IAS प्रतीक्षा सिंह ने क्यों छोड़ा था बिहार कैडर? पढ़िए SDM से आईएएस बनने तक की संघर्ष भरी कहानी
Published by : Abhinandan Pandey Updated At : 20 Feb 2025 6:29 PM
प्रतीक्षा सिंह की फाइल फोटो
Success Story: सफलता किसी एक प्रयास से नहीं, बल्कि निरंतर मेहनत और अटूट विश्वास से मिलती है. IAS प्रतीक्षा सिंह की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. सपनों को सच करने का जज़्बा, कठिनाइयों से लड़ने का हौसला और कभी न हार मानने का संकल्प. एक साधारण परिवार से आने वाली प्रतीक्षा ने UPSC के सफर में कई चुनौतियों का सामना किया, दो बार असफल भी रहीं, लेकिन हार नहीं मानी.
Success Story: बिहार से उत्तर प्रदेश कैडर में तबादले की वजह से सुर्खियों में आईं IAS प्रतीक्षा सिंह की कहानी सिर्फ एक प्रशासनिक अधिकारी बनने की नहीं है. बल्कि यह जुनून, धैर्य और निरंतर प्रयास की मिसाल है. UPSC परीक्षा में 52वीं रैंक हासिल कर उन्होंने साबित कर दिया कि असफलताओं से सीखकर आगे बढ़ने वाले ही असली विजेता होते हैं.
प्रयागराज से प्रशासनिक सेवा तक का सफर
प्रतीक्षा सिंह का सफर प्रयागराज, उत्तर प्रदेश से शुरू हुआ. उनका परिवार गाजियाबाद के साहिबाबाद में रहता है. उनके पिता शिक्षक हैं, मां गृहिणी और भाई सॉफ्टवेयर इंजीनियर. एक साधारण परिवार में जन्मी प्रतीक्षा के सपने साधारण नहीं थे. वह प्रशासनिक सेवा में जाना चाहती थीं.
2019 में अपनी मास्टर डिग्री पूरी करने के बाद, उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की तैयारी शुरू की. उनका पहला प्रयास 2020 में था, जिसमें उन्होंने प्रीलिम्स और मेंस तो पास कर लिया, लेकिन इंटरव्यू में सफल नहीं हो पाईं. 2021 में, वह प्रीलिम्स भी क्लियर नहीं कर सकीं, लेकिन इसी साल उन्होंने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) की PCS परीक्षा पास कर ली और 7वीं रैंक के साथ डिप्टी कलेक्टर बनीं.
संघर्ष और सफलता: SDM से IAS बनने तक
डिप्टी कलेक्टर बनने के बाद भी प्रतीक्षा का लक्ष्य बड़ा था. उने ऊपर IAS बनने का भूत सवार था. एसडीएम की जिम्मेदारियों के साथ, उन्होंने अपनी UPSC की तैयारी जारी रखी. 2022 में, उनके प्रयासों ने रंग दिखाया और उन्होंने 52वीं रैंक के साथ UPSC परीक्षा पास कर ली.
15 अप्रैल 2024 को उनकी पहली नियुक्ति बिहार के बक्सर जिले में प्रोबेशनरी ऑफिसर और SDM के रूप में हुई. हालांकि, उन्होंने बाद में उत्तर प्रदेश कैडर में स्थानांतरण की मांग की, जो स्वीकार कर ली गई. इसके पीछे एक बड़ी वजह यह भी थी कि उनके पति उत्तर प्रदेश कैडर में IPS हैं.
प्रतीक्षा की कहानी क्यों खास है?
- लगातार प्रयास: दो बार UPSC में असफलता के बावजूद हार नहीं मानी.
- स्मार्ट स्ट्रेटजी: PCS की सफलता से आत्मविश्वास बढ़ाया और UPSC की तैयारी जारी रखी.
- प्रबंधन कला: नौकरी के साथ पढ़ाई में संतुलन बनाना सीखा.
- सपनों से समझौता नहीं: एक बार सरकारी नौकरी मिलने के बाद भी बड़ा लक्ष्य तय किया.
प्रेरणा बन रही हैं प्रतीक्षा सिंह
IAS प्रतीक्षा सिंह की यह यात्रा हर उस युवा के लिए प्रेरणा है, जो असफलताओं से घबराकर अपने सपनों को छोड़ने की सोचते हैं. उनकी कहानी हमें सिखाती है कि मेहनत और लगन से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है. अगर आप UPSC या किसी भी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं, तो याद रखें असफलता अंत नहीं, एक नया सबक है. प्रतीक्षा की तरह अगर आप भी धैर्य और दृढ़ निश्चय बनाए रखते हैं, तो सफलता निश्चित है.
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By Abhinandan Pandey
अभिनंदन पांडेय पिछले दो वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की और दैनिक जागरण, भोपाल में काम किया. वर्तमान में वह प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के हिस्सा हैं. राजनीति, खेल और किस्से-कहानियों में उनकी खास रुचि है. आसान भाषा में खबरों को लोगों तक पहुंचाना और ट्रेंडिंग मुद्दों को समझना उन्हें पसंद है. अभिनंदन ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से की. पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को सही तरीके से लोगों तक पहुंचाने की सोच ने उन्हें इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. दैनिक जागरण में रिपोर्टिंग के दौरान उन्होंने भोपाल में बॉलीवुड के कई बड़े कलाकारों और चर्चित हस्तियों के इंटरव्यू किए. यह अनुभव उनके करियर के लिए काफी अहम रहा. इसके बाद उन्होंने प्रभात खबर डिजिटल में इंटर्नशिप की, जहां उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता की वास्तविक दुनिया को करीब से समझा. बहुत कम समय में उन्होंने रियल टाइम न्यूज लिखना शुरू कर दिया. इस दौरान उन्होंने सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता भी बेहद जरूरी होती है. फिलहाल वह प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ काम कर रहे हैं. बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान उन्होंने कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में कवर किया, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और वीडियो कंटेंट भी तैयार किए. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और भरोसेमंद खबर पहुंचे. पत्रकारिता में उनका लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और एक विश्वसनीय पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.
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