेकिन जब 12वीं का बोर्ड रिजल्ट आया, तो उसके कुल नंबर (एग्रीगेट) 75% से कम रह गए. अब वह जेईई एडवांस्ड (JEE Advanced) परीक्षा देने के लिए योग्य नहीं है. छात्र का कहना है कि दो साल की मेहनत पर बोर्ड के एक गलत फैसले ने पानी फेर दिया. समझ नहीं आ रहा कि कॉलेज अब उसकी जेईई की परफॉर्मेंस को सच मानें या बोर्ड के खराब नंबरों को.
हैरान हैं शिक्षक और होनहार छात्र
यह परेशानी किसी एक या दो कमजोर छात्रों की नहीं है. जो बच्चे हमेशा 95% से ऊपर लाते थे, वे आज परेशान हैं. दिल्ली और देश के कई नामी स्कूलों के टीचर्स का कहना है कि यह किसी बच्चे की नाकामी नहीं है. यह एक जैसी गड़बड़ हर शहर और हर बड़े स्कूल में देखी जा रही है. एक छात्र, जिसे मैथ्स और केमिस्ट्री में 90 नंबर आने की पूरी उम्मीद थी, उसे सिर्फ 63 और 68 नंबर मिले हैं. वहीं इंग्लिश जैसे विषय में हमेशा टॉप करने वाली एक छात्रा को केवल 68 नंबर मिले हैं.
CBSE 12th Result 2026: पहली बार शुरू हुई ‘ऑन-स्क्रीन मार्किंग’
सीबीएसई ने इस बार कॉपियों को जांचने के लिए ‘ऑन-स्क्रीन मार्किंग’ (OSM) सिस्टम की शुरुआत की थी. इसका मतलब है कि टीचर्स ने हाथ में लाल पेन लेकर कॉपियां नहीं जांची, बल्कि कंप्यूटर स्क्रीन पर स्कैन की हुई कॉपियों को देखकर नंबर दिए. टीचर्स का मानना है कि कंप्यूटर स्क्रीन पर कॉपियां जांचना और फिजिकल कॉपी जांचना दो अलग बातें हैं. इसी बदलाव के कारण स्टेप-मार्किंग वाले विषयों में नंबर कट गए.
CBSE 12th Result 2026: री-इवैल्युएशन का भारी खर्च
अब बड़ी संख्या में छात्र अपनी कॉपियों की दोबारा जांच (री-इवैल्युएशन) और फोटोकॉपी के लिए अप्लाई कर रहे हैं. इसके लिए हर विषय के 500 रुपये देने पड़ रहे हैं, जो कई परिवारों के लिए एक बड़ा आर्थिक बोझ है. लेकिन सवाल करियर का है, क्योंकि आज के दौर में 5 या 10 नंबर कम होने का मतलब है किसी अच्छे कॉलेज की सीट हाथ से निकल जाना.
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स्मिता दे प्रभात खबर में डिजिटल कंटेंट क्रिएटर के तौर पर काम कर रही हैं. बुक्स पढ़ना, डांसिंग और ट्रैवलिंग का शौक रखने वाली स्मिता युवाओं को बेहतर करियर गाइड करना और नौकरी के लिए प्रोत्साहित करना पसंद करती हैं.
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